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सेहतः कब्ज की समस्या

आज के शहरी जीवन में कब्ज की शिकायत आम है
Author September 17, 2017 00:54 am

आज के शहरी जीवन में कब्ज की शिकायत आम है। इसे मलावरोध, मलबंध, कोष्ठबद्धता और कान्सटीपेशन आदि भी कहा जाता है। कब्ज दरअसल, आमाशय की स्वाभाविक परिवर्तन की वह अवस्था है, जिसमें मल निष्कासन की मात्रा कम हो जाती है या मलक्रिया में कठिनाई होती है, मल कड़ा हो जाता है, उसकी आवृति घट जाती है या मल निष्कासन के समय अत्यधिक बल का प्रयोग करना पड़ता है और पेट में गैस बनती है। चौबीस या अड़ातालीस घंटे में नियमित रूप से एक बार मल विसर्जन न हो तो उसे मलावरोध कहा जाता है। कब्ज खानपान में असावधानी की वजह से होता है। इसका मुख्य कारण अधिक मिर्च-मसाले वाला भोजन करना, कब्ज बनाने वाले पदार्थों का सेवन करना, भोजन करने के बाद अधिक देर तक बैठना, तेल और चिकनाई वाले पदार्थों का अधिक सेवन करना आदि है। इसका असली कारण भोजन का ठीक प्रकार से न पचना होता है। यह बहुत से रोगों को जन्म देता है।
इस रोग के कारण शरीर के अंदर जहर भी बन जाता है, जिसके कारण शरीर में अनेक बीमारी पैदा हो सकती हैं जैसे- मुंह में घाव, छाले, अफारा, थकान, उदरशूल या पेट में दर्द, गैस बनना, सिर में दर्द, हाथ-पैरों में दर्द, अपच, बवासीर आदि।
कब्ज रोग से पीड़ित रोगी की जीभ सफेद और मटमैली हो जाती है। जीभ मलावृत रहती है तथा मुंह का स्वाद खराब हो जाता है। कभी-कभी मुंह से दुर्गंध आती है।
रोगी व्यक्ति के आंखों के नीचे कालापन हो जाता है और उसका जी मिचलाता रहता है। रोगी की भूख मर जाती है, पेट भारी रहता है और हल्का दर्द बना रहता है, शरीर तथा सिर भारी रहता है।
सिर तथा कमर में दर्द रहता है, शरीर में सुस्ती, चिड़चिड़ापन तथा मानसिक तनाव संबंधी लक्षण भी मिलते हैं।
बचाव
गर कब्ज किसी अन्य रोग विशेष के कारण नहीं है तो जीवन शैली में थोड़ा-सा परिवर्तन करके बचाव की पद्धति अपनाई जा सकती है।
’ कब्ज रोग का उपचार करने के लिए कभी भी दस्त लाने वाली औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए, बल्कि कब्ज के कारणों को दूर करना चाहिए और फिर प्राकृतिक चिकित्सा से इसका उपचार कराना चाहिए।
’ कब्ज को ठीक करने के लिए चोकर सहित आटे की रोटी और हरी पत्तेदार सब्जियां चबा-चबा कर खानी चाहिए। रेशे वाले फल, शाक आदि का नियमित प्रयोग करें। प्रतिदिन कम से कम आठ दस गिलास पानी पीएं। अंकुरित अन्न का अधिक सेवन करने से रोगी व्यक्ति को बहुत लाभ मिलता है। गेहूं का रस अधिक मात्रा में पीने से कब्ज जल्दी ठीक हो जाता है।
’ कब्ज न बनने देने के लिए भोजन को अच्छी तरह से चबा कर खाएं और ऐसा भोजन करें, जिसे पचाने में आसानी हो। रोगी को मैदा, बेसन, तली-भुनी और मिर्च मसालेदार चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। कम चिकनाई वाले आहार जैसे गाय का दूध, पनीर, सूखी रोटी लेनी चाहिए।
’ भोजन में दाल की अपेक्षा सब्जी, बथुआ, पालक आदि शाक का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए। उबली हुई गाजर और पके हुए अमरूद का सेवन सर्वोत्तम होता है।
’ कब्ज को ठीक करने के लिए त्रिफला चूर्ण का प्रतिदिन सेवन करना चाहिए।
’ कब्ज का उपचार करने के लिए रोगी को अपने पेट पर बीस से पच्चीस मिनट तक मिट्टी की या कपड़े की पट्टी करनी चाहिए। यह क्रिया प्रतिदिन करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। इसके बाद रोगी को कटिस्नान करना चाहिए और एनिमा क्रिया करके अपने पेट को साफ करना चाहिए।
’ सुबह सूर्य निकलने से पहले उठ कर खुली हवा में प्रतिदिन टहलना चाहिए। इससे शरीर स्फूर्तिदायक और तरोताजा रहता है और कब्ज आदि से भी बचाता है।
’ कोष्ठबद्धता के रोगी को दोनों समय नियमित रूप से मल त्याग के लिए जाना चाहिए। मल त्याग का समय कभी बदलना नहीं चाहिए। शीर्षसन या सर्वांगासन करने से पेल्विक कोलन में हरकत होकर मल त्याग की संवेदना होती है। प्रात:काल पेट और मूलाधार की मांस पेशियों का गति प्रदान करने वाली व्यायाम करने चाहिए।
’ कब्ज से पीड़ित रोगी को भोजन करने के बाद लगभग पांच मिनट तक व्रजासन करना चाहिए। अगर सुबह उठते ही व्रजासन करें तो शौच जल्दी आ जाती है।
’ अगर लंबे समय से कब्ज हो तो सुबह और शाम को कटिस्नान करना चाहिए और सोते समय पेट पर गरम सिंकाई करनी चाहिए।
’ एक चम्मच आंवले की चटनी गुनगुने दूध में मिला कर लेने और रात को सोते समय एक गिलास गुनगुना पानी पीने से बहुत लाभ मिलता है।
’ सप्ताह में एक बार गरम दूध में एक चम्मच अरंडी का तेल यानी कैस्टर आयल मिला कर पीने से कब्ज कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
’ कब्ज दूर करने के लिए व्यायाम करना भी लाभकारी होता है। व्यायाम से पेट की क्रिया सुधरती है और कब्ज दूर होता है। व्यायाम के लिए पहले पीठ के बल लेट जाएं और दोनों पैरों को उठा कर शरीर के समकोण तक लाकर धीरे-धीरे पुन: नीचे लाएं। इस तरह प्रतिदिन व्यायाम करने से आंत और पेट की स्नायुक्रिया ठीक होती है और कब्ज आदि रोग दूर होते हैं।
’ ज्यादा परेशानी होने पर चिकित्सक से सलाह लेना चाहिए। १

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