ताज़ा खबर
 

हिन्दी दिवस 2017: इन कविताओं में देखें हिन्दी के अलग-अलग रंग

Hindi Diwas Kavita, Poem 2017: पूरे देश में हर साल 14 सितंबर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है। इसी दिन 1949 में भारत की संविधान सभा ने हिन्दी को अंग्रेजी के साथ देश की आधिकारिक भाषा के रुप में स्वीकार किया था।
Hindi Diwas Kavita 2017: हर साल 14 सितंबर को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।

कोई भी जयंती, समारोह या वर्षगांठ हो कविता के बिना वो शायद ही पूरा होते हों। तो आज हिन्दी दिवस पर भला कविता को जिक्र न हो तो ये अधूरा ही लगेगा। 14 सितंबर 1949 में भारत की संविधान सभा ने हिन्दी को अंग्रेजी के साथ देश की आधिकारिक भाषा के रुप में स्वीकार किया था। 26 जनवरी 1950 से संविधान का लागू होने के साथ ही हिन्दी देश की राजभाषा बन भी गई। लेकिन संविधान की मूल भावनाओं के अनुकूल हिन्दी को आने वाले वर्षों में राष्ट्रभाषा बनने के लिए तैयार करना था। इसी के मद्देनजर 1953 से ही हर साल 14 सितंबर को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। हिन्दी दिवस पर हम आपको आजादी से पहले की कुछ कविताएं प्रस्तुत कर रहे हैं। देखिए इन लेखकों ने अपनी भाषा को किन रूपों में देखा है। जहाँ भारतेंदु हरिश्चंद्र ने निज भाषा (हिन्दी) को अपनाने के आह्वान किया है, वहीं अल्लामा इकबाल सभी भारतवासियों को “हिंदी” (हिंद के लोग) के रूप में तसव्वुर करते थे। वहीं रघुवीर सहाय ने आजादी के बाद के वर्षों में हिन्दी का जो हाल हुआ उस पर व्यंग्य किया है। पढ़िए हिन्दी दिवस पर ये चर्चित कविताएं-

हिन्दी को समर्पति भारतेंदु हरिश्चंद्र के दोहे-

निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।

अंग्रेजी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन
पै निज भाषा-ज्ञान बिन, रहत हीन के हीन।

उन्नति पूरी है तबहिं जब घर उन्नति होय
निज शरीर उन्नति किये, रहत मूढ़ सब कोय।

निज भाषा उन्नति बिना, कबहुं न ह्यैहैं सोय
लाख उपाय अनेक यों भले करे किन कोय।

इक भाषा इक जीव इक मति सब घर के लोग
तबै बनत है सबन सों, मिटत मूढ़ता सोग।

और एक अति लाभ यह, या में प्रगट लखात
निज भाषा में कीजिए, जो विद्या की बात।

तेहि सुनि पावै लाभ सब, बात सुनै जो कोय
यह गुन भाषा और महं, कबहूं नाहीं होय।

विविध कला शिक्षा अमित, ज्ञान अनेक प्रकार
सब देसन से लै करहू, भाषा माहि प्रचार।

भारत में सब भिन्न अति, ताहीं सों उत्पात
विविध देस मतहू विविध, भाषा विविध लखात।

सब मिल तासों छांड़ि कै, दूजे और उपाय
उन्नति भाषा की करहु, अहो भ्रातगन आय।

पढ़ें हिन्दी दिवस पर रघुवीर सहाय की कविता-

हमारी हिंदी एक दुहाजू की नई बीवी है
बहुत बोलनेवाली बहुत खानेवाली बहुत सोनेवाली
गहने गढ़ाते जाओ
सर पर चढ़ाते जाओ
वह मुटाती जाए
पसीने से गंधाती जाए घर का माल मैके पहुँचाती जाए
पड़ोसिनों से जले
कचरा फेंकने को ले कर लड़े
घर से तो खैर निकलने का सवाल ही नहीं उठता
औरतों को जो चाहिए घर ही में है
एक महाभारत है एक रामायण है तुलसीदास की भी राधेश्याम की भी
एक नागिन की स्टोरी बमय गाने
और एक खारी बावली में छपा कोकशास्त्र
एक खूसट महरिन है परपंच के लिए
एक अधेड़ खसम है जिसके प्राण अकच्छ किए जा सकें
एक गुचकुलिया-सा आँगन कई कमरे कुठरिया एक के अंदर एक
बिस्तरों पर चीकट तकिए कुरसियों पर गौंजे हुए उतारे कपड़े
फर्श पर ढंनगते गिलास
खूँटियों पर कुचैली चादरें जो कुएँ पर ले जाकर फींची जाएँगी
घर में सबकुछ है जो औरतों को चाहिए
सीलन भी और अंदर की कोठरी में पाँच सेर सोना भी
और संतान भी जिसका जिगर बढ गया है
जिसे वह मासिक पत्रिकाओं पर हगाया करती है
और जमीन भी जिस पर हिंदी भवन बनेगा
कहनेवाले चाहे कुछ कहें
हमारी हिंदी सुहागिन है सती है खुश है
उसकी साध यही है कि खसम से पहले मरे
और तो सब ठीक है पर पहले खसम उससे बचे
तब तो वह अपनी साध पूरी करे।

हिन्दी दिवस पर पढ़ें अल्लामा इकबाल की कविता-

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा
हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिस्ताँ हमारा

ग़ुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में
समझो वहीं हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा

परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमाँ का
वो संतरी हमारा, वो पासबाँ हमारा

गोदी में खेलती हैं, जिसकी हज़ारों नदियाँ
गुलशन है जिसके दम से, रश्क-ए-जिनाँ हमारा

ऐ आब-ए-रूद-ए-गंगा! वो दिन है याद तुझको
उतरा तेरे किनारे, जब कारवाँ हमारा

मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा

यूनान-ओ-मिस्र-ओ- रोमा, सब मिट गए जहाँ से
अब तक मगर है बाकी, नाम-ओ-निशाँ हमारा

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-जहाँ हमारा

‘इक़बाल’ कोई महरम, अपना नहीं जहाँ में
मालूम क्या किसी को, दर्द-ए-निहाँ हमारा

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा
हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसताँ हमारा

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.