शादी में कुंडली मिलान से ज्‍यादा जरूरी है ये उपाय करना

Kundli Milan in Hindi - सुखी वैवाहिक जीवन के लिए गुण मिलान के साथ ग्रह मिलान तथा नवमांश कुंडली एवं मांगलिक, भकूट, गण, नाडी आदि दोष भी देखना अति आवश्यक है।

विवाह निमंत्रण पत्र पर भगवान की तस्वीर छपवाने पर परिवार ने किया बेटे का समर्थन (प्रतीकात्मक तस्वीर)

आज हर दूसरे घर में तलाक देखने को मिल रहे हैं। छोटी सी बात पर बसे बसाये घर मिनटों में ऐसे उजड़ जाते हैं जैसे आंधी आने पर परिंदों के घोंसले। उसका एक बड़ा कारण आज की नई पीढ़ी में घटती सहनशक्ति है तो दूसरा कारण कुंडली मिलान ठीक से न होना है। लोग कुंडलियों को ज्योतिषी से न मिलवा कर स्वयं सॉफ्टवेयर या मोबाइल एप से मिलाके खुद ही Done कर देते हैं और साल दो साल बाद तलाक की स्थिति आ जाती है। सॉफ्टवेयर या मोबाइल एप सिर्फ गुण मिलान करते हैं, वो ग्रहों की युक्ति या दोष नहीं बताते। तलाक का कारण अगर आपको शादी से पहले पता चल जाए तो आप कुंडली के अनुसार उचित और स्थायी उपाय करके शादी करेंगे। इससे आपको तलाक का सामना नहीं करना पड़ेगा।

प्राचीन समय से हमारे समाज में विवाह का निर्णय लेने हेतु कुंडली मिलान का प्रचलन है और मुख्य तौर पर देखा गया है कि लोग अक्सर गुण मिलान को ही आधार मान कर विवाह का निर्णय लेते हैं, जब कि वास्तविकता इससे कुछ अलग है।

गुण मिलान कुंडली मिलान का सिर्फ एक भाग है, इसके अलावा भी कुछ तत्व है जिन्हें कुंडली मे देखना जरूरी होता है जैसे कि-

1 व्यक्ति का लग्न भाव – लग्न भाव व्यक्ति के स्वयं के बारे मे बताता है,जिनका लग्न मज़बूत होता है वह अच्छे व्यक्तित्व के मालिक होते हैं और जिनका लग्न खराब होता है समाज मे वह लोग बुरे व्यक्तित्व के जाने जाते हैं।

2 वाणी भाव – कुंडली मे दूसरा भाव वाणी भाव कहलाता है। इस भाव से हम व्यक्ति के बात करने की शैली का आंकलन कर सकते हैं। जिस व्यक्ति का वाणी भाव खराब होगा वह अक्सर दूसरों पर ताने कसता दिखेगा, ऐसी बात कहेगा जिससे वह दूसरों को नीचा दिखा सके, अभद्र भाषा बोलेगा।

3 संतान – कुंडली का पांचवा भाव संतान भाव कहलाता है। इस भाव से संतान सुख का आंकलन होता है। अक्सर लोग मांगलिक दोष और नाड़ी दोष आदि को संतान मे बाधक मानते हैं जबकि असलियत में ऐसा नहीं होता। जिस व्यक्ति का संतान भाव खराब होगा उससे संतान प्राप्ति में बाधा जरूर आएगी, इसमे नाड़ी दोष अथवा मांगलिक का कोई संबंध नहीं होता।

4 विवाह भाव – कुंडली का सप्तम भाव विवाह भाव कहलाता है। इस भाव से हम वैवाहिक सुख का आंकलन करते हैं। जिस व्यक्ति का विवाह भाव खराब होगा उससे अपने जीवन मे वैवाहिक सुख की कमी महसूस होगी, ऐसा व्यक्ति दूसरों के साथ मिलजुल कर नहीं चल पाता, ऐसे व्यक्ति के अपने जीवनसाथी के साथ मतभेद रहते हैं। किसी व्यक्ति के चाहे 36 में से 36 गुण ही क्यों न मिले, अगर उसका विवाह भाव खराब है तो उससे ऊपर लिखे फल जरूर मिलेंगे।

5 आयु – कुंडली का आठवां भाव आयु भाव होता है जो कि आयु की आंकलन के लिए देखा जाता है। कुंडली मिलान में आयु गणना की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि अगर आपका विवाह किसी अल्प आयु वाले व्यक्ति से हो जाये और विवाह के थोड़े समय बाद आपके जीवनसाथी की मृत्यु हो जाये तो जीवन कठनाइयों का सागर बन जाता है।

गुण मिलान के बाद इन सब तत्वों के आंकलन को ग्रह मिलान कहा जाता है। सुखी वैवाहिक जीवन के लिए गुण मिलान के साथ ग्रह मिलान तथा नवमांश कुंडली एवं मांगलिक, भकूट, गण, नाडी आदि दोष भी देखना अति आवश्यक है, अगर किसी व्यक्ति के गुण मिलान में अंक कम है और ग्रह मिलान उपयुक्त है तो भी विवाह हो सकता है।

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First Published on April 28, 2017 5:31 pm

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