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गोरे होने के लिए करती हैं इन चीजों का इस्तेमाल तो सोचें फिर एक बार

क्रीम के जरिए आपको स्थायी गोरापन नहीं मिलता है। ग्लूटाथियोन नाम के ड्रग को पूरे इंटरनेट में उम्र कम करने वाले एजेंट के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है। जबकि सच्चाई ये है कि ग्लूटाथियोन हमारे शरीर में मौजूद होता है। उम्र बढ़ने के साथ ये घटता जाता है।
अगर आप भी करते हैं गोरेपन वाली क्रीम का इस्तेमाल तो हो जाएं सावधान। Image Source: Indian Express

भारत में डार्क स्किन होना एक अभिशाप की तरह देखा जाता है। इसी को आधार बनाकर सौंदर्य प्रसाधन कंपनियां अपना व्यापार बढ़ाती हैं। वो डार्क स्किन का डर दिखाकर लड़कियों को अपने प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने के लिए उत्साहित करती हैं। उन्हें इस बात का अहसास दिलाती हैं कि अगर आपकी त्वचा का रंग साफ नहीं है तो आपके हाथ से बहुत से अवसर जा सकते हैं। इसी वजह से अमूमन सभी भारतीय महिलाएं इनका प्रयोग नियमित तौर पर करती हैं। लेकिन विशेषज्ञों ने इनके इस्तेमाल पर चिंता जाहिर करते हुए चेतावनी दी है। उनका मानना है कि इन प्रोडक्ट्स के ज्यादा उपयोग से जिंदगी भर की परेशानी तोहफे के रूप में मिल सकती है। दिल्ली के अपोलो अस्पताल के प्लास्टिक, कॉस्मेटिक और रिकंस्ट्रक्टिड सर्जरी के सीनियर कंसल्टेंट कुलदीप सिंह का कहना है कि गोरेपन वाली बहुत सी क्रीम में स्टियोराइड मौजूद होता है। जिसकी वजह से आपकी त्वचा को जीवनभर का नुकसान पहुंच सकता है।

सिंह ने कहा कि इन क्रीम के जरिए आपको स्थायी गोरापन नहीं मिलता है। ग्लूटाथियोन नाम के ड्रग को पूरे इंटरनेट में उम्र कम करने वाले एजेंट के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है। जबकि सच्चाई ये है कि ग्लूटाथियोन हमारे शरीर में मौजूद होता है। उम्र बढ़ने के साथ ये घटता जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसका सही सही इस्तेमाल एंटी-कैंसर ड्रग के जहर को कम करने के लिए किया जाता है। बाकी का सब झूठ है और इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

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ओरिफ्लेम इंडिया की ब्यूटी एंड मेकअप एक्सपर्ट आकृति कोचर ने बताया कि गोरेपन वाली क्रीम केवल एक हद तक त्वचा की लेयर को गोरा करती हैं। वे किसी की त्वचा के रंग को बदल नहीं सकती हैं। हर शख्स की स्किन क्वालिटी के हिसाब से इन ट्रीटमेंट का असर दिखता है। इनके ज्यादा इस्तेमाल से त्वचा संबंधी कई रोग हो सकते हैं।

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हम सभी जानते हैं कि बाजार में इस वक्त गोरा करने और उम्र कम करने वाली क्रीम मौजूद हैं। जो हर हथकंडे को अपनाकर अपना व्यापार कर रही हैं। बाजार विश्लेषक एसी निलसन ने 2010 में बताया था कि भारत में हर साल गोरा करने वाली क्रीम का व्यापार 432 मिलियन डॉलर (2,600 करोड़) होता है। वहीं 2012 में भारतीयों ने 233 टन के इन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर दिया था।

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