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आंखों की सर्जरी के लिए कतई ना करें सर्दियों का इंतजार, बढ़ सकती है बीमारी

कई लोग मोतियाबिंद, क्रॉस आईज आदि की सर्जरी के लिए सर्दियों के मौसम का चुनाव करते हैं क्योंकि उनका मानना है कि इस मौसम में सर्जरी कराने से ठीक होने की संभावना ज्यादा होती है।
Author नई दिल्ली | December 1, 2016 16:37 pm
प्रतिकात्मक फोटो।

कई लोग मोतियाबिंद, क्रॉस आईज आदि की सर्जरी के लिए सर्दियों के मौसम का चुनाव करते हैं क्योंकि उनका मानना है कि इस मौसम में सर्जरी कराने से ठीक होने की संभावना ज्यादा होती है। इस बारे में आई टेक विजन सेंटर की नेत्र चिकित्सक डॉक्टर अंशिमा ने कहा, “पुराने समय में यह मान्यता थी की जाड़े का मौसम ही मोतियाबिंद जैसी आंखों की समस्याओं की सर्जरी के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता था जिसके पीछे यह कारण था कि पहले तकनीक उतनी एडवांस नहीं थी और जो भी सर्जरी होती थी उसमें टांके लगते थे। जिसकी वजह से पसीना आंखों में जाने से उसमें इंफेक्शन होने का खतरा होता था लेकिन आज टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस हो गई है कि सर्जरी के बाद किसी भी प्रकार के चीरे या टांके की जरूरत नहीं होती है, इसलिए सर्जरी सिर्फ जाड़े के मौसम में ही कराई जाए यह बस एक गलतफहमी है।”

अंशिमा ने आगे कहा, “मैं तो ये सलाह दूंगी की आंखों में मोतियाबिन्द या कोई भी ऐसी समस्या जिसके लिए सर्जरी की जरूरत हो तो उसे किसी भी मौसम के इंतजार में टालें नहीं बल्कि जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर द्वारा बताई गई सर्जरी करा लें।” इसके अलावा डॉक्टर अंशिमा ने यह भी बताया की आंखों की सर्जरी में किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है :

आंखों की सर्जरी के लिए किसी अच्छे आईकेयर सेंटर का ही चुनाव करें।

सर्जरी डॉक्टर द्वारा बताई गई हर सावधानी का पालन करें।

अपनी आंखों को धूप और धुएं से बचाएं।

नहाते या चेहरा धोते वक्त इस बात का खास ख्याल रखें की साबुन आंखों में ना जाए।

आँखों को ना तो मलें ना ही गंदे हाथो से छुएं ।

बिना डॉक्टर की सलाह लिए किसी भी प्रकार के आई मेकअप का प्रयोग ना करें।

पांच वर्ष की मासूम बच्ची की अकाल मौत के बाद दुखी मां-बाप ने बेटी की आंखें दानकर दो परिवारों के अंधेरे जीवन में रोशनी भर दी। गत 23 अगस्त को स्कूल वैन से घर लौट रही वृन्दावन की स्कूली छात्रा ऐश्वर्या नगर पालिका की कूड़ा गाड़ी के साथ हुई दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थी। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डाक्टरों की सलाह पर परिजन उसे दिल्ली ले गए। पिता लक्ष्मीनारायण ने बताया कि डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। लेकिन अंतिम सांस लेने से पूर्व अपने स्कूल में नेत्रदान की महत्ता जान चुकी बच्ची ने अपने नेत्रदान करने की इच्छा प्रकट की। बच्ची की मृत्यु उपरांत अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पहुंचकर बेटी का संकल्प पूरा किया।

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