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गोली से भी तेज़ है यह…

क्या आप जानना चाहते हैं कि ऐसा क्या है जो गोली से भी तेज़ है... हम यहां बात कर रहे हैं कॉनकॉर्ड की। कॉनकॉर्ड दुनिया के सबसे खूबसूरत विमानों में से एक है। रिपोर्ट के मुताबिक 1976 से लेकर 2003 में रिटायर होने तक यह हवाई सफ़र करने वालों का दुलारा बना रहा।
गोली से भी तेज उड़ता था यह सबसे खूबसूरत विमान

क्या आप जानना चाहते हैं कि ऐसा क्या है जो गोली से भी तेज़ है… हम यहां बात कर रहे हैं कॉनकॉर्ड की। कॉनकॉर्ड दुनिया के सबसे खूबसूरत विमानों में से एक है। रिपोर्ट के मुताबिक 1976 से लेकर 2003 में रिटायर होने तक यह हवाई सफ़र करने वालों का दुलारा बना रहा।

27 साल की सेवा के बाद इस विमान को पहले एयर फ्रांस और फिर ब्रिटिश एयरवेज़ ने रिटायर कर दिया। जीवन में कुछ चीज़ों का मतलब विलासिता होता है और कॉनकॉर्ड में उड़ना भी ऐसा ही था।

आपको बता दें कि कॉनकॉर्ड एक साथ 100 यात्रियों को लेकर उड़ सकता था और अटलांटिक तक के सफ़र के लिए हर यात्री को करीब 4,000 पाउंड (क़रीब चार लाख रुपए) चुकाने पड़ते थे।

कॉनकॉर्ड को सबसे खास बनाता थी इसकी रफ़्तार, जो राइफ़ल की गोली से भी तेज़ थी। क्यों चौंक गए ना… जी हां, कॉनकॉर्ड पहला सुपरसोनिक विमान था। मतलब इसकी रफ़्तार आवाज़ की गति से भी तेज़ थी। इसकी चोंच जैसी नाक इसे मैक-2 की रफ़्तार देने में सक्षम थी।

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बीबीसी रेडियो के आर्काइव से 1969 की एक क्लिप मिली, जब कॉनकॉर्ड ने अपनी पहली परीक्षण उड़ान भरी थी। पहली बार लोगों ने इसके इंजनों की गुर्राहट सुनी थी।

कॉनकॉर्ड के फ्लाइट डेवलपमेंट मैनेजर जेम्स एंड्रयू का कहना है कि, “कॉनकॉर्ड का नियंत्रण बहुत अच्छा था और इसे बोइंग 747 जैसे विमानों के मुक़ाबले उड़ाना आसान था। यह न सिर्फ़ पायलटों का, बल्कि यात्रियों का भी पसंदीदा विमान था।”

एंड्रयू बताते हैं कि विमान में कई पारंपरिक उपकरण लगाए गए थे, लेकिन कुछ चीजें आधुनिक भी थी और कंप्यूटराइज़्ड भी।

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