December 04, 2016

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छठ पूजा 2016: इस पर्व के गीतों में है परंपरा की महक, पूजा के घाट पर चलते हैं ये भाजपुरी गाने

Chhath Pooja Song: इन गीतों से छठ पूजा का विधि-विधान और पारंपरिक कथाएं जुड़ी हैं। इन गीतों में आराध्य देव सूर्य की महिमा का गुणगान है। छठ पर्व के गीतों में परंपरा की महक होती है।

छठ पर्व के गीतों में परंपरा की महक होती है। इन गीतों से छठ पूजा का विधि-विधान और पारंपरिक कथाएं जुड़ी हैं।

लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर गीत गूंजने लगे हैं। केलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेडराय, आदित लिहो मोर अरगिया, दरस देखाव ए दीनानाथ, उगी है सुरुजदेव, हे छठी मइया तोहर महिमा अपार, काच ही बास के बहंगिया बहंगी लचकत जाय, छठ पर्व के सबसे प्रसिद्ध गीतों में से एक है। जल्दी-जल्दी ऊग हे सूरुज देव…, कइलीं बरतिया तोहार हे छठ मइया…, कवने दिन उगी छई हे दीनानाथ… जैसे पारंपरिक गीत घरों और बाजारों में बजते ही छठ पूजा का माहौल बनने लगता है। इन गीतों से छठ पूजा का विधि-विधान और पारंपरिक कथाएं जुड़ी हैं। इन गीतों में आराध्य देव सूर्य की महिमा का गुणगान है। छठ पर्व के गीतों में परंपरा की महक होती है।

प्रसिद्ध गायक-गायिकाओं की सीडी, डीवीडी एवं कैसेट दुकानों में जोर शोर से बिक रहे हैं। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी अनेक भोजपुरी गायकों के नए-नए छठ गीत के कैसेट बाजार में आए हैं। छठ व्रत से जुड़े पुराने गीतों सहित नए गीतों को पसंद किया जा रहा है। इसे लेकर म्यूजिक सीडी विक्रेताओं की दुकानों में दीपावली के पहले से ही चहल-पहल दिख रही है। इस बार शारदा सिन्हा, देवी, मालिनी अवस्थी, कल्पना, पवन सिंह, छैला बिहारी, अजीत कुमार अकेला एवं अन्य प्रमुख गायकों द्वारा गाये गए गीतों के कैसेट बड़ी तेजी से बिक रहे हैं। बाजार में शारदा सिन्हा के गाए छठ गीतों का क्रेज अब भी कायम है।

फेमस वोकलिस्ट और विभिन्न भोजपुरी कार्यक्रमों में जज की भूमिका निभा चुके राजेश पांडेय कहते हैं, हम चार महान देवताओं माता, पिता, गुरु और सूर्य का साक्षात दर्शन करते हैं। छठ पूजा के समय हम ब्रह्म मुहूर्त में बिस्तर छोड़ देते हैं। यह विलासिता का त्याग है। इसके साथ ही सूर्य की असंख्य किरणें ऊर्जा के रूप में हममें समाहित होती हैं। इस लिहाज से भी छठ पर्व लोकप्रिय हो रहा है। छठ पूजा पर गीतों की महिमा पर रोशनी डालते हुए उन्होंने कहा कि ‘आठ ही काठ के ओठरिया है दीनानाथ…’ जैसे गीतों में परंपरा की महक है। भोजपुरी गायिका देवी, पवन, अनु दुबे और अन्य गायकों के गाए गीतों की अच्छी मांग है। इस वर्ष कई नए-नए कलाकारों ने छठी माई के गीतों की सीडी बाजार में उतारा है, जिसकी लोगों में काफी मांग देखी जा रही है।

वीडियो: पद्मश्री शारदा सिन्हा का छठ पर्व पर हाल में रिलीज हुआ गाना

कहीं शारदा सिन्हा की आवाज रस बरसा रही है कि ‘मोर जिया जाएला महंगा मुंगेर’ तो कहीं देवी के सुर कानों में पर्व की महिमा बखान कर रही है कि ‘कांच ही बांस की बहंगिया, बहंगी लचकत जाए’। इस समय बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रमुख चौक-चौराहों पर कानों में माटी की सोंधी खुशबू में लिपटे गीत बजने शुरू हो जाते हैं। ‘मरबो रे सुगवा धनुष से, सुग्गा गिरे मुरुझाए’ से लेकर ‘दरसन दीन्ही अपार हे छठ मइया दरसन दीन्ही अपार’। गीतों के बिना मानो छठ पर्व में रंग ही नहीं आता है।

छठ गीतों से जुड़ी एक रोचक बात ये है कि ये एक ही लय में गाए जाते हैं। ‘छठ पूजा’ के लोकगीतों की चर्चा होते ही सबसे पहले पद्मश्री से सम्मानित शारदा सिन्हा का नाम जेहन में आता है। ऐसे कई गीत हैं, जिन्हें शारदा सिन्हा ने अपनी-अपनी मधुर आवाज देकर अमर कर दिया है। लोकगीतों के अलावा उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी गीत गाए हैं। सूर्य की उपासना का पावन पर्व ‘छठ’ अपने धार्मिक, पारंपरिक और लोक महत्व के साथ ही लोकगीतों की वजह से भी जाना जाता है। घाटों पर ‘छठी मैया की जय, जल्दी-जल्दी उगी हे सूरज देव’, ‘कईली बरतिया तोहार हे छठी मैया’, ‘दर्शन दीहीं हे आदित देव’, ‘कौन दिन उगी छई हे दीनानाथ’, जैसे गीत सुनाई पड़ते हैं।

वीडियो: छठ महापर्व पर शारदा सिन्हा के गानों का नया एल्बम

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First Published on November 4, 2016 10:51 am

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