December 05, 2016

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दिवाली रंगोली 2016: दीपावली में घर पर ये खास डिजाइन बनाकर करें लक्ष्मी का स्वागत

Rangoli Design 2016: देश के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग नाम से जाना जाता है। बंगाल और असम में इसे अल्पना कहते हैं। आंध्र प्रदेश में इसे मुगुल्लू कहते हैं। छत्तीसगढ़ में इसे चौकपूर्णा कहते हैं।

रंगाली बनाने के लिए अब सिंथेटिक रंगों का भी इस्तेमाल किया जाने लगा है

दिवाली रोशनी के साथ साथ रंगों का त्योहार भी है। दिये, मोमबत्तियां, पठाखों के अलावा इस त्योहार पर रंगोली भी बनाई जाती है। रंगोली भारत की एक पारंपरिक कला है। दिवाली पर रंगोली बनाने की परंपरा देश भर में है। देश के अलग अलग हिस्सों में इस् अलग अलग नाम से जाना जाता है। बंगाल और असम में इसे अल्पना कहते हैं। तमिलनाडु में इसे कोलम नाम से जाना जाता है। आंध्र प्रदेश में इसे मुगुल्लू कहते हैं। छत्तीसगढ़ में इसे चौकपूर्णा कहते हैं। केरल में ओणम के त्योहार में फूलों से रंगोली बनाई जाती है जिसे पूकालम कहते हैं। रंगोली की डिजाइन ज्यामितीय आकारों में बनाई जाती है। हर जगह रंगोली शुभ मानी जाती है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि दिवाली के दिन लक्ष्मी देवी घर आती हैं इसलिए लक्ष्मी देवी के स्वागत के लिए घर के दरवाजे पर या आंगन में रंगोली बनाई जाती है। रंगोली अधिकतर घर की महिलाएं ही बनाती है।

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रंगोली बनाने की परंपरा धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा हैं। रंगोली बनाने के लिए आमतौर पर चावल और आंटे का इस्तेमाल किया जाता है। बदलते वक्त के साथ अब रंगोली बनाने के साधन भी बदल गए हैं।

रंगोली बनाने में चावल के आंटे का इस्तेमाल किया जाता है। रंगोली बनाने में चावल के आंटे का इस्तेमाल किया जाता है।

अब रंगोली बनाने के लिए पारंपरिक साधनों के अलावा सिंथेटिक रंगों का भी इस्तेमाल होता है। रंगोली दिवाली की पूजा से ठीक पहले बनाए जाती है। डिजाइन तैयार हो जाने के बाद इसे दिया और फूलों से सजाया जाता है।

पीले रंग के तौर पर हल्दी का इस्तेमाल किया जाता है पीले रंग के तौर पर हल्दी का इस्तेमाल किया जाता है

रंगोली की डिजाइन में प्राकृतिक चीजों का प्रस्तुतीकरण किया जाता है। रंगोली की डिजाइन में कमल का फूल अधिकांश रुप से बनाया जाता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि कमल के फूल पर लक्ष्मी देवी आकर बैठती हैं।

रंगोली घर के दरवाजे या आंगन में बनायी जाती है रंगोली घर के दरवाजे या आंगन में बनायी जाती है

रंगोली के रंग पारंपरिक तौर पर चावल के आंटे से बनाए जाते हैं। रंगोली के रंगों में लाल रंग का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है। लाल रंग को शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा पीले रंग के रूप में हल्दी का इस्तेमाल किया जाता है। पीले के अलावा हरे रंग का इस्तेमाल भी किया जाता है जो कि हरियाली और समृद्धि का प्रतीक है।

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First Published on October 27, 2016 4:06 pm

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