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जब नहीं थे रबड़ के कंडोम, तब होता था कछुए के कवच और जानवरों के सींग का इस्तेमाल

हाल ही एक कंपनी ने बाजार में अचार फ्लेवर वाले कंडोम उतारे हैं। देसी एंड सेक्सी फील लाने के लिए। आम से लेकर पान वाले फ्लेवर के बाद...

अपने यहां कंडोम पर कम ही बात होती है। टैबू जो है। होती भी है, तो चोरी छिपे। वह भी आधी अधूरी और अज्ञानता से भरी। कंडोम की बात इसलिए, क्योंकि हाल ही एक कंपनी ने बाजार में अचार फ्लेवर वाले कंडोम उतारे हैं। देसी एंड सेक्सी फील लाने के लिए। आम से लेकर पान वाले फ्लेवर के बाद अचार का तड़का थोड़ा अजीब लगता है। वैसे फ्लेवर वाले से पहले डॉटेड (दानेदार) से लेकर पतला महसूस (फील थिन) कराने वाले कंडोम भी खूब चर्चा में रहे। लेकिन क्या आपको पता है कि जब कंडोम नहीं था, तब इनकी जगह क्या इस्तेमाल होता था। लोग कैसे सेफ सेक्स करते थे। वे कैसे एड्स और सेक्सुअली ट्रांसमिटिड डिसिसेज़ (एसटीडी) से खुद को बचाते थे।

SKYN के रिसर्च के मुताबिक सबसे पुराने कंडोम का प्रमाण 15 हजार बीसी के आसपास गुफाओं में बनी पेंटिंग्स में देखने को मिला था। इसमें लोगों का प्राइवेट पार्ट किसी नुलीली चीज से ढंका दिखता है। हालांकि, यह साफ नहीं कि तब इसे ढंकने के लिए किस चीज का इस्तेमाल किया गया था। ईसा काल शुरू होते-होते लिनेन के कंडोम प्रचलन में थे, जो हाथ से सिले जाते थे।

एक नजर में देखिए कंडोम का इतिहास। कब और कैसे बदले इसके स्वरूप और आकार। (फोटो सोर्सः एसकेवाईएन कंडोम)

15 वीं सदी में एशिया में प्राइवेट पार्ट के ऊपरी हिस्से को ढंकने वाले ही कंडोम होते थे, जिसे ऊंची जातियों के लोग ही इस्तेमाल करते थे। वहीं, चीन में यह ऑइल सिल्क पेपर से भेंड़ की आंत से बने होते थे। जबकि जापान में यह कछुए के शेल (कवच) या किसी जानवर के सींग के बने होते थे।

पहले जब कंडोम की खोज नहीं हुई थी, तब लोग इसी तरह के जानवरों से सींग और बाकी चीजों को शारीरिक संबंध बनाने के दौरान इस्तेमाल करते थे। (फोटो सोर्सः जिफी इमेजेस )

इसके बाद रबड़ का पहला कंडोम आया। दरअसल, वल्केनाइजेशन एक केमिकल प्रक्रिया है। इसमें रबड़ को ड्यूरेबल मटीरियल में तब्दील किया जाता है। 1839 में चार्ल्स गुडइयर ने इसकी खोज की थी। साल 1844 में उन्होंने इसका पेटेंट कराया। फिर 1855 में पहला रबड़ का कंडोम बनाया गया। 1850 के अंत में कई रबड़ कंपनियां बड़े स्तर पर उत्पादन कर रही थीं, जिसमें रबड़ के कंडोम भी थे। पहला रबड़ का कंडोम साइकिल के टायर के ट्यूब जैसा पतला था।

साल 2008 के बाद कंडोम की दुनिया में नए और अनोखे प्रयोग देखने को मिले। रबड़ के कंडोम अब आम से लेकर पान तक के फ्लेवर, डॉटेड से लेकर प्लेन टेक्सचर में आने लगे थे। (फोटो सोर्सः पिक्साबे)

1957 में ब्रिटेन ने पहला लूब्रिकेटेड (चिकनाई वाला) कंडोम मार्केट में उतारा। 1990 में इनमें भारी बदलाव देखने को मिला। साल 2008 के बाद हालात और बदले। अब लेटेक्स कंडोम के बजाय रंगीन, टेक्चर्ड और फ्लेवर्ड कंडोम बाजार में उपभोक्ताओं को लुभा रहे थे। इसमें अचार वाला सबसे लेटेस्ट है।

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