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ये हैं भारत के वो सात क्रिकेटर्स जिनका एक समय में था खूब नाम लेकिन अब हैं गुमनाम

भारतीय टीम में कई ऐसे खिलाड़ी आए जो जिन्होंने शुरूआत तो बहुत अच्छी की लेकिन अपनी क्षमता और प्रतिभा के साथ न्याय नहीं कर पाए।
Author नई दिल्ली | December 4, 2016 09:20 am
इस तस्वीर का इस्तेमाल खबर की प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (Representational Image)

बीते कुछ वर्षों में भारतीय टीम में कई ऐसे खिलाड़ी आए जो जिन्होंने शुरूआत तो बहुत अच्छी की लेकिन अपनी क्षमता और प्रतिभा के साथ न्याय नहीं कर पाए। उनमें से कई खिलाड़ी ऐसे थे जो असाधारण प्रतिभा के धनी थे तो वहीं, कई ऐसे थे जिन्होंने बहुत कम उम्र में ही राष्ट्रीय टीम में खेलने की योग्यता और कौशल का सबूत दिया था। इन खिलाड़ियों में कुछ का भविष्य इंजरी और अस्वस्थ्य होने के कारण खतरे में पड़ गया तो कुछ ने खुद ही अपना भविष्य बिगाड़ लिया। कुछ खिलाड़ी ऐसे भी आए जिनमें प्रतिभा तो थी लेकिन वे मौकों को भुना नहीं पाए। हम आपको ऐसे ही कुछ भारतीय क्रिकेटर्स के बारे में बता रहे हैं, जो चमकने के बाद धुमिल पड़ गए…

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इरफान पठान: इरफान पठान एक समय भारतीय तेज गेंदबाजी की रीढ़ थे। उन्होंने 2003-04 में राष्ट्रीय टीम में मात्र 19 साल की उम्र में जगह बनाई थी। इरफान की स्विंग गेंदबाजी से प्रभावित होकर क्रिकेट पंडितों ने उनकी तुलना महान वसीम अकरम से की थी। उन्होंने टेस्ट मैच के पहले ही ओवर में पाकिस्तान के खिलाफ हैट्रिक लेकर भारत के लिए रिकॉर्ड बनाया। जब ग्रेग चैपल भारत के कोच बने उन्होंने इरफान पठान को एक आॅलराउंडर के रूप में उभारने की कोशिश की और यहीं से इरफान की गेंदबाजी की धार कुद पड़ने लगी। आखिरकार पठान को अपने खराब प्रदर्शन के कारण राष्ट्रीय टीम में अपना स्थान गवांना पड़ा और वो फिर कभी मजबूती के साथ वापसी नहीं कर पाए। उन्होंने भारत के लिए 29 टेस्ट मैचों में 1105 रन और 100 विकेट लिए। इरफान ने 120 वनडे मैचों में 1544 रन बनाए और 173 विकेट लिए। 24 टी20 मैचों में इरफान ने 172 रन बनाया और 28 विकेट चटकाए हैं।

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रॉबिन उथप्पा: कर्नाटक के बल्लेबाज रॉबिन उथप्पा ने साल 2006 में इंग्लैंड के खिलाफ बहुत ही धमाकेदार अंदाज में अपने एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरूआत की थी। उन्होंने अपने डेब्यू मैच में 86 रन बनाए थे। उथप्पा को उनके बेखौफ बल्लेबाजी के कारण ‘द वॉकिंग असैसिन’ निक नेम से जाने जाना लगा था। उन्होंने भारत की 2007 टी20 विश्वकप जीत में अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन, खराब फॉर्म और कई बार टीम में मिले मौके को न भुना पाने के कारण उथप्पा का करियर थम गया।

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प्रज्ञान ओझा: गेंद के साथ जुझारू प्रदर्शन करने वाले बाएं हाथ के स्पिनर प्रज्ञान ओझा ने 2008 में कराची में बांग्लादेश के खिलाफ वनडे मैच से अपने अंतराष्ट्रीय क्रिकेट करियर की शुरूआत की थी। उन्होंने 2009 में श्रीलंका के खिलाफ अपने टेस्ट करियर की शुरूआत की थी। 2013 तक वो भारतीय टीम के सदस्य रहे। लेकिन, खराब फॉर्म और रविचंद्रन अश्विन के उदय ने ओझा के करियर पर विराम लगा दिया।

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युसुफ पठान: अपनी धाकड़ और तेज बल्लेबाजी के लिए मशहूर युसुफ पठान ने भारतीय टीम में पिंच हिटर के तौर पर अपना स्थान बनाया था। 2007 में देवधर ट्रॉफी और इंटर स्टेट टी20 चैम्पियनशिप में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें 2007 टी20 विश्वकप टीम में शामिल किया गया था। युसफ पठान को 2011 वर्ल्ड कप टीम और उसके बाद एशिया कप के लिए टीम में शामिल किया गया था लेकिन, बल्ले और गेंद दोनों से ही वो कुछ खास नहीं कर सके और टीम में अपना स्थान गवां बैठे। युसुफ पठान ने भारत के लिए 57 वनडे और 22 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं।

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पीयूष चावला: दाहिने हाथ के लेग स्पिनर पीयूष चावला ने अंडर 19 विश्व कप के फाइनल में 4 विकेट लेकर राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई। चावला ने मोहाली में 2006 में भारतीय टेस्ट टीम में डेब्यू किया और सचिन के बाद टेस्ट मैच खेलने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने। उसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रदर्शन में एकरूपता न रखने के कारण उन्हें टीम से अपना स्थान गवांना पड़ा। रवीन्द्र जडेजा के उदय ने चावला के करियर पर विराम लगा दिया। पीयूष चावला ने भारत के लिए तीन टेस्ट, 25 वनडे और मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने क्रमश: 7 और 32 विकेट लिए हैं।

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नमन ओझा: मध्यप्रदेश के खिलाड़ी नमन ओझा एक शानदार विकेटकीपर बल्लेबाज हैं इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन राष्ट्रीय टीम में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी, दिनेश कार्तिक, ऋद्धिमान साहा आदि की मौजूदगी के कारण नमन ओझा का स्थान नहीं बन सका। नमन ओझा के भाग्य ने उनका साथ नहीं दिया। उन्होंने भारत के लिए 1 टेस्ट मैच और 1 वनडे मैच खेला। अब राष्ट्रीय टीम में उनकी वापसी मुश्किल है क्योंकि ऋषभ पंत और संजू सैमसन जैसे विकेटकीपर बल्लेबाज उम्र में उनसे काफी छोटे हैं तथा घरेलु क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

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मनोज तिवारी: बंगाल के कप्तान मनोज तिवारी भी एक ऐसे ही प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं जिनमें राष्ट्रीय टीम में खेलने के लिए सभी जरूरी काबिलियत मौजूद थी। लेकिन, ऐन मौकों पर इंजर्ड होने के कारण उनका क्रिकेट करियर ढलान की ओर बढ़ गया। एक आक्रामक बल्लेबाज के रूप में मनोज तिवारी ने सेलेक्टर्स का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। लेकिन, भाग्य ने उनका साथ नहीं दिया और वो इस समय घरेलु क्रिकेट में खेल रहे हैं। मनोज तिवारी ने भारत के लिए 8 वनडे और 3 टी20 मुकाबले खेले हैं।

 

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