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BCCI के राज्य संघों को पैसा देने पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बीसीसीआइ और राज्य क्रिकेट संघों के बीच सारे वित्तीय लेन-देन पर रोक लगा दी। साथ ही शीर्ष क्रिकेट संस्था को निर्देश दिया कि जब तक वह न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा पैनल की सुधार की सिफारिशों को लागू नहीं करती, वह राज्य संघों को कोई भी धनराशि वितरित नहीं सकती, यहां तक कि मैच के आयोजन के लिए भी नहीं।
Author नई दिल्ली | October 22, 2016 01:09 am

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बीसीसीआइ और राज्य क्रिकेट संघों के बीच सारे वित्तीय लेन-देन पर रोक लगा दी। साथ ही शीर्ष क्रिकेट संस्था को निर्देश दिया कि जब तक वह न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा पैनल की सुधार की सिफारिशों को लागू नहीं करती, वह राज्य संघों को कोई भी धनराशि वितरित नहीं सकती, यहां तक कि मैच के आयोजन के लिए भी नहीं। शीर्ष अदालत ने बीसीसीआइ अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को यह भी निर्देश दिया कि वे तीन दिसंबर तक शीर्ष अदालत और लोढ़ा पैनल के समक्ष हलफनामा पेश करें कि उन्हें इन सुधारों को लागू करने में कितना समय लगेगा।
प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव के पीठ ने लोढ़ा पैनल को बीसीसीआइ के सभी खातों की जांच के लिए स्वतंत्र आॅडिटर नियुक्त करने के लिए भी कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति डीवाइ चंद्रचूड़ ने सुनाया। उन्होंने लोढ़ा पैनल से बीसीसीआइ की ओर से दी गई बड़ी राशि के अनुबंधों की जांच आॅडिटर से कराने को कहा है। पीठ ने पैनल सचिव को शीर्ष अदालत के आदेश की एक प्रति आइसीसी अध्यक्ष शशांक मनोहर को भेजने के लिए भी कहा। लोढ़ा पैनल अपनी तरफ से एक आॅडिटर चुनेगा और उसे बीसीसीआइ के सभी खातों पर नजर रखने का काम दिया जाएगा। वह बीसीसीआइ के लिए पैसों की लेनदेन की सीमा भी तय कर सकता है।


सुप्रीम कोर्ट ने 17 अक्तूबर को बीसीसीआइ में व्यापक सुधारों की लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने के अपने आदेश को बरकरार रखा था। अदालत ने बीसीसीआइ अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और इसके महासचिव (क्रिकेट परिचालन) रत्नाकर शेट्टी को उन आरोपों के बारे में बताने को कहा था कि बीसीसीआइ ने आइसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेव रिचर्डसन को लिखी चिट्ठी में कहा था कि लोढ़ा पैनल के निर्देश सरकारी हस्तक्षेप की तरह हैं।
दोनों क्रिकेट प्रशासकों का बचाव कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि बीसीसीआइ को खलनायक की तरह पेश किया जा रहा है। यह ऐसा है जैसे बीसीसीआइ के कारण ही हर गलत चीज हो रही है। इस केस की अगली सुनवाई पांच दिसंबर को होगी। बताते चलें कि क्रिकेट में सुधार के लिए भारत के सेवानिवृत्त प्रधान न्यायाधीश आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई थी। उसने क्रिकेट में सुधार के लिए कुछ सिफारिशें की थी। इसमें से मंत्रियों, आइएएस अधिकारियों और 70 बरस से अधिक उम्र वालों के पदाधिकारी बनने पर रोक जैसी बात को मान लिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने सिफारिशें मानने के लिए बीसीसीआइ को छह अक्तूबर तक की समयसीमा दी थी। अदालत ने कहा था कि अगर सिफारिशें नहीं मानी गईं तो मजबूरन उसे आदेश पारित करना होगा। बीसीसीआइ ने 17 अक्तूबर तक का वक्त मांगा था। इससे पहले सात अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य ईकाइयों को बीसीसीआइ से मिलने वाले पैसे पर रोक लगा दी थी।

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