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कोलकाता मैराथन में सुधा व एलम ने मारी बाजी

सुधा सिंह ने मीट रिकार्ड में छह मिनट से भी ज्यादा का सुधार करते हुए रविवार को यहां टाटा स्टील कोलकाता 25के रोड रेस के महिला एलीट वर्ग का खिताब जीता जबकि पुरुष वर्ग में एलम सिंह ने बाजी मारी..
Author कोलकाता | December 21, 2015 00:20 am
एथलीट सुधा सिंह (फाइल फोटो)

सुधा सिंह ने मीट रिकार्ड में छह मिनट से भी ज्यादा का सुधार करते हुए रविवार को यहां टाटा स्टील कोलकाता 25के रोड रेस के महिला एलीट वर्ग का खिताब जीता जबकि पुरुष वर्ग में एलम सिंह ने बाजी मारी। एशियाई खेल 2010 की स्वर्ण पदक विजेता और 3000 मीटर स्टीपलचेज की पूर्व राष्ट्रीय रेकार्ड धारक सुधा ने एक घंटे 27 मिनट और 31 सेकेंड के रिकार्ड समय के साथ खिताब जीता।

इस साल प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लेने वाली कविता ने पिछले साल एक घंटे 33 मिनट और 39 सेकेंड के समय के साथ रेस जीती थी। सुधा को इस जीत के लिए तीन लाख रुपए की इनामी राशि मिली। सुधा की रेलवे की साथी और उन्हीं की तरह रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर चुकी ललिता बाबर (एक घंटा 27 मिनट और 47 सेकेंड) और ओपी जैशा (एक घंटे 28 मिनट और पांच सेकेंड) कोलकाता की गड्ढों से भरी सड़क पर हुई रेस में क्रम से दूसरे और तीसरे स्थान पर रहीं।

पुरुष एलीट वर्ग में एलम सिंह ने एक घंटे 20 मिनट और 14 सेकेंड के समय के साथ खिताब जीता। श्रीनु बुगाथा (एक घंटा 20 मिनट और 16 सेकेंड) और ओ सनातन सिंह (एक घंटा 20 मिनट और 23 सेकेंड) ने क्रम से दूसरा और तीसरा स्थान हासिल किया। सुधा ने रेस के बाद कहा कि यह मेरे लिए शानदार जीत है और इससे मुंबई मैराथन (17 जनवरी) से पहले मेरा मनोबल काफी बढ़ा है। हालांकि पहले तीनों स्थानों पर कब्जा जमाने वाली सुधा सिंह, ललिता बाबर और ओपी जैशा की भारत की लंबी दूरी की अनुभवी तिकड़ी ने कोलकाता की अव्यवस्था पर नाराजगी जताई।

गड्ढों से भरी सड़क और बीच में ट्राम पटरी की आलोचना की। खिताब जीतने वाली सुधा ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या थी कि रास्ता बताने के लिए आगे कोई वाहन नहीं था और कुछ स्थानों पर हमारे रास्ते में ट्रैफिक और यहां तक कि कुत्ते भी आए। पिछले साल भी ऐसी ही समस्या थी। सुधा, ललिता और जैशा की तिकड़ी ने कहा कि दिल्ली और मुंबई की सड़कें कहीं अच्छी हैं जिससे उन्हें अपने समय को बेहतर करने में मदद मिलती है।

पिछले महीने दिल्ली हाफ मैराथन में राष्ट्रीय रिकार्ड बनाने वाली ललिता ने कहा, ‘सड़कें काफी खराब हैं और रेल लाइन (ट्राम पटरी) भी सड़कों पर है, इसलिए हमें सतर्क रहना पड़ा। कोई पायलट वाहन नहीं था जिससे हमें सही रास्ते पर जाने में परेशानी हुई और एक बार तो रास्ते में कुत्ते आ गए और हमें ट्रैफिक पर भी ध्यान देना पड़ा। राष्ट्रीय रिकार्ड धारक जैशा ने उम्मीद जताई कि भविष्य में चीजों में सुधार होगा। जैशा ने कहा कि मुंबई और दिल्ली में सड़कें काफी अच्छी हैं और हमने कभी इस तरह की समस्या का सामना नहीं किया। उम्मीद करते हैं कि भविष्य में चीजें बेहतर होंगी।

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