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Rio Olympics में मिली कामयाबी भारतीय बैडमिंटन के सुरक्षित हाथों में होने का परिचायक

दो बार विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुकी सिंधु ने जो उपलब्धि हासिल की उससे गोपीचंद और साइना जैसे देश के महान बैडमिंटन खिलाड़ी महरूम रहे हैं।
Author नई दिल्ली | August 21, 2016 00:32 am
भारतीय बैडमिंटन टीम के मुख्य कोच पुलेला गोपीचंद। (फाइल फोटो)

रियो ओलंपिक में पी वी सिंधु के महिला एकल बैडमिंटन का रजत पदक जीतने के साथ ना केवल भारतीय खेलों की दुनिया में एक बड़े सितारे का उदय हुआ बल्कि इससे बैडमिंटन में भारत की उभरती ताकत का भी पता चलता है और यह जीत जितनी सिंधु की है उतनी ही उनके कोच पुलेला गोपीचंद की भी है। अगर 2008 के बीजिंग और 2012 के लंदन ओलंपिक में साइना बैडमिंटन में भारत की उम्मीद थीं तो इस बार रियो ओलंपिक में सिंधु ने मैच दर मैच जीतकर दिखाया कि वह भी एक अरब लोगों की उम्मीदों का बोझ ढो सकती हैं। साइना ग्रुप मैच में यूक्रेन की मारिया उलीटीना से सीधे गेम में हारकर बाहर हो गईं।

दो बार विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुकी सिंधु ने जो उपलब्धि हासिल की उससे गोपीचंद और साइना जैसे देश के महान बैडमिंटन खिलाड़ी महरूम रहे हैं। बैडमिंटन में देश के पहले बड़े सितारे प्रकाश पादुकोण का करियर खेल के ओलंपिक में शामिल होने से पहले ही खत्म हो गया था। शुक्रवार (19 अगस्त) को कड़े मुकाबले में सिंधु विश्व नंबर एक स्पेन की कैरोलिना मारिन से भले ही हार गयीं लेकिन उन्होंने मैच के आखिरी क्षण तक अपनी जद्दोजहद जारी रखी।

पुरुषों के एकल में के श्रीकांत ने भी शानदार खेल दिखाया और सेमीफाइनल के करीब पहुंचकर हार गए। दो बार के गत ओलंपिक चैंपियन चीन के लिन डैन ने एक कड़े मुकाबले में उन्हें क्वार्टरफाइनल मैच में हराया लेकिन श्रीकांत ने पूरे मैच में डैन को कड़ी टक्कर दी। श्रीकांत ने जिस तरह का प्रदर्शन किया उससे हर भारतीय बैडमिंटन प्रशंसक ने उनका लोहा माना और दिल तोड़ने वाली हार के बावजूद आंध्र प्रदेश के गुंटूर के खिलाड़ी ने अपने हजारों नए प्रशंसक बना लिए।

भारत की तरफ से पुरुष युगल में मनु अत्री एवं बी सुमित रेड्डी जबकि महिला युगल में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ने हिस्सा लिया था। जहां 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों की विजेता महिला जोड़ी ने निराशाजनक प्रदर्शन किया वहीं मनु और सुमित ने अपने आखिरी गु्रप मैच में हिरूयुकी इंडो एवं केनिची हयाकावा की जापान की विश्व नंबर आठ जोड़ी को हराकर अपने शानदार खेल का परिचय दिया।

श्रीकांत और सिंधु ने इस बार अपने पहले ही ओलंपिक में देश का झंडा बुलंद किया और उनकी सफलता से मुख्य कोच गोपीचंद के समर्पण का पता चलता है जिन्होंने देश को बैडमिंटन में अब तक दो ओलंपिक पदक दिलाए हैं। गोपीचंद ने जादूगर की तरफ खेल में भारत की दिशा बदल दी और पादुकोण, सैयद मोदी नंदू नाटेकर एवं दिनेश खन्ना और अपने बाद देश को बैडमिंटन में कई सितारे दिए। उनके मार्गदर्शन में साइना, पी कश्यप, श्रीकांत और सिंधु ने एक के बाद कई अंतरराष्ट्रीय खिताब अपने नाम किए। 2012 और अब 2016 के ओलंपिक में एक कांस्य और एक रजत के साथ भारतीय बैडमिंटन हर दिन नई ऊंचाइयां छू रहा है। अब हम उम्मीद कर सकते हैं कि गोपीचंद के नेतृत्व में 2020 के तोक्यो ओलंपिक में भारतीय बैडमिंटन इससे भी बड़ी ऊंचाइयां छुएगा।

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Babu Banarasi Das Indoor Stadium, Lucknow
<!-- Match 36 -->
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Inter Zone Challenge Week - Match 36
Aug 19, 201721:00 IST
Babu Banarasi Das Indoor Stadium, Lucknow
<!-- Match 37 -->
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