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दूसरे दिन भी टला नरसिंह यादव पर सुनवाई, शनिवार या सोमवार को नाडा करेगी रियो जाने पर फैसला

नरसिंह यादव का डोप टैस्ट पॉजीटिव पाया गया था और उन्हें प्रतिबंधित एनाबालिक स्टेरायड मेथांडिएनोन का सेवन करने का दोषी पाया गया है।
Author नई दिल्ली | July 29, 2016 17:23 pm
भारतीय पहलवान नरसिंह यादव। (फाइल फोटो)

पहलवान नरसिंह यादव के ओलंपिक में भाग लेने को बना संशय गुरुवार (28 जुलाई) को भी समाप्त नहीं हो पाया क्योंकि राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने आज गुरुवार, 28 जुलाई) यहां दो दिन की सुनवाई के बाद इस खिलाड़ी से जुड़े डोपिंग मामले में अपना फैसला शनिवार (30 जुलाई) या सोमवार (1 अगस्त) तक टाल दिया है। नरसिंह और उनके वकीलों ने बुधवार (27 जुलाई) को इस पहलवान के डोपिंग में नाकाम रहने पर अपना पक्ष रखा था। उनके अनुसार नरसिंह के खिलाफ षडयंत्र रचा गया। इसके बाद नाडा की कानूनी टीम ने अनुशासन समिति के सामने गुरुवार (28 जुलाई) को अपना पक्ष रखा। नाडा के वकील गुरंग कांत ने गुरुवार (28 जुलाई) को सुनवाई समाप्त होने के बाद पत्रकारों से कहा, ‘सुनवाई आज (गुरुवार, 28 जुलाई) समाप्त हो गई। फैसला शनिवार या सोमवार को आ जाएगा।’

उन्होंने कहा, ‘नाडा का तर्क था कि वह छूट का हकदार नहीं है जैसा कि वह कह रहा है। नरसिंह ने गड़बड़ी किए जाने के संबंध में प्रासंगिक परिस्थितिजन्य सबूत पेश नहीं किए जैसा कि पहले उन्होंने दावा किया था।’ वकील ने कहा, ‘उन्होंने हलफनामा पेश किया है कि उसके पानी या अन्य पेय पदार्थ में कुछ मिलाया गया था लेकिन उन्होंने इसे साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किए जिससे नाडा या वाडा संतुष्ट हो सके।’ इस पहलवान ने अपने साथी पहलवानों पर साजिश करने का आरोप लगाया है। उनकी जगह ओलंपिक टीम में प्रवीण राणा को शामिल कर दिया गया है लेकिन यदि नाडा का फैसला उनके अनुकूल रहा तो उन्हें फिर से टीम में शामिल किया जा सकता है।

नाडा के वकील ने हालांकि गुरुवार (28 जुलाई) को कहा कि नरसिंह का साजिश का दावा साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। कांत ने कहा, ‘हमारी दलील थी कि सजा से बचने के लिए जो उचित सावधानी बरतने की जरूरत है उसे वाडा संहिता के अनुरूप पूरा नहीं किया गया। इसलिए हमने कहा कि उसे वह सजा दी जानी चाहिए जो यह पैनल उचित मानता है।’ उन्होंने कहा, ‘हमने इसका भी विरोध किया कि वह लापरवाह नहीं था और एक खिलाड़ी के रूप में उचित देखभाल नहीं करके उसने कोई गलती नहीं की। हमने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी होने के कारण उसे अपने खाने और पेय पदार्थों के प्रति सतर्क होना चाहिए। लेकिन उसने पैनल के सामने उचित देखभाल करने के संबंध में कुछ भी पेश नहीं किया।’

कांत ने कहा, ‘वाडा संहिता के तहत यदि वह उचित सावधानी बरतने की बात को साबित नहीं कर पाता है तो उसे छूट नहीं मिलनी चाहिए और उसे सजा मिलनी चाहिए। जिरह खत्म हो गयी है और देखते हैं कि पैनल क्या फैसला करता है।’ इससे पहले बुधवार (27 जुलाई) को नरसिंह और उनके कई वकीलों ने अपना पक्ष रखा था। नरसिंह के वकील विदुषपत सिंहानिया ने कहा, ‘हमने नरसिंह का पक्ष रख दिया है। हमें नाडा पैनल पर पूरा विश्वास है। हम उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि उसे निर्दोष साबित कर दिया जाएगा। नाडा पैनल का रवैया मददगार रहा। हमने आज (गुरुवार, 28 जुलाई) अपना पक्ष रखा और पैनल ने धैर्य से हमारी बात सुनी। सुनवाई बहुत अच्छी रही। नाडा शुक्रवार (29 जुलाई) को अपना पक्ष रखेगा।’

लगातार दूसरे दिन नाडा मुख्यालय में अफरातफरी का माहौल बना रहा। नरसिंह के समर्थक उसके पक्ष में नारे लगाकर न्याय की मांग कर रहे थे। इस पहलवान ने आरोप लगाया है कि उनके विरोधियों ने उन्हें डोपिंग में फंसाया है जिन्होंने उन्हें रियो जाने से रोकने के लिए उनके भोजन और पूरक आहार में कुछ प्रतिबंधित पदार्थ मिलाया। रिपोर्टों के अनुसार उनका पूरक आहार हालांकि साफ पाया गया। नरसिंह ने सोनीपत थाने में एफआईआर दर्ज कराई जिसमें दो साथी पहलवानों के नाम हैं जिनमें से एक 17 बरस का है। उसने मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग दोहराई है।

इस बीच पुलिस दल ने गुरुवार (28 जुलाई) को सोनीपत में भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) केंद्र का दौरा किया। अपराध जांच विभाग के अधिकारी और इस मामले की जांच कर रहे इंदरवीर ने कहा, ‘पुलिस के एक दल ने नरसिंह यादव की शिकायत पर दर्ज की गयी प्राथमिकी को देखते हुए गवाहों, कोचों और वार्डन्स से पूछताछ की।’ पुलिस अधिकारी ने कहा कि नरसिंह के साथी पहलवान जितेश से बाद में पूछताछ की जाएगी। नरसिंह ने अपनी शिकायत में जितेश का नाम दर्ज कराया है। भारतीय कुश्ती महासंघ ने नरसिंह का समर्थन जारी रखा है। दूसरी ओर खेलमंत्री विजय गोयल ने दोहराया है कि सरकार नरसिंह के रियो जाने पर फैसला अंतरराष्ट्रीय नियमों के आधार पर लेगी।

उधर भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने गुरुवार (28 जुलाई) को कहा कि अगर नरसिंह को डोपिंग प्रकरण में नाडा द्वारा हरी झंडी मिल जाती है तो रियो ओलंपिक में प्रवीण राणा की जगह उसके खेलने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। आईओए के महासचिव राजीव मेहता ने कहा, ‘आईओए डाकखाने की तरह है। हम सुविधा मुहैया कराने वाले हैं। हमने डब्ल्यूएफआई की इच्छा पर नरसिंह की जगह प्रवीण राणा को नामांकित किया, जिसे यूनाईटेड विश्व कुश्ती ने भी स्वीकार कर लिया है।’ उन्होंने कहा, ‘अगर डब्ल्यूएफआई नरसिंह को दोबारा भेजना चाहता है, बशर्ते इस पहलवान को नाडा पैनल से पसंदीदा फैसला मिल जाता है और अंतरराष्ट्रीय महासंघ इस पर सहमत होता है तो हम पर आपत्ति क्यों करेंगे। हमें इसमें कोई परेशानी नहीं है और ऐसे में हम नरसिंह को ओलंपिक में जाने की अनुमति दे देंगे।’

नरसिंह यादव की ओलंपिक खेलने की उम्मीदों पर तब लगभग तुषारापात हो गया जब पांच जुलाई को हुए दूसरे डोप टेस्ट में भी वह नाकाम रहे। समझा जाता है कि 25 जून के डोप टेस्ट में नाकाम रहने पर अस्थायी निलंबन झेल रहे नरसिंह के पांच जुलाई को हुए टेस्ट के भी ए और बी नमूने पॉजीटिव पाए गए। भारतीय कुश्ती महासंघ के सूत्र ने प्रतिबंधित एनाबालिक स्टेरायड मेथांडिएनोन का हवाला देते हुए बताया,‘यह वही पदार्थ है जो पहले टेस्ट में पाया गया था। इसका शरीर से बाहर जाना संभव नहीं था।’ इससे पहले डब्ल्यूएफआई ने नरसिंह की जगह राणा का नाम देकर दोहरे ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार के जाने की अटकलों पर विराम लगा दिया। नरसिंह को सुशील पर तरजीह देकर चुना गया था क्योंकि विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने ही रियो का कोटा हासिल किया था। राणा ने 2014 में अमेरिका में डेव शूल्ट्ज मेमोरियल कुश्ती टूर्नामेंट में 74 किलो वर्ग में स्वर्ण जीता था।

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