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दिल्ली सरकार की समिति की सिफारिशों पर सवाल

दिल्ली व जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) में भ्रष्टाचार और दूसरी अनियमितताओं के लिए गठित समिति को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं..
Author नई दिल्ली | November 21, 2015 00:50 am
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (पीटीआई फाइल फोटो)

दिल्ली व जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) में भ्रष्टाचार और दूसरी अनियमितताओं के लिए गठित समिति को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पूर्व भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी और दिल्ली रणजी ट्राफी टीम के कप्तान गौतम गंभीर से मुलाकात के बाद समिति का गठन किया था लेकिन सवाल यह है कि क्या उसे ऐसा करने का अधिकार था। जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) केंद्र सरकार के अधीन नहीं है तो क्रिकेट की राज्य इकाइयां राज्य सरकारों के तहत कैसे आएंगी और सवाल इसी को लेकर उठ रहे हैं कि समिति का गठन और उसकी सिफारिशें, क्रिकेट में प्रशासनिक सुधार के लिए कम और सियासी मकसद के तहत ज्यादा किया गया था।

समिति ने डीडीसीए में पेशेवर क्रिकेट खिलाड़ियों को शामिल करने का सुझाव दिया था। यह हास्यस्पद इसलिए भी लगता है कि पूर्व भारतीय ओपनर चेतन चौहान डीडीसीए के अध्यक्ष हैं और राज्य स्तर के कई दूसरे खिलाड़ी भी डीडीसीए से जुड़े हैं। क्रिकेट ही नहीं, देश की दूसरी खेल संस्थाओं में भी पेशेवर खिलाड़ी बतौर पदाधिकारी जुड़ें, इसमें किसी को एतराज नहीं हो सकता है। लेकिन देश में जो खेल का ढांचा है वहां फिलहाल तो ऐसा होता दिख नहीं रहा है। क्रिकेट में तो और भी मुमकिन नहीं है। क्योंकि देश के इस सबसे अमीर खेल संघ में सियासत और रसूख का बोलबाला है। बीसीसीआइ तो ऐसा समंदर है, जहां तमाम दलों के नेता आकर मिल जाते हैं और एक-दूसरे को बचाने के लिए हर तरह की कोशिश करते हैं। नेताओं का भाईचारा बीसीसीआइ में ही देखने को मिलता है।

बीसीसीआइ को केंद्र सरकार के अधीन लाने की कवायद कई बार हुई लेकिन तमाम सियासी दलों ने एकजुट होकर इसका विरोध किया और नतीजा सामने है। ऐसे में दिल्ली सरकार की समिति की सिफारिशों का कोई मतलब नहीं रह जाता है। समिति ने डीडीसीए को सूचना के अधिकार के तहत लाने की बात भी कही है। अब समिति को कौन बताए कि बीसीसीआइ और उससे संबद्ध इकाइयों को सरकार छू भी नहीं सकती। सरकार छूने की कोशिश भी करेगी तो बीसीसीआइ के उच्च पदों पर काबिज सभी दलों के बड़े नेता उसके बचाव में सामने आ जाएंगे। आइपीएल में सट्टेबाजी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जरूर अपनी तरफ से कुछ कोशिश की और कुछ दिशा-निर्देश दिए लेकिन उसे अब तक अमल में नहीं लाया गया है।

यह सही है कि डीडीसीए में लंबे समय से भ्रष्टाचार व अनियमितता का मामला उठाया जा रहा है। वहां गुटबाजी भी चरम पर है और गाहे-बगाहे एक-दूसरे के खिलाफ पदाधिकारी आस्तीनें भी चढ़ाते हैं। लेकिन किसी तरह काम चल रहा है। अदालतों का दखल डीडीसीए के कामकाज में बढ़ा है। बिशन सिंह बेदी ने दो साल पहले डीडीसीए में अध्यक्षपद का चुनाव लड़ा था लेकिन वे हार गए। यह भी सही है कि वे कीर्ति आजाद, सुरेंद्र खन्ना सहित दूसरे लोगों के साथ मिल कर डीडीसीए के पदाधिकारियों के खिलाफ लगातार सक्रिय हैं। लेकिन प्रशासनिक सुधार के लिए डीडीसीए में घुसना जरूरी है और यह काम चुनाव के जरिए ही हो सकता है।

पिछली बार वे चुनाव हार गए। भविष्य में वे चुनाव लड़ेंगे या नहीं कहा नहीं जा सकता। लेकिन इस बार उन्होंने हर मुमकिन कोशिश की कि दिल्ली में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चौथा टैस्ट नहीं हो पाए। उनकी दलीलों से कई लोग सहमत हैं लेकिन उनके रवैये से आहत भी। लोगों का मानना है कि मैच तो होना चाहिए। बेदी सरीखे क्रिकेटरों को इस मामले में सकारात्मक रुख अपना कर डीडीसीए को ठोस सुझाव देने चाहिए थ, लेकिन उन्होंने इसकी जगह मैच न हो इसके प्रयास ज्यादा किए।

दिल्ली सरकार ने भी समिति का गठन कर सियासी फायदा उठाने की कोशिश की। डीडीसीए पर परोक्ष रूप से केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली गुट हावी है। चेतन चौहान खुद भारतीय जनता पार्टी से ताअल्लुक रखते हैं। इसलिए बिना देर किए मामले की जांच के लिए समिति का गठन कर दिया गया। समिति ने चार दिनों में जो सिफारिशें दीं, वह मजाक से ज्यादा कुछ नहीं है। बीसीसीआइ को सुझाव देने का समिति को अधिकार किसने दिया यह तो दिल्ली सरकार से ही पूछा जा सकता है। फिर जब दिल्ली में टैस्ट की मेजबानी का मामला है तो, सरकार को सियासी जुगलबंदियों की बजाय सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए था। दिल्ली से अगर एक बार मैच दूसरी जगह चला जाता तो फिर भविष्य में कितनी और किस तरह की परेशानियों खड़ी होतीं यह न तो अरविंद केजरीवाल समझ पाए और न ही उनकी समिति। डीडीसीए में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार है, इसकी चर्चा आम है। व्त्तिीय अनियमितताओं की वजह से ही बीसीसीआइ ने लंबे समय से उसका भुगतान नहीं किया है। खिलाड़ियों, अंपायरों व स्टाफ का पैसा भी बाकी है लेकिन इन सबके बावजूद दिल्ली से टैस्ट मैच छिन जाए, ऐसा कोई नहीं चाहता थ, कुछ को छोड़ कर।

लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने अब सब कुछ साफ कर दिया है। सरकार की कोर्ट में भी किरकिरी हुई। अदालत ने साफ किया कि वह इस मामले में किसी तरह का रोक नहीं लगाए और सभी एजंसियां डीडीसीए को एनओसी दे। जाहिर है कि अदालत के इस रुख के बाद अब सरकार के पास किसी तरह का हीला-हवाला नहीं है। दिल्ली में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टीम इंडिया तीन दिसंबर से चौथा और आखिरी टैस्ट खेलने जारही है। अच्छी खबर यह है। विराट कोहली, मुरली विजय, अजिंक्य रहाणे की चमकदार बल्लेबाजी और रविचंद्रन अश्विन, ईशांत शर्मा और अमित मिश्रा की बेहतरीन गेंदबाजी का दर्शक लुत्फ उठाएंगे। तो चलिए पैड बांध लें। हमारे रण बांकुरे ऐक्शन में दिखाई देंगे।

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