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टेबल टेनिस में तनाव, शीर्ष खिलाड़ी घोष के फैसले पर भड़के कोच

सौम्यजीत घोष इस समय भारत के शीर्ष रैंकिंग के खिलाड़ी हैं जो विश्व रैंकिंग में 68वें स्थान पर हैं।
Author नई दिल्ली | July 28, 2016 19:52 pm
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीक के तौर पर किया गया है।

रियो जाने वाले भारतीय टेबल टेनिस दल में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। देश के शीर्ष खिलाड़ी सौम्यजीत घोष ने घरेलू टूर्नामेंट में वॉकओवर देने का फैसला किया क्योंकि वह एक निश्चित प्रकार की गेंद से खेलना नहीं चाहते थे जिससे मुख्य राष्ट्रीय कोच भवानी मुखर्जी और टीटीएफआई के शीर्ष अधिकारी गुस्से में हैं। घोष इस समय भारत के शीर्ष रैंकिंग के खिलाड़ी हैं जो विश्व रैंकिंग में 68वें स्थान पर हैं। यह घटना गुरुवार (28 जुलाई) को जयपुर में चल रही अंतर संस्थानिक टेटे चैम्पियनशिप की है जिसमें घोष ने अपने नियोक्ता पैट्रोलियम खेल संवर्धन बोर्ड (पीएसपीबी) के लिए टीम स्पर्धा खेलने के बाद व्यक्तिगत स्पर्धा में वॉकओवर देने का फैसला किय।

इसका कारण डीएचएस गेंद के बजाय जीकेआई गेंद (घरेलू टूर्नामेंट में इस्तेमाल की जाने वाली) का इस्तेमाल किया जाना था। रियो में डीएचएस गेंद इस्तेमाल की जाएगी। हालांकि तीसरा ओलंपिक खेलने जा रहे सीनियर पेशेवर और अनुभवी खिलाड़ी शरत कमल को गेंद से कोई समस्या नहीं थी। इससे टीटीएफआई के आला अधिकारी और राष्ट्रीय कोच मुखर्जी काफी गुस्से में थे क्योंकि इसका मतलब है कि शनिवार (30 जुलाई) को तड़के टीम के रियो रवाना होने से पहले वह अहम अभ्यास मैच से महरूम हो जाएगा।

मुखर्जी ने कहा, ‘मैं घोष के रवैये से बिलकुल भी खुश नहीं हूं। जब शरत जैसे बड़े खिलाड़ी को खेलने में कोई दिक्कत नहीं हो रही तो उसे भी खेलना चाहिए था जबकि रियो बिलकुल करीब है। वैसे भी गेंद का मुद्दा कोई बड़ा नहीं है क्योंकि पूरी दुनिया में अलग अलग तरह की गेंद का इस्तेमाल किया जाता है और बतौर पेशेवर खिलाड़ी आपको उछाल के साथ सांमजस्य बिठाने की जरूरत होती है।’ मुखर्जी ने कहा, ‘सरकार ने रियो की तैयारियों के लिए इतना पैसा खर्च किया है और आदर्श यही होता कि घोष देश के अन्य शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ खेल लेता। यह उसके लिए अच्छा मैच अभ्यास हो जाता।’

वहीं घोष ने अपने बचाव में कहा कि अलग गेंद से खेलने का जोखिम लेना सही नहीं होता। घोष अपना दूसरा ओलंपिक खेलेंगे। उन्होंने कहा, ‘मैं टीम स्पर्धा में भी जीकेआई गेंद से खेला था लेकिन बाद में मैंने सोचा कि इससे मेरी लय पर असर पड़ सकता है। मैं ओलंपिक से पहले कोई जोखिम नहीं लेना चाहता था। मैं पिछले तीन महीनों से डीएचएस गेंद से अभ्यास कर रहा हूं। इसमें और कोई बात नहीं है।’ वहीं शरत ने कहा कि अलग गेंद से खेलना का जोखिम हमेशा रहता है लेकिन आप इसमें कुछ नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, ‘एक गेंद से दूसरी गेंद से सांमजस्य बिठाने में हमेशा जोखिम होता है। मैं यह जोखिम लेने के लिए तैयार था क्योंकि मेरे ऊपर एक जिम्मेदारी है और मैं यहां सिर्फ एकल में ही खेल रहा था। यह मायने नहीं रखता कि मैं यहां जीत दर्ज करूं या हार जाऊं। लेकिन मैं खेलों में निश्चित रूप से अच्छा प्रदर्शन करना चाहता हूं।’

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