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एशियाई चैंपियन्स ट्राफी जीतने की इरादे से मैदान में उतरेगी भारतीय हॉकी टीम

विश्व कप क्वालीफिकेशन प्रणाली में शामिल करने के फैसले के बाद एशियाई चैंपियन्स ट्राफी में नयी जान फूंक दी है।
Author कुआंटन | October 19, 2016 20:34 pm
भारतीय हॉकी टीम।

एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक विजेता भारत कल से यहां महाद्वीप के चोटी के छह देशों के बीच खेले जाने वाले एशियाई चैंपियन्स ट्राफी : एसीटी : पुरूष हाकी टूर्नामेंट में फिर से खिताब जीतने के प्रबल दावेदार के रूप में शुरूआत करेगा।  भारत ने पांच साल पहले ओर्डोस में पहली एशियाई चैंपियन्स ट्राफी जीती थी। भारत ने इसके बाद इस प्रतियोगिता में अपनी सर्वश्रेष्ठ टीम उतारने में दिलचस्पी नहीं दिखायी। महाद्वीप की चोटी के हाकी देशों की भी इसमें गहरी रूचि नहीं रही।  इस वार्षिक टूर्नामेंट का बीच में 2014 और 2015 में आयोजन नहीं किया गया लेकिन अंतरराष्ट्रीय हाकी महासंघ : एफआईएच : का इसे भविष्य के ओलंपिक और विश्व कप क्वालीफिकेशन प्रणाली में शामिल करने के फैसले के बाद एशियाई चैंपियन्स ट्राफी में नयी जान फूंक दी है। एफआईएच के फैसले के कारण ही मलेशियाई शहर कुआंटन में 20 से 30 अक्तूबर के बीच एशिया के चोटी के खिलाड़ी खेलते हुए दिखायी देंगे।

भारत ने कई खिलाड़ियों के चोटिल होने के बावजूद अपनी सर्वश्रेष्ठ संभावित टीम उतारी है। उसे खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा है जिससे टीम पर दबाव बन सकता है।  दो बार का मौजूदा चैंपियन पाकिस्तान और पूर्व एशियाई चैंपियन दक्षिण कोरिया भी अपने से अधिक रैंकिंग के प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन करने के लिये बेताब है।  भारतीय टीम के कोच रोलैंट ओल्टमैन्स को यहां अच्छे परिणाम की उम्मीद है। उन्होंने कहा, ‘‘ओलंपिक में क्वार्टर फाइनल से बाहर होना निराशाजनक था लेकिन इससे खिलाड़ियों में यह विश्वास भरा कि वे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों की बराबरी कर सकते हैं। अब भारतीय हाकी के प्रशंसकों की निगाह कुछ अच्छे परिणामों पर होगी। ’’

विश्व में छठे नंबर की भारतीय टीम इस टूर्नामेंट में भाग ले रही अन्य टीमों से काफी आगे हैं। ऐसे में भारतीय खिलाड़ी जानते हैं कि खिताब से कम कुछ भी सकारात्मक परिणाम नहीं माना जाएगा। एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के कारण भारतीय टीम रियो ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाली एकमात्र एशियाई टीम थी और पी आर श्रीजेश की अगुवाई वाली टीम की उपलब्धि प्रारंभिक चरण में अर्जेंटीना पर जीत रही जिसने बाद में स्वर्ण पदक हासिल किया।

कप्तान श्रीजेश के दिमाग में 2011 के एशियाई चैंपियन्स ट्राफी के फाइनल की याद अब भी ताजा हैं। तब उन्होंने पेनल्टी स्ट्रोक पर गोल होने से बचाया था। उन्होंने अब अपने साथी खिलाड़ियों को संदेश दिया है कि वे अपनी ‘स्ट्राइक पावर’ को दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ें।
रियो ओलंपिक क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम के हाथों 1-3 की हार के बाद भारत अब अगले ओलंपिक चक्र की जीत से शुरूआत करने के लिये प्रतिबद्ध हैं। इस दौरान भारत फिर से विश्व कप 2018 की मेजबानी भी करेगा।  भारत यह भी साबित करना चाहता है कि चोट के बाहर होने वाले उनके प्लेमेकर मनप्रीत सिंह और राइट विंगर एस वी सुनील की अनुपस्थिति में भी उनकी स्ट्राइक पावर कमजोर नहीं हुई है। इसके अलावा सदाबहार डिफेंडर वी आर रघुनाथ भी टीम में नहीं हैं।

मनप्रीत की अनुपस्थिति में पूर्व कप्तान सरदार सिंह फिर से सेंटर हाफ पोजीशन में वापसी करेंगे जबकि चोट से उबरने के बाद वापसी करने वाले अनुभवी बीरेंद्र लाकड़ा रघुनाथ की जगह पर खेलेंगे। आकाशदीप सिंह और रमनदीप सिंह को पहले विश्राम दिया गया था लेकिन सुनील के चोट से नहीं उबर पाने के कारण उन्हें टीम में शामिल किया गया। युवा स्ट्राइकर ललित उपाध्याय और अफान यूसुफ पर पर भी निगाह टिकी रहेगी।  भारत अपने अभियान की शुरूआत कल जापान के खिलाफ करेगा जबकि मौजूदा चैंपियन पाकिस्तान का सामना मलेशिया से होगा। दो अन्य टीमें दक्षिण कोरिया और चीन शुक्रवार को अपना मैच खेलेंगे।

राउंड रोबिन आधार पर होने वाले इस टूर्नामेंट का आकर्षण भारत और पाकिस्तान के बीच रविवार को होने वाला मैच होगा। भारत इस मैच में कोई कसर नहीं छोड़ेगा तो पाकिस्तान इंचियोन एशियाई खेलों की हार का बदला चुकता करने की कोशिश करेगा।  पाकिस्तान 2014 एशियाई खेलों के फाइनल की हार के कारण ओलंपिक खेलों से बाहर हो गया। इससे पहले पाकिस्तान 2014 में हेग में हुए विश्व कप के लिये भी क्वालीफाई नहीं कर पाया था।

एशियाई चैंपियन्स ट्राफी के शुरूआती वर्ष में भारत ने पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता था। इसके बाद पाकिस्तान दो बार विजेता बना। पाकिस्तान ने 2012 के फाइनल में भारत को 5-4 से हराया था और फिर 2013 में जापान को 3-1 से पराजित करके खिताब का बचाव किया था। भारत ने 2013 में अपनी अंडर . 21 टीम भेजी थी और वह फाइनल में भी जगह नहीं बना पाया था। भारत ने अब तक तीन टूर्नामेंटों में एक स्वर्ण और एक रजत जीता है जबकि 2013 में वह पांचवें स्थान पर रहा था। मेजबान मलेशिया ने अब तक तीनों टूर्नामेंटों में कांस्य पदक जीता।

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