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वीज़ा के इंतजार में फुटपाथ पर पड़े रहे खिलाड़ी

भारतीय टीम की नुमाइंदगी करने वाले खिलाड़ियों को गुरुवार सारी रात दिल्ली के फुटपाथ पर गुजारनी पड़ी। ये खिलाड़ी ताइवान के ताओयुआन में शुरू होने वाली चैंपियनशिप..

गाजियाबाद में पैरालंपिक खेलों की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में खिलाड़ियों के साथ जिस तरह का सलूक किया गया था, उसकी यादें अभी भी दिलो-दिमाग में ताजा हैं। अब ताजा मामला राजधानी का है। इस बार सरकारी रवैए की वजह से शर्मनाक उपेक्षा का शिकार मूक-बधिर खिलाड़ियों को होना पड़ा है। मामला उछलने पर सरकार ने जांच का आदेश दिया है।

इससे पहले गाजियाबाद वाले प्रकरण में आयोजकों ने खिलाड़ियों के साथ जिस तरह का सलूक किया था, उसकी गूंज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुनी गई थी और यहां तक कि भारतीय पैरालंपिक संघ को भंग करने का फैसला अंतरराष्ट्रीय महासंघ ने किया था। लेकिन लगता है कि इस घटना से भी किसी ने सबक नहीं सीखा। भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और खेल मंत्रालय में ऊंचे पदों पर काबिज हाकिमों-इंतजामकारों ने जरूर तब कुछ पहल की थी। एक जांच समिति का गठन भी किया गया था। मगर इस जांच के क्या नतीजे निकले, किसी को पता नहीं।

यह अकेला मामला नहीं है। केरल के साई केंद्र में चार महिला एथलीटों ने जान देने की कोशिश की थी। उनमें से एक की तब मौत हो गई थी। इस घटना के बाद भी साई ने फौरन जांच बैठा डाली थी। हो-हल्ला तब भी मचा था। सरकार ने सख्त कदम उठाने की बात कही थी। लेकिन उस मामले में किन वजहों से खिलाड़ियों ने खुदकुशी की कोशिश की, इसकी रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हो पाई है।

बहरहाल, ताजा मामले में सरकारी रवैए की वजह से इस बार उपेक्षा का शिकार मूक-बधिर खिलाड़ियों को होना पड़ा है। भारतीय टीम की नुमाइंदगी करने वाले इन खिलाड़ियों को गुरुवार सारी रात दिल्ली के फुटपाथ पर गुजारनी पड़ी। हैरत इस बात पर है कि सारी रात खिलाड़ी सड़क पर बैठे रहे और इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। हैरत इस बात पर ज्यादा है कि ये खिलाड़ी भारतीय टीम के सदस्य हैं, जिन्हें ताइवान के ताओयुआन में शुरू होने वाली चैंपियनशिप में हिस्सा लेना है।

भारतीय टीम को एशिया-प्रशांत मूक बधिर खेलों (एपीडीजी) में हिस्सा लेने के लिए ताइवान जाना था। मुकाबले शनिवार से शुरू होने हैं। लेकिन वीजा के इंतजार में इन खिलाड़ियों को रातभर फुटपाथ पर गुजारनी पड़ी। भारत का चालीस सदस्यीय दल इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहा है। टीम को गुरुवारको वीजा नहीं मिला था। इसके इंतजार में कुछ खिलाड़ियों ने एक गुरद्वारे के बाहर रात गुजारी तो ज्यादातर ने फुटपाथ पर।

टीम के साथ जो अधिकारी, मैनजर या टीम प्रबंधक थे, वे इन खिलाड़ियों के लिए रात में ठहरने का इंतजाम करने में नाकाम रहे। हालांकि अब इस सिलसिले में कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। माना जा रहा है कि टीम के साथ जो अधिकारी थे, उनके लचर रवैए की वजह से ही खिलाड़ियों को इस परेशानी से जूझना पड़ा। टीम के सदस्यों के लिए रहने की व्यवस्था नहीं करने के कारण भारतीय खेल प्राधिकरण भी सवालों के घेरे में है।

ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि इन खिलाड़ियों से चैंपियनशिप में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कैसे की जा सकती है। मूक-बधिर खिलाड़ियों के लिए खेल मंत्रालय के पास बजट होता है और उन्हें हर तरह की सुविधा मुहैया करने की जिम्मेदारी अखिल भारतीय खेल परिषद की होती है। लेकिन परषिद ने अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से नहीं निभाई। शुक्रवार को इन खिलाड़ियों को ताइवान का वीजा जरूर मिल गया, लेकिन प्रतियोगिता से 24 घंटे पहले खिलाड़ियों पर जो गुजरी, उसकी टीस वे शायद ही बिसरा पाएं।

बहरहाल, मामले की जानकारी मिलते ही खेल मंत्रालय हरकत में आया और खेल मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने फौरन ही इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं। सोनोवाल ने बातचीत में कहा कि जो भी हुआ वह नहीं होना चाहिए था। यह बेहद गंभीर मामला है और शर्मिंदा करने वाला भी। हमने इसकी जांच के आदेश दिए हैं और जो भी कसूरवार होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि जांच कब तक पूरी होगी। यह जरूर कहा कि हमने जांच जल्द पूरी करने को कहा है।

साई महानिदेशक इंजेती श्रीनिवास ने भी इस घटना पर अफसोस जताते हुए ‘जनसत्ता’ से कहा कि किसी ने भी हमसे रहने का इंतजाम करने के लिए नहीं कहा था। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में साई को घसीटना ठीक नहीं है। तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। सच तो यह है कि किसी ने भी हमसे संपर्क नहीं किया। सही है कि खिलाड़ियों को परेशानी उठानी पड़ी, लेकिन इसकी वजह हम नहीं हैं। पूरे मामले के लिए जिम्मेदार उनका महासंघ, अखिल भारतीय मूक-बधिर खेल परिषद है, जहां हर स्तर पर बदइंतजामी है।

उन्होंने कहा कि संस्था ने अपने पिछले दौरे का अब तक हिसाब नहीं दिया है, फिर भी इस दौरे के लिए उन्हें पचास लाख रुपए की रकम मंजूर की। श्रीनिवास के मुताबिक, जहां तक वीजा का सवाल है तो मेरे हिसाब से खिलाड़ियों का वीजा इसलिए नामंजूर कर दिया गया था कि उन्होंने ताइवान दूतावास को आमंत्रण-पत्र उपलब्ध नहीं करवाया था।

श्रीनिवास ने कहा कि मामले की जानकारी मिलने के बाद हमने मंत्रालय स्तर पर प्रयास किया। बाद में विदेश मंत्रालय ने भी इस मामले में दखल दिया। विदेश मंत्रालय ने हमें जानकारी दी थी कि वीजा गुरुवार तक मिल जाएगा लेकिन सर्वर की समस्या के कारण ऐसा नहीं हो पाया। इसलिए शनिवार को हर हाल में उन्हें वीजा मिलना जरूरी था, क्योंकि फिर सोमवार तक इंतजार करना पड़ता। जाहिर है चूक हमारे स्तर पर नहीं हुई, बल्कि महासंघ के स्तर पर हुई है जो अपने खिलाड़ियों की परवाह नहीं करता।

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