June 24, 2017

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मेरी न्यूरोलॉजी की समस्या नहीं थी रियो ओलम्पिक में हार की वजह : अभिनव बिंद्रा

भारत के इकलौते ओलंपिक व्यक्तिगत स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने आज खुलासा किया कि वह 2014 में न्यूरोलाजी से जुड़ी गंभीर समस्या का शिकार हो गए थे जिससे उनके हाथों में कंपन पैदा हो गई ।

Author मुंबई | March 17, 2017 23:28 pm
प्रतीकात्मक चित्र

भारत के इकलौते ओलंपिक व्यक्तिगत स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने आज खुलासा किया कि वह 2014 में न्यूरोलाजी से जुड़ी गंभीर समस्या का शिकार हो गए थे जिससे उनके हाथों में कंपन पैदा हो गई । बिंद्रा ने कहा ,‘‘ 2014 में चेकअप के बाद पता चला कि मुझे न्यूरोलाजी से जुड़ी गंभीर समस्या है जिससे मेरे हाथ में कंपन शुरू हो गई । मेरा हाथ कंपकंपाता रहता था और मैं ऐसे खेल से जुड़ा था जिसमें हाथ स्थिर रहना जरूरी है । उस समय मेरी स्थिति काफी विकट थी ।’’

इंडिया टुडे कांक्लेव में एक सत्र में बिंद्रा ने यह बात कही । सत्र का संचालन कर रहे बोरिया मजूमदार ने कहा कि उस स्थिति को ‘मिर्गी’ कहते हैं और उसका शिकार होने के बावजूद बिंद्रा ने 2014 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता और रियो ओलंपिक में पदक के करीब पहुंचे । बिंद्रा ने हालांकि इस बात से इनकार किया कि इसकी वजह से वह रियो ओलंपिक में चौथे स्थान पर रहे । उन्होंने कहा कि तीसरे स्थान पर आने के लायक वह प्रदर्शन नहीं कर सके थे ।

उन्होंने कहा ,‘‘ हाथ में कंपन के कारण मैं चौथे स्थान पर नहीं रहा बल्कि इसकी वजह यह थी कि मैं तीसरे स्थान पर आने लायक प्रदर्शन नहीं कर सका था ।’’ बिंद्रा ने यह भी कहा कि देश को 2020 ओलंपिक को भूलकर 2024 के लिये मेहनत करनी चाहिये । बिंद्रा ने कहा ,‘‘ 2020 ओलंपिक के लिये बहुत कम समय बचा है । इतने कम समय में ज्यादा बदलाव नहीं किये जा सकते । पूरी तरह से बदलाव की कोशिश करना भूल होगी । किसी भी बदलाव में समय लगता है ।’’

उन्होंने कहा ,‘‘ हमें 2020 ओलंपिक भूल जाना चाहिये और 2024 के लिये मेहनत करनी चाहिये । इसके लिये व्यवस्था की जरूरत होती है जिसके लिये दीर्घकालिन निवेश और धैर्य की आवश्यकता है । हमें सही व्यवस्था बनानी होगी जिसके लिये समय चाहिये ।’’ उन्होंने यह भी कहा कि रियो ओलंपिक में हार का उन्हें दुख नहीं है क्योंकि उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया ।
उन्होंने कहा ,‘‘ वक्त हर जख्म भर देता है । आप सच को स्वीकार करके आगे बढें, यही बेहतर है । एक प्रतिस्पर्धा हो गई और अब आप नतीजे नहीं बदल सकते लिहाजा इसे स्वीकार करके आगे बढे । मैने अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया लिहाजा मैं संतुष्ट हूं ।’’

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First Published on March 17, 2017 11:27 pm

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