June 27, 2017

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हैप्पी बर्थडे वीवीएस लक्ष्मण: जब 281 रनों की पारी खेल तोड़ा था लगातार 17वीं टेस्ट जीत का ऑस्ट्रेलिया का सपना

लक्ष्मण ने 281 रनों की पारी खेलते हुए भारतीय टेस्ट क्रिकेट इतिहास में सुनील गावस्कर के सर्वाधिक टेस्ट स्कोर (236 नाबाद) का रिकॉर्ड तोड़ दिया था।

नई दिल्ली में 30 अक्टूबर 2008 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे टेस्ट मैच के दूसरे दिन अपनी डबल सेंचुरी पूरी की। (एक्सप्रेस आर्काइव)

पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी वीवीएस लक्ष्मण मंगलवार (एक नवंबर) को 42 साल के हो गए। 1974 में हैदराबाद में जन्मे लक्ष्मण को सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सुनील गावस्कर और गुंडप्पा विश्वनाथ जैसे सर्वकालिक महान भारतीय टेस्ट क्रिकेटरों में गिना जाता है। उनकी साल 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई 281 रनों की पारी को टेस्ट क्रिकेट इतिहास की महानतम पारियों में माना जाता है। एक क्रिकेट पत्रिका ने अपने सर्वे में उस पारी को पिछले पचास सालों की सर्वश्रेष्ठ टेस्ट पारी माना था। टेस्ट और वनडे क्रिकेट में ऑस्ट्रेलियाई का दबदबा जगजाहिर है। लक्ष्मण की खास बात ये रही है कि उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ही किया है।

लक्ष्मण ने अपने क्रिकेट करियर में 134 मैचों की 225 पारियों में 45.97 के औसत से 8781 रन बनाए। सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और सुनील गावस्कर के बाद वो चौथे सबसे अधिक टेस्ट रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाज हैं। लक्ष्मण ने अपना टेस्ट डेब्यू 1996 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ किया था। टेस्ट क्रिकेट में उनके शुरुआती साल अच्छे नहीं रहे। वो पहले दो सालों में कोई बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे थे। 1998 में उन्होंने कोलकाता में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 95 रनों की पारी खेली लेकिन वो शतक बनाने से रह गए। 1998 में ही उन्हें भारतीय वनडे टीम में भी जगह मिली लेकिन वो प्रभावशाली प्रदर्शन नहीं कर सके।

देखें वीवीएस लक्ष्मण की वो ऐतिहासिक टेस्ट पारी-

घरेलू मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बनाए गए 95 रनों की बदौलत लक्ष्मण को जनवरी 2000 में ऑस्ट्रेलियाई दौर के लिए चुन लिया गया। इस दौरे में भारतीय टीम बुरी को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। लेकिन सीरीज के तीसरे और आखिरी टेस्ट में लक्ष्मण ने ग्लैन मैग्राथ और शेन वार्न की गेंदों का सामना करते हुए 167 रनों की पारी खेली। इस पारी ने लक्ष्मण का क्लास तो साबित कर दिया था लेकिन अभी तक वो बहुत भरोसेमंद टेस्ट बल्लेबाज के तौर पर नहीं देखे जाते थे। लेकिन बहुत जल्द उनका नाम क्रिकेट के इतिहास में दर्ज होने वाला था।

साल 2001 में बॉर्डर-गावस्कर ट्राफी के लिए भारत आई ऑस्ट्रेलिया टीम ने टेस्ट सीरीज के पहले मैच में भारत को 10 विकेट से हरा दिया। पहले मैच में सचिन तेंदुलकर (76) को छोड़कर कोई भी बल्लेबाज ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के सामने नहीं टिक सका। पहले टेस्ट में लक्ष्मण ने 20 और 12 रन बनाए थे। इस मैच में जीत हासिल करने के साथ ही ऑस्ट्रेलिया ने टेस्ट मैचों में लगातार 16 मैच जीतकर अपने ही पिछला रिकॉर्ड की बराबरी कर ली थी। अगला टेस्ट जीतकर ऑस्ट्रेलिया लगातार 17 टेस्ट जीत का नया रिकॉर्ड बनाने की राह देख रहा था। लेकिन अगले मैच इतिहास में ऑस्ट्रेलिया के नहीं बल्कि लक्ष्मण के नाम होने वाला था।

कोलकाता के ईडन गार्डेन बॉर्डर-गावस्कर ट्राफी (2001)  में हुए दूसरे टेस्ट मैच से पहले लक्ष्मण का टेस्ट औसत 29 रन के करीब था। दूसरे टेस्ट की पहली पारी ऑस्ट्रेलिया ने पहले खेलते हुए 445 रन बनाए जिसका पीछा करने उतरी भारतीय टीम महज 171 पर ढेर हो गई। पहली पारी में लक्ष्मण ने 59 रन बनाए। ऑस्ट्रेलिया से मिले फॉलो ऑन के बाद खेलने उतरी भारतीय टीम के ऊपर मैच के साथ ही सीरीज बचाने का भी दबाव था। पहले मैच और दूसरे मैच की पहली पारी के नतीजों के बाद क्रिकेट प्रेमियों को डर था कि इस मैच में भारत की कहानी खत्म हो जाएगी। लेकिन वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ ने जबरदस्त बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया के हाथों से जीत छीन ली। लक्ष्मण ने 281 रनों की पारी खेलते हुए भारतीय टेस्ट क्रिकेट इतिहास में सुनील गावस्कर के सर्वाधिक टेस्ट स्कोर (236 नाबाद) का रिकॉर्ड तोड़ दिया। वहीं द्रविड़ ने 180 रनों की पारी खेली। दूसरी पारी में भारत ने 657 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। जीत के लिए 384 रनों का पीछा कर रही ऑस्ट्रेलियाई टीम 212 रनों पर आउट हो गई और ऑस्ट्रेलिया का 17 मैच लगातार जीतकर नया रिकॉर्ड बनाने का सपना चकनाचूर हो गया। भारत की तरफ से  सर्वाधिक टेस्ट स्कोर का लक्ष्मण का रिकॉर्ड 2004 में वीरेंद्र सहवाग ने तिहरा शतक मारकर तोड़ दिया।

ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाफ लक्ष्मण इसके बाद भी नहीं थमे। साल 2003-04 में एडिलेड में उन्होंने 148 रनों की पारी खेलते हुए भारतीय टीम को जीत दिलाई। उसके बाद साल 2008 में दिल्ली में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दोहरा शतक मारकर वो सचिन तेंदुलकर के बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2000 से अधिक टेस्ट रन बनाने वाले दूसरे भारतीय बल्लेबाज बने। उसके बाद 2010 में भी लक्ष्मण मोहाली में पीठ दर्द के बावजूद 73 रनों की नाबाद पारी खेलकर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय जीत के सूत्रधार बने। 2010 के बाद वो कोई बड़ी टेस्ट पारी नहीं खेल पाए और अगस्त 2012 में उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से अलविदा कह दिया।

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First Published on November 1, 2016 1:42 pm

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