December 11, 2016

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1932 में भारत ने खेला था अपना पहला टेस्ट, मोहम्मद नासिर ने पहली पारी में चटकाए थे इंग्लैंड के पांच विकेट, जानिए दिलचस्प तथ्य

1933 में क्रिकेट की मशहूर पत्रिका विज़डन ने भारतीय कप्तान सीके नायडू साल के पांच बेहतरीन क्रिकेटरों में शुमार किया था।

1932 में भारत का पहला टेस्ट मैच खेलने वाली टीम के सदस्य- (पीछे) लाल सिंह, फिरोज पालिया, जहांगीर खान, मोहम्मद निसार, अमर सिंह, बहादुर कपाड़िया, एस गोदाम्बे, गुलाम मोहम्मद, जनार्दन नावले। (बैठे हुए) सैयद वजीर अली, सीके नायडू (कप्तान), केएस लिंबडी (उप-कप्तान), नजीर अली, जोगिंदर सिंह। (पहली पंक्ति) नाऊमल जाऊमल, सोराबजी कोलाह, नारीमन मार्शल।

आईसीसी द्वारा टेस्ट क्रिकेट टीम की मान्यता मिलने के बाद भारत ने पहली बार जून, 1932 में अपना पहला टेस्ट मैच इंग्लैंड से खेला था। भारतीय टीम “आल इंडिया” टीम के नाम से इंग्लैंड के दौरे पर गई और लॉर्ड्स के मैदान पर पहला तीन दिवसीय टेस्ट खेला। भारतीय टीम अपना पहला टेस्ट मैच इंग्लैंड से 158 रनों से हार गई थी।  भारतीय टीम इससे पहले 1911 में इंग्लैंड के दौरे पर जा चुका थी लेकिन तब बीसीसीआई का गठन नहीं हुआ था। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की निगरानी करने वाली संस्था इंपीरियल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) भारत की विभिन्न क्रिकेट संघों को एक संगठन के तहत आने के लिए कहा था जिसकी वजह से बीसीसीआई का गठन हुआ। आईसीसी का नाम 1965 में इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल कर दिया गया।

भारत के पहले टेस्ट मैच में भारतीय टीम के कप्तान थे पोरबंदर के महाराज सीके नायडू। इंग्लैंड की टीम के कप्तान थे डीआर जार्डाइन। इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। इंग्लैंड ने पहली पारी में 259 रन बनाए। भारतीय टीम इंग्लैंड की गेंदबाजी के सामने दमदार प्रदर्शन नहीं कर सकी और 189 रन पर आल आउट हो गई। इंग्लैंड ने दूसरी पारी में आठ विकेट खोकर 275 रन बनाए और भारत को जीत के लिए 346 रनों का लक्ष्य दिया। लेकिन भारती बल्लेबाजों ने एक बार फिर निराश किया और पूरी टीम 187 रनों पर ढेर हो गई।

इंग्लैंड के लिए डीआर जार्डाइन ने पहली पारी में 79 रन, एलईजी एमीस ने 65, डब्ल्यूआर हैमंड ने 35 रन बनाए। भारत की तरफ से मोहम्मद नासिर ने पहली पारी में पांच विकेट लिए, अमर सिंह ने दो और सीके नायडू ने दो-दो विकेट लिए। भारत की पहली पारी में सीके नायडू ने 40 रन, नाऊमल जाऊमल ने 33 रन, ए वजीर अली ने 31 रन बनाए। इंग्लैंड की तरफ से डब्ल्यूई बोवेस ने चार विकेट, डब्ल्यू वोसे ने तीन विकेट और आरडब्ल्यूवी ने दो विकेट लिए। इंग्लैंड की दूसरी पारी में कप्तान जार्डाइन ने 85 रन, ई पाइंटर ने 54 रन और आरडब्ल्यूवी रॉबिंस ने 30 रन बनाए। दूसरी पारी में भारतीय गेंदबाजी ने मोहम्मद निसार ने एक विकेट, अमर सिंह ने दो विकेट, मोहम्मद जहांगीर खान ने चार विकेट लिया। नाऊमल जाऊमल ने एक विकेट लिया। दूसरी पारी में सबसे अधिक 51 रन अमर सिंह ने बनाया। एस वजीर अली ने 39 रन, लाल सिंह ने 29 रन और नाऊमल जाऊमल ने 25 रन बनाए। कप्तान सीके नायडू केवल 10 रन बनाए। भारत की दूसरी पारी में इंग्लैंड के सभी गेंदबाजों ने अच्छा प्रदर्शन किया। डब्ल्यूआर हैमंड ने तीन, डब्ल्यूई वोवेस ने दो, डब्ल्यू ने दो, एफआर ब्राउन ने दो और आरडब्ल्यू रॉबिंस एक विकेट लिया था।

परिणाम के लिहाज से भारत का पहला मैच भले ही निराशाजनक रहा हो लेकिन भारतीय टीम की कुव्वत को केवल नतीजे से आंकना ठीक नहीं होगा। कप्तान सीके नायडू उस समय दुनिया के बेहतरीन आल राउंडर में गिने जाते थे तो भारत के स्ट्राइक गेंदबाज मोहम्मद नासिर और अमर सिंह को गेंदबाजी की सर्वश्रेष्ठ जोड़ियों में गिना जाता था। अमर सिंह मध्यम गति के तेज गेंदबाज थे तो नासिर तेज गति। कहा जाता है कि उस समय नासिर दुनिया के सबसे तेज रफ्तार गेंदबाजों में गिने जाते थे। नासिर भारत के पहले ही टेस्ट मैच की पहली ही पारी में पांच विकेट लेकर एक पारी में पांच विकेट लेने वाले भारत के पहले गेंदबाज बने।

भारतीय ने 1932 में अपने इंग्लैंड दौरे में कुल 36 मैच खेले जिसमें 26 प्रथम श्रेणी के मैच थे। भारतीय टीम ने कुल नौ प्रथम श्रेणी के मैच जीते, नौ ड्रा रहे और आठ में भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा। सीके नायडू ने पूरे दौरे में 40.45 के औसत से 1618 रन बनाए। 1933 में क्रिकेट की मशहूर पत्रिका विज़डन ने उन्हें साल के पांच बेहतरीन क्रिकेटरों में शुमार किया। इस दौर में अमर सिंह ने 20.37 के औसत से 111 विकेट लिए। वहीं मोहम्मद नासिर ने 18.09 के औसत से 71 विकेट लिए।

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First Published on November 9, 2016 6:59 am

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