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पढ़िए मोहम्मद अली की पूरी कहानी : वह हमेशा कहते थे, ‘मैं महानतम हूं।’

उनके मुकाबले इतने लोकप्रिय होते थे कि उन्हें ‘जंगल में गड़गड़ाहट’ और ‘मनीला में रोमांच’ जैसे नाम दिए जाते थे। अली हमेशा कहते थे, ‘मैं महानतम हूं।’ और उनसे शायद कुछ ही लोग असहमत रहे होंगे।
Author फीनिक्स | June 5, 2016 02:22 am
अली का जन्म 17 जनवरी 1942 को कैसियास मार्सेलस क्ले के रूप में हुआ था लेकिन बाद में उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था।

उनके मुक्के दमदार होते थे और अपनी तेजी से प्रतिद्वंद्वी को हतप्रभ करने में माहिर थे। इस हैवीवेट चैंपियन ने अपने मुक्कों से दुनिया को रोमांचित करने का वादा किया और फिर वे इसमें सफल भी रहे। यहां तक कि जब वे मुक्कों की मार झेलने का खमियाजा भुगत रहे थे और बमुश्किल बात कर पाते थे, तब भी वे लोगों को प्रभावित करते थे। वह महानतम थे। वे मुक्केबाजी के पर्याय थे। वे कोई और नहीं बल्कि मोहम्मद अली थे जिनका 74 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें फीनिक्स में सांस की तकलीफ के कारण इस हफ्ते के शुरू में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस दौरान अली के बच्चे उनके साथ में थे।

अपने करारे मुक्कों के कारण अली ने दो दशक तक मुक्केबाजी में अपनी बादशाहत बनाए रखी लेकिन इस बीच उन्होंने अपने सिर पर भी हजारों मुक्के सहे जिसके कारण बाद में उन्हें पार्किंसन बीमारी ने जकड़ दिया। यह 1981 की बात है जब इस बीमारी से उनका मजबूत शरीर कमजोर सा हो गया था। उनकी जादुई आवाज लगभग बंद हो गई थी। उन्होंने कई ऐतिहासिक मुकाबलों में हैवीवेट चैंपियनशिप जीती और बाद में उनका बचाव किया। उन्होंने अश्वेत लोगों के पक्ष में अपनी आवाज उठाई और इस्लाम में विश्वास करने के कारण वियतनाम युद्ध के दौरान सेना में भर्ती होने से इनकार कर दिया था।

बीमारी के बावजूद वे दुनिया भर का दौरा करते रहे लेकिन आंखों की भाषा और मुस्कान से लोगों तक अपनी बात पहुंचाते रहे। मोहम्मद अली का जन्म 17 जनवरी 1942 को हुआ था। उन्होंने 12 साल की उम्र में मुक्केबाजी शुरू कर दी थी क्योंकि किसी ने उनकी नई साइकिल चोरी कर दी थी और उन्होंने पुलिसकर्मी जो मार्टिन के सामने कसम खाई थी जिसने भी उनकी साइकिल चुराई है, वे उसे अपने घूंसे से करारा मजा चखाएंगे। तब अली का वजन केवल 89 पाउंड था लेकिन मार्टिन ने उन्हें अभ्यास कराना शुरू कर दिया। इससे उनके छह साल के अमेच्योर करिअर की शुरुआत हुई जिसका अंत 1960 में लाइट हैवीवेट ओलंपिक स्वर्ण पदक के साथ हुआ। उन्होंने इसके बाद नस्लभेद के खिलाफ भी आवाज उठानी शुरू कर दी थी।

अपनी आत्मकथा ‘द ग्रेटेस्ट’ में अली ने लिखा कि जब मोटरसाइकिल पर सवार श्वेत लोगों के समूह ने उनके साथ झगड़ा किया तो उन्होंने यह पदक ओहियो नदी में फेंक दिया था। यह कहानी मनगढ़ंत हो सकती है और अली ने बाद में दोस्तों से कहा कि उनका पदक असल में खो गया था। जब वे अपने चरम पर थे, तब उनका कद छह फुट तीन इंच और वजन 210 पाउंड था। उन्होंने इस तरह से अपनी हैवीवेट मुकाबले लड़े जैसे पहले कभी कोई नहीं लड़ा था। उन्होंने खतरनाक सोनी लिस्टन को दो बार धूल चटाई। मजबूत जार्ज फोरमैन को जायरे में हराया और फिलीपींस में जो फ्रेजियर से लड़ते हुए मौत के मुंह से वापस लौटे। उन्होंने हर किसी से मुकाबला किया और लाखों डालर बनाए। उनके मुकाबले इतने लोकप्रिय होते थे कि उन्हें ‘जंगल में गड़गड़ाहट’ और ‘मनीला में रोमांच’ जैसे नाम दिए जाते थे।

अली हमेशा कहते थे, ‘मैं महानतम हूं।’ और उनसे शायद कुछ ही लोग असहमत रहे होंगे। उनका जन्म कैसियस मार्सेलस क्ले के रूप में हुआ था लेकिन 1964 में लिस्टन को हराकर हैवीवेट खिताब जीतने के बाद उन्होंने यह घोषणा करके मुक्केबाजी जगत को हैरानी में डाल दिया कि वह अश्वेत मुस्लिमों (इस्लामी देशों) के सदस्य हैं और उन्होंने बाद में अपना नाम बदल दिया। दुनिया इसके बाद उन्हें मोहम्मद अली के नाम से ही जानती रही।

अली ने एक बार गणना की थी कि उन्होंने अपने पेशेवर करिअर में 29,000 मुक्के सहे और पांच करोड़ 70 लाख डालर की कमाई की। उन पर मुक्कों का असर लंबे समय तक रहा और उनकी अधिकतर कमाई इसमें चली गई। इसके बावजूद वे इस्लाम के प्रचार में जुटे रहे और दुनिया भर के नेताओं से मिलते रहे। हाल के वर्षों में भी उन्होंने कुछ दौरे किए जिनमें 2012 में लंदन ओलंपिक का दौरा भी शामिल है।

अपनी बेबाक टिप्पणियों और 1960 के दशक में अमेरिकी सेना में भर्ती होने से इनकार करने के बावजूद अली का जादुई प्रभाव लोगों पर बना रहा और उन्होंने जिस किसी भी खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, लोगों ने खड़े होकर उनका अभिवादन किया।

अली का जन्म 17 जनवरी 1942 को कैसियास मार्सेलस क्ले के रूप में हुआ था लेकिन बाद में उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था। उनके नौ बच्चे हैं जिनमें बेटी लैला भी है जो अपने पिता की तरह विश्व चैंपियन मुक्केबाज है। अली की चार पत्नियां और नौ बच्चे थे। उनकी पहली पत्नी सोंजी रोई थी जिनके साथ उनका साथ केवल दो साल रहा। उन्होंने अपना धर्म बदलने के बाद 17 वर्षीय बेलिंडा बायड से शादी की थी। बेलिंडा से उनके चार बच्चे थे। उनकी तीसरी पत्नी वरोनिका पोर्श थीं जिनसे उनके दो बच्चे थे। अपनी चौथी पत्नी लोनी विलियम्स के साथ मिलकर उन्होंने एक पुत्र को गोद लिया था। इसके अलावा उनके परिवार में चौथी पत्नी लोनी है।

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