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लोढ़ा समिति की सिफारिशें लागू होने तक बीसीसीआई राज्य संघों को कोष जारी न करे: सुप्रीम कोर्ट

लोढ़ा समिति ने देश में क्रिकेट संगठनों के बड़े पैमाने पर ढांचागत बदलाव के लिए कई निर्देश दिए हैं।
Author नई दिल्ली | October 7, 2016 22:07 pm
बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर (पीटीआई फाइल फोटो)

न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा समिति के निर्देशों को लागू नहीं करने पर ‘बागी बीसीसीआई’ पर निशाना साधते हुए उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार (7 अक्टूबर) को इस मालामाल क्रिकेट संगठन को राज्य संघों को तब तक कोष वितरित नहीं करने का निर्देश दिया जब तक कि वे हलफनामे दायर करके ‘पूरी तरह से’ समिति की सुधार संबंधी सिफारिशों का पालन करने का वादा नहीं करते। बीसीसीआई को इस मुद्दे को गंभीरता से लेने के लिए कहने वाली शीर्ष अदालत ने इसके अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को इस आरोप के बारे में ‘व्यक्तिगत हलफनामा’ दायर करके स्पष्टीकरण देने को कहा कि उन्होंने एक पत्र में आईसीसी से यह कहने को कहा है कि शीर्ष अदालत के आदेश वाले सुधार लागू करना सरकारी हस्तक्षेप माना जाएगा और इससे बीसीसीआई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अयोग्य हो जाएगा। लंबे समय से क्रिकेट प्रशासक और फिलहाल बीसीसीआई के महाप्रबंधक (क्रिकेट संचालन) रत्नाकर शेट्टी को भी शीर्ष अदालत ने उन दस्तावेजों की हलफनामा प्रतियां और बीसीसीआई प्रस्ताव पेश करके स्थिति स्पष्ट करने को कहा जो उन्हें लोढ़ा समिति के सामने उनकी तरफ से हलफनामे दायर करने के लिए अधिकृत करते हैं।

लोढ़ा समिति ने देश में क्रिकेट संगठनों के बड़े पैमाने पर ढांचागत बदलाव के लिए कई निर्देश दिए हैं। शेट्टी से उस प्रस्ताव के साथ निजी हलफनामा दायर करने को कहा गया जो उन्हें लोढ़ा समिति की रिपोर्ट के अनुरूप की गई प्रतिक्रिया से संबंधित बयान देने के लिए उन्हें अधिकृत करता है। शीर्ष अदालत ने ठाकुर और शेट्टी दोनों को 10 दिन के भीतर अलग अलग हलफनामे सौंपने का निर्देश दिया। इस मामले में 17 अक्तूबर को आगे की सुनवाई होनी है। घरेलू क्रिकेट सत्र में किसी तरह की बाधा के बारे में सभी चिंताओं को दूर करने वाले एक लघु अंतरिम आदेश में प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने 12 राज्य संघों को निर्देश दिया कि सुधार उपायों पर सहमत नहीं होने तक वे बीसीसीआई द्वारा 30 सितंबर को विशेष आम सभा की बैठक के जरिये उन्हें दी गई रकम खर्च नहीं करें।

पीठ ने यह भी साफ किया कि सभी 13 राज्य क्रिकेट संघों को वितरित 16.72 करोड़ रुपए की राशि तब तक खर्च नहीं की जाए जब तक कि वे इस बारे में लोढ़ा समिति तथा शीर्ष अदालत के सामने हलफनामे और प्रस्ताव नहीं सौंपे कि वे सुधारों से जुड़े निर्देशों को पूरी तरह से लागू करेंगे। अदालत ने उन राज्य क्रिकेट संघों को चेताया जिन्हें कोष प्राप्त हुआ लेकिन जिन्होंने सुधार के निर्देशों का पालन करने के लिए लोढ़ा समिति और शीर्ष अदालत के सामने हलफनामे के तहत यह शपथ और यह प्रस्ताव अपनाने में नाकाम रहे हैं कि वे कोष खर्च नहीं करेंगे और इसे सावधि जमा में रखा जाए।

पीठ ने खचाखच भरे अदालत कक्ष में अंतरिम आदेश पारित किया। इस पीठ में न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ भी शामिल थे। पीठ ने कहा, ‘सुधारों को पूरी तरह से अपनाने पर सहमति का प्रस्ताव पारित करने वाले राज्य संघों को छोड़कर अन्य राज्य संघों को (बीसीसीआई के) नौ नवंबर 2015 के प्रस्ताव के संदर्भ में और राशि वितरित नहीं की जाएगी।’ आदेश सुनाए जाने के बाद बीसीसीआई के वकील राधा रंगास्वामी ने पीठ से कहा, ‘बीसीसीआई सुधारों से भाग नहीं रही है। कुछ तकनीकी अड़चनें हैं।’
इस पर पीठ ने कहा, ‘हम सभी तकनीकी अड़चनों को खत्म कर देंगे। आप निर्देश प्राप्त करें और हलफनामा दायर करें। हम 17 अक्तूबर को इस मामले को सुनेंगे।’ पीठ ने बीसीसीआई को हलफनामा देने को कहा। ठाकुर को निजी हलफनामा देने को इसलिए कहा गया क्योंकि लोढ़ा समिति ने शीर्ष अदालत से शिकायत की, ‘उन्होंने (बीसीसीआई अध्यक्ष) आईसीसी से एक पत्र जारी करके यह कहने को कहा है कि यह समिति सरकार के हस्तक्षेप के बराबर होगी।’

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