ताज़ा खबर
 

क्रिकेट संघों को करना होगा लोढ़ा समिति की सिफारिशों का पालन

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बीसीसीआइ में सुधार की सिफारिशें विशेषज्ञों की समिति ने पक्षों के साथ गहन विचार विमर्श के बाद की है और निष्कर्ष को ‘केवल सिफारिशें’ नहीं कहा जा सकता।
Author नई दिल्ली | May 3, 2016 01:06 am
उच्चतम न्यायालय (File Photo)

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (2 मई) को स्पष्ट किया कि सभी राज्य क्रिकेट संघों को मैच फिक्सिंग और स्पॉट फिक्सिंग आरोपों के चलते बीसीसीआइ में ढांचागत सुधारों पर बनी न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा समिति की सिफारिशों का ‘पालन’ करना होगा। प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाले पीठ ने कहा कि बीसीसीआइ में एक बार सुधार होता है तो यह सबमें होगा और अगर सभी क्रिकेट संघ इससे जुड़े रहना चाहते हैं तो उन्हें खुद में सुधार लाना होगा। मैच फिक्सिंग और स्पॉट फिक्सिंग आरोपों के चलते समिति का गठन गंभीर कवायद का हिस्सा थी, हलकी बात नहीं।

पीठ ने कहा कि बीसीसीआइ में सुधार की सिफारिशें विशेषज्ञों की समिति ने पक्षों के साथ गहन विचार विमर्श के बाद की है और निष्कर्ष को ‘केवल सिफारिशें’ नहीं कहा जा सकता। इस पीठ में न्यायमूर्ति एफएमआइ कलीफुल्ला भी शामिल थे। पीठ ने लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर आपत्ति जताने वाले हरियाणा क्रिकेट संघ से कहा कि अगर हम कहते हैं कि इन्हें लागू करना है तो यह केवल सिफारिशें नहीं रहेंगी। इन्हें सिफारिशें इसलिए कहा गया है क्योंकि समिति के कुछ निष्कर्ष विचार विमर्श के समय ही बीसीसीआइ ने लागू कर दिए थे और कुछ को लागू नहीं किया गया है।

पीठ ने कहा कि हम इस विषय की सुनवाई कर रहे हैं क्योंकि हम देख रहे हैं कि जो सिफारिशें लागू नहीं हुई हैं वे लागू की जा सकती हैं या नहीं। हरियाणा क्रिकेट संघ की ओर से पेश वकील ने कहा कि लोढ़ा समिति के निष्कर्ष केवल सिफारिशें हैं और इनमें से कुछ को क्रिकेट संघों द्वारा लागू कर पाना संभव नहीं है। पीठ ने कहा कि न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा समिति ने कहा है कि जो कुछ किया गया है वह केवल दिखावा है और जरूरत केवल दिखावे वाले सुधारों की नहीं है बल्कि इससे ज्यादा की है। शीर्ष अदालत ने पदाधिकारियों के लिए 70 साल की अधिकतम उम्र की सीमा पर आपत्ति जताने पर हरियाणा क्रिकेट संघ की खिंचाई की और पूछा कि क्या क्रिकेट संघों के कुछ पदाधिकारी सोचते हैं कि वे अपरिहार्य हैं।

पीठ ने कहा- क्या आप सोचते हैं कि क्रिकेट संघों के कुछ पदाधिकारी अपरिहार्य हैं। क्रिकेट प्रशासकों को तो छोड़िए, कोई भी अपरिहार्य नहीं है। एक समय होना चाहिए जब आप कहें कि अब बहुत हो गया और आप किसी और को पद सौंपने का रास्ता तैयार करें। इस पर वकील ने कहा कि लोढ़ा समिति की कुछ सिफारिशों पर आपत्तियों को समिति के निष्कर्ष की आलोचना के तौर पर नहीं लिया जाना चाहिए।

बताते चलें कि लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर शुरू में उत्साह दिखाने के बाद बीसीसीआइ कई कारणों से इस पर अमल से पीछे हट रहा है। उम्र से जुड़े मुद्दे तो हैं ही पर बीसीसीआइ खासतौर से राज्यों और एसोसिएट सदस्यों को मतदान का अधिकार देने के मुद्दे पर टामलमटोल कर रहा है। उसकी दलील है कि जिन राज्यों में क्रिकेट नहीं खेला जाता, उन्हें मतदान का अधिकार देने से बीसीसीआइ में बेवजह राजनीति बढ़ेगी।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.