December 10, 2016

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सचिन तेंदुलकर ने बच्चों के साथ स्ट्रीट क्रिकेट खेलकर मनाया चिल्ड्रेंस डे, सोशल मीडिया पर शेयर की तस्वीरें

ट्विटर पर सचिन ने लिखा,'इन छोटे बच्चों की मुस्कुराहट से आउट होना दुनिया की किसी भी फिलिंग्स से हमेशा बेहतर है। मेरे छोटे-छोटे दोस्तों को 'बाल दिवस' की हार्दिक शुभकामनाएं।'

सचिन तेंदुलकर ने मुंबई के एमआईजी क्रिकेट क्लब में बच्चों के साथ क्रिकेट खेलकर खास अंदाज में बाल दिवस का जश्न मनाया। (Photo: Twitter)

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने सेामवार को बच्चों के साथ स्ट्रीट क्रिकेट खेलकर खास अंदाज में चिल्डेंस डे मनाया। सचिन मुंबई के एमआईजी क्रिकेट क्लब पहुंचे जहां उन्होने ‘मेक अ विश’ फाउंडेशन के बच्चों के साथ क्रिकेट खेला। बच्चों के साथ गेंद-बल्ला थाम सचिन फिर से अपने बचपन में चले गए थे। क्रिकेट खेलते हुए अपनी तस्वीरों को सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर पोस्ट करते हुए सचिन ने लिखा,’इन छोटे बच्चों की मुस्कुराहट से आउट होना दुनिया की किसी भी फिलिंग्स से हमेशा बेहतर है। मेरे छोटे-छोटे दोस्तों को ‘बाल दिवस’ की हार्दिक शुभकामनाएं।’

सचिन के इस पोस्ट को उनके फैन्स भी बहुत पसंद कर रहे हैं। फेसबुक पर तीन घंटे के अंदर 122 हजार लोगों ने इस पोस्ट को लाइक किया। फैन्स ने इस पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया जताते हुए सचिन को एक बेहतर इंसान बताया है। सोमवार को पूरे देश ने दिवस यानि चिल्ड्रेंस डे मनाया। गौरतलब है कि देश के पहले प्रधानमंत्री रहे पंडित जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन 14 नवंबर को देश में बाल दिवस के रुप में मनाया जाता है। पंडित नेहरू के 1964 में देहांत के बाद देश ने उनके जन्मदिवस को बाल दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया। पंडित नेहरू के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वो बच्चों से बहुत प्यार करता थे और उनके साथ रहना पसंद करते थे।

बच्चों से खासा स्नेह रखने वाले मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर ने भी इस दिन को बेहद ही खास अंदाज में सेलिब्रेट किया। 43 वर्षीय सचिन तेंडुलकर दो बच्चों के पिता हैं। बड़ी बेटी सारा 19 साल की हैं वही छोटा बेटा अर्जुन 17 साल का है। सचिन तेंदुलकर को हमेशा बच्चों के करीब माना जाता है। अकसर बच्चों के प्रति सचिन का प्यार देखने को मिलता है। बच्चों के बीच भी मास्टर ब्लास्टर सचिन का क्रेज खूब है। चौदह नवंबर बाल दिवस के रूप में मनाने का औचित्य यह है कि पं. जवाहरलाल नेहरू बच्चों को देश का भविष्य मानते थे। उनकी यह अवधारणा सौ फीसदी सत्य है, क्योंकि आज जन्मा शिशु भविष्य में राजनीतिज्ञ, वैज्ञानिक, लेखक, शिक्षक, चिकित्सक, इंजीनियर या मजदूर कुछ भी बने आखिर राष्ट्र निर्माण का भवन इन्हीं की नींव पर खड़ा होता है।

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First Published on November 14, 2016 7:28 pm

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