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देश ने पहले भी देखा है कपिल और सुनील का विवाद, सुलझने में लग गए थे 25 साल

कपिल के बिना कोलकाता में तीसरा टेस्ट खेला गया जिसमें काफी बवाल हुआ। दर्शकों ने मैदान में नारे लगाने शुरू कर दिये कि 'नो कपिल नो टेस्ट'। सुनील गावस्कर पर कुछ दर्शकों ने सड़े टमाटर तक फेंके।
1984 में एक पारी ने दोनों दोस्तों के बीच दरार डाल दी थी।

इन दिनों कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर के बीच विवाद की चर्चा हर जगह हो रही है। दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ गया है कि सुनील ग्रोवर ने कपिल शर्मा के साथ काम करने से मना कर दिया है। दोनों सोनी टीवी पर प्रसारित द कपिल शर्मा शो में एक साथ काम करते आएं हैं लेकिन अब सुनील ग्रोवर ने इस शो से किनारा कर लिया है। पिछले दिनों फ्लाइट में हुई अनबन के चलते इन दोनों कलाकारों में दूरी बन गई है। लेकिन कपिल-सुनील के इस विवाद से पहले भी देश ने एक और कपिल और सुनील के बीच विवाद को झेला है। जी हां, कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर से पहले भारत के मशहूर क्रिकेटर कपिल देव और सुनील गावस्कर के बीच भी ऐसी फूट पड़ गई थी जिसके सुलझने में दशकों बीत गए।

देश के दो नामी स्टार क्रिकेटर, सुनील गावस्कर और कपिल देव, जिन्होंने इंडियन क्रिकेट को बुलंदियों तक पहुंचाते हुए 1983 में देश को विश्व कप दिलाया था। लेकिन इस ऐतिहासिक जीत के एक साल बाद ही दोनों की दोस्ती में दरार आ गई थी। दरअसल 1984 में इंगलैंड के साथ भारत की तीन टेस्ट मैचों की सीरीज चल रही थी। सुनील गावस्कर भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे थे। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए पहले मैच में भारत ने जीत हासिल कर ली। दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में दूसरा टेस्ट हुआ जिसमें कपिल देव और संदीप पाटिल पर आरोप लगे कि उन्होंने गैरजिम्मेदारान शॉट्स खेले जिससे भारत जीत से दूर रह गया। सीरीज का ये दूसरा मैच ड्रा हो गया। तब सुनील गावस्कर ने कपिल देव से कहा था कि तुम अगर ऐसे ही फालतू शॉट खेलोगे तो कभी आगे नहीं बढ़ पाओगे। कपिल की बल्लेबाजी को लेकर गावस्कर ने उनकी जमकर आलोचना की।

 

सीरीज का तीसरा टेस्ट कोलकाता के इडन गार्डन में खेला जाना था। दिल्ली में खिलाड़ियों का प्रदर्शन देखते हुए तीसरे टेस्ट के लिए टीम में कुछ तब्दीलियां होनी थी। टीम के चीफ सेलेक्टर ने सुनील गावस्कर को टीम तय करने के लिए मीटिंग में बुलाया। जब तीसरे टेस्ट के लिए टीम का ऐलान हुआ तो उसमें कपिल देव और संदीप पाटिल का नाम नहीं था। कपिल को लगा कि सुनील गावस्कर ने ही उनको टीम से बाहर करवाया है। गावस्कर को जब पता चला कि कपिल उनके बारे में इस तरह सोच रहे हैं तो उन्होंने क्लियर किया कि वो मीटिंग में टीम तय हो जाने के बाद पहुंचे थे। लेकिन उस दिन के बाद से दोनों की दोस्ती में ऐसी दरार आई जिसे पटने में क्रिकेट की पीढियां बीत गईं। कपिल के बिना कोलकाता में तीसरा टेस्ट खेला गया जिसमें काफी बवाल हुआ। दर्शकों ने मैदान में नारे लगाने शुरू कर दिये कि ‘नो कपिल नो टेस्ट’। सुनील गावस्कर पर कुछ दर्शकों ने सड़े टमाटर तक फेंके।

कोलकाता में अपने साथ हुई इस हरकत से गावस्कर इतने खफा हो गए कि उन्होंने दोबारा उस मैदान पर मैच ना खेलने की कसम खा ली। अपनी इसी कसम के चलते गावस्कर ने 1986-87 में पाकिस्तान सीरीज़ से अपना नाम वापस ले लिया था। अपनी इस कसम के साथ ही अपने दोस्त कपिल देव से नाराजगी को गावस्कर सालों तक नहीं भूल पाए। इतना ही नहीं गावस्कर ने कपिल की कप्तानी में ओपनिंग करने से भी मना कर दिया था।  फिलहाल लगभग 30 सालों बाद दोनों की नाराजगी थोड़ी खत्म सी होती दिखी जब एक ही मंच पर ये दोनों दिग्गज एक साथ हंसते हुए और बातें करते हुए दिखे।

मौजूदा समय में कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर के बीच खटास की खबरों ने फिर से कपिल देव और सुनील गावस्कर के बीच के तीखेपन की यादों को हवा दे दी है।

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