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डेथ ओवरों में बेहतरीन गेंदबाजी कर रहे हैं जसप्रीत : धोनी

धोनी ने बुमराह की तारीफ करते हुए कहा कि जसप्रीत नई गेंद से भी बेहतरीन गेंदबाजी करता है। डेथ ओवरों में उसने हमें काफी राहत दी है।
Author मीरपुर | March 3, 2016 00:09 am
भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी। (पीटीआई फाइल फोटो)

जसप्रीत बुमराह के डेथ ओवरों के सक्षम गेंदबाज के तौर पर उभरने से भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने राहत की सांस ली है जिन्होंने कहा है कि गुजरात का यह गेंदबाज नई गेंद से भी उतना ही प्रभावी है। धोनी ने बुमराह की तारीफ करते हुए कहा कि जसप्रीत नई गेंद से भी बेहतरीन गेंदबाजी करता है। डेथ ओवरों में उसने हमें काफी राहत दी है। लोगों को हालांकि यह समझना होगा कि वे रन भी देंगे। अभी तक उसने नई गेंद और डेथ ओवरों में हमारे लिए अच्छी गेंदबाजी की है। उन्होंने कहा कि डेथ गेंदबाजी में आप आखिरी दो ओवरों में सिर्फ 12 रन नहीं दे पाते। कई बार 20-22 रन भी पड़ते हैं। इस तरह के प्रारू प में यह चलता है। इससे पहले हार्दिक पंड्या को गेम चेंजर बताने वाले धोनी ने कहा कि उसकी मौजूदगी से टीम में जरू री संतुलन बना है।

उन्होंने कहा कि यह प्रारूप पंड्या को रास आता है क्योंकि वे हरफनमौला हैं। हरफनमौला गेंद और बल्ले दोनों के जौहर दिखा सकते हैं और एक में नाकाम रहने पर दूसरे में भरपाई कर सकते हैं। यही वजह है कि टीम अब अधिक संतुलित लग रही है। आपके पास तीन तेज गेंदबाज और दो स्पिनर हैं। इनके अलावा अनियमित गेंदबाज रैना और युवराज भी हैं। युवराज ने मंगलवार को 18 गेंद में 35 रन बनाए जिससे कप्तान काफी खुश हैं। धोनी ने कहा कि जहां तक युवी की बल्लेबाजी का सवाल है, मैंने पहले ही कहा है कि वे जितना ज्यादा समय क्रीज पर बिताएंगे उतना ही बेहतर होगा। उनका रवैया बहुत अच्छा रहा है। उन्होंने बड़े शाट खेलने से पहले कुछ गेंदों का इंतजार किया। उन्होंने दिखाया कि वही खिलाड़ी हैं जो अपनी मर्जी से छक्के भी लगा सकते हैं।अगर वे ऐसे ही खेलते रहे तो विश्व कप से पहले बेहतरीन स्थिति में होंगे।

विराट कोहली ने भी अर्धशतक जमाकर भारत को श्रीलंका पर पांच विकेट से जीत दिलाई। धोनी ने कहा कि विराट हमेशा से जीत में योगदान देना चाहते रहे हैं। वे 80 रन पर भी आउट हो जाएंगे तो वही खिलाड़ी होंगे जो 100 रन बनाना चाहते थे। टीम अगर उनके 80 रन से जीतती है तो उन्हें खुशी होती है। मैं जानता हूं कि 70-80 रन को शतक में बदलना कितना अहम है। यह सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं बल्कि टीम के लिए भी अच्छा है। धोनी ने स्वीकार किया कि पिच पिछले दो मैचों की तरह तेज गेंदबाजों की मददगार नहीं थी। उन्होंने कहा कि पहले दो मैचों में विकेट तेज गेंदबाजों की मददगार थी । यह पिच उतनी मददगार नहीं थी लेकिन बल्लेबाजों को कुछ परेशानी जरू र हुई। यदि तेज गेंदबाज सही दिशा में गेंद डाले तो बल्लेबाजों को मुश्किलें आ रही थी और दोनों टीमों के तेज गेंदबाजों ने ऐसा ही किया।

दूसरी तरफ, श्रीलंका के कार्यवाहक कप्तान एंजेलो मैथ्यूज ने कहा कि लगातार हार से टी20 विश्व कप से पहले उनकी टीम का मनोबल गिर रहा है। भारत से पांच विकेट से मिली हार के बाद मैथ्यूज ने कहा कि इससे काफी नुकसान हो रहा है, खासकर टीम के आत्मविश्वास और मनोबल पर। आप लगातार हार नहीं सकते। यह पचाना मुश्किल है। हमने अभी तक अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं किया है और बल्लेबाजी क्रम के रूप में नाकाम रहे हैं। टी20 विश्व कप इतना करीब है और अब हमें जल्दी ही अपनी गलतियों से सबक लेना होगा। लसिथ मलिंगा टी20 कप्तान है और मैथ्यूज बाकी दो प्रारू पों में कप्तान है। उनके जवाबों से स्पष्ट था कि वह चुनी हुई टीम से खुश नहीं है।

खराब फार्म में चल रहे तिलकरत्ने दिलशान के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि हर किसी के करिअर में खराब दौर आता है और उनका यहां खराब दौर चल रहा है। हम सभी को जिम्मेदारी लेनी होगी, सिर्फ सीनियर्स को नहीं। चयनकर्ताओं और कप्तान ने एक टीम चुनी है जो उन्हें पसंद है। हमें उपलब्ध टीम से ही सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है। उन्हीं पर विश्वास करके आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि टी20 में भारत की सफलता की कुंजी सही खिलाड़ियों का चयन और उनके साथ विजयी संयोजन बनाना होगा। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले कुछ समय में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उन्होंने उसी टीम को बरकरार रखा है जो विश्व कप खेलेगी। यही आपको करना होता है। एक टीम पर भरोसा करके संयम से काम लेना जरूरी है। ज्यादा बदलाव की जरू रत नहीं होती।

बदलाव के दौर से गुजर रही श्रीलंकाई टीम के लिए सीनियर खिलाड़ियों पर निर्भरता एक पहलू रही है। मैथ्यूज ने हालांकि कहा कि इतने ज्यादा मैच हारने के लिए बदलाव के दौर को बहाना नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि मैं रोज कहता हूं कि हम अधिकांश समय चुनिंदा सीनियरों पर निर्भर रहते हैं। उनके नाकाम रहने पर टीम को खमियाजा भुगतना पड़ता है। एशिया कप और विश्व कप जैसे टूर्नामेंटों में आपको टीम में कई सीनियरों की जरू रत होती है लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि हम अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे। उन्होंने कहा कि युवा खिलाड़ियों को अच्छा प्रदर्शन करने में थोड़ा समय लगेगा। हमें संयम से काम लेना होगा लेकिन विडंबना यह है कि यह संयम से काम लेने का सही समय नहीं है।

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