February 26, 2017

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आईसीसी ने कहा, डीआरएस से अंपायर 98.5% फैसले सही ले सकें, ओलंपिक में क्रिकेट पर बोले बनाई जाएगी ‘रणनीति’

आईसीसी ने कहा, हम 2017 में खिलाड़ियों के खून के नमूनों की जांच शुरू करेंगे ताकि खेल को डोपमुक्त रखा जा सके।’

Author दुबई | February 17, 2017 21:39 pm
आईसीसी मुख्य कार्यकारी डेव रिचर्डसन (एपी फाइल फोटो)

आईसीसी के मुख्य कार्यकारी डेविड रिचर्डसन ने बताया है कि डीआरएस से अंपायर 98.5 प्रतिशत सही फैसले लेने में कामयाब रहे हैं। रिचर्डसन ने आईसीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर अपने लेख में कहा,‘मुझे अपने मैच अधिकारियों की पैनल पर फख्र है। हम डीआरएस के बाद 98.5 प्रतिशत सही फैसले लेने में कामयाब रहे जबकि यह प्रतिशत पहले 94 था।’ उन्होंने कहा कि इस साल की पहली छमाही में फिर बात की जायेगी कि क्रिकेट को ओलंपिक खेलों में शामिल करने के लिये क्या रणनीति बनाई जाये।

उन्होंने कहा,‘ओलंपिक खेलों में भागीदारी को लेकर हमें क्रिकेट की रणनीति बनानी होगी। हम इस साल की पहली छमाही में इस पर बात करेंगे। अगर हमारे सदस्य राजी हो गए तो इस पर आगे बढा जायेगा।’ रिचर्डसन ने यह भी कहा कि खेल की अखंडता बनाये रखना आईसीसी का मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने कहा,‘आईसीसी का मुख्य लक्ष्य क्रिकेट को पाक साफ बनाये रखना है। हमें क्रिकेट में भ्रष्टाचार के खिलाफ वैश्विक लड़ाई की अगुवाई करनी है। हम 2017 में इसके तहत खिलाड़ियों के खून के नमूनों की जांच शुरू करेंगे ताकि खेल को डोपमुक्त रखा जा सके।’

कोहली मौजूदा डीआरएस से खुश, अंपायर का फैसला सही

अंपायरों का फैसला समीक्षा प्रणाली (डीआरएस) में पगबाधा का निर्णय करना पिछले कुछ समय से चर्चा का विषय बना हुआ है लेकिन भारतीय कप्तान विराट कोहली इस तकनीक के मौजूदा फॉर्म से खुश हैं। मौजूदा फॉर्म में मैदानी अंपायर द्वारा लिया गया कोई भी पगबाधा का फैसला तीसरे अंपायर रेफर किया जाता है और अगर ‘बॉल ट्रैकर’ में दिखता है कि गेंद केवल स्टंप के पास लगी है तो इसे वापस रैफर किया जाता है। इसे ही अंपायर का फैसला कहा जाता है और मैदानी अंपायर के पास अपने मूल फैसले पर अडिग रहने का अधिकार होता है। इस मामले पर काफी बातें चल रही हैं, लेकिन कोहली मैदानी अंपायर के साथ हैं।

कोहली ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा, ‘मुझे लगता है कि यह सुनिश्चित करने का एक तरीका है कि हर कोई जान जाये कि सही फैसला हुआ है या नहीं। अंपायर का फैसला सभी समझते हैं क्योंकि उन्हें ही फैसला करने का काम सौंपा गया है और डीआरएस प्रणाली में भी इसका सम्मान होता है। मुझे लगता है कि यह सही है। काफी लोग इसे समझते नहीं।’ उन्होंने कहा, ‘अगर मैदानी अंपायर ने फैसला किया है तो निश्चित रूप से लाभ उसे ही दिया जाना चाहिए कि उसके फैसला लेने के दौरान सोच क्या थी और फिर डीआरएस उनके लिए गए उस विशेष फैसले की पुष्टि करता है।’

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First Published on February 16, 2017 4:01 pm

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