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हार्दिक पांड्या ने 10 महीने में बना ली भारत की तीनों टीमों में जगह, शुरुआत में मैगी खाने के भी नहीं होते थे पैसे

इंग्‍लैंड के खिलाफ पांच टेस्‍ट की सीरीज के पहले दो टेस्‍ट के लिए भारतीय टीम में हार्दिक पांड्या का चुना जाना चौंकाने वाला फैसला है।
भारतीय टीम के हरफनमौला खिलाड़ी हार्दिक पांड्या। (फाइल फोटो)

इंग्‍लैंड के खिलाफ पांच टेस्‍ट की सीरीज के पहले दो टेस्‍ट के लिए भारतीय टीम में हार्दिक पांड्या का चुना जाना चौंकाने वाला फैसला है। पंड्या ने इसी साल जनवरी में अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट में डेब्‍यू किया था। उन्‍हें ऑस्‍ट्रेलिया दौरे पर तीन मैच की टी20 सीरीज में खेलने का मौका मिला था। पिछले महीने न्‍यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के साथ उन्‍हें एकदिवसीय क्रिकेट में खेलने का मौका मिला। पहले ही वनडे में वे मैन ऑफ द मैच चुने गए। अब उनके पास टेस्‍ट क्रिकेट में आगाज करने का मौका होगा। पांड्या ने केवल 10 महीने की अवधि में क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट के लिए भारतीय टीम में जगह बनाई है। यह काफी दुर्लभ बात है कि किसी क्रिकेटर को केवल 10 महीने के समय में ही क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट के लिए चुना गया हो।

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पांड्या के लिए अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट का दरवाजा आईपीएल के जरिए ही खुला। इसके बाद सैयद मुश्‍ताक अली ट्रॉफी में एक ओवर में 34 रन बनाकर उन्‍होंने खुद को ऑलराउंडर के रूप में पेश किया। हालांकि इंटरनेशनल क्रिकेट में उनकी शुरुआत अच्‍छी नहीं रही। ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ तीन टी20 में उन्‍होंने 3 विकेट लिए लेकिन बाद में श्रीलंका के खिलाफ तीन मैचों में उन्‍हें एक भी विकेट नहीं मिला। लेकिन एशिया कप में उन्‍होंने फॉर्म दर्शाई और सात विकेट निकाले। वर्ल्‍ड टी20 में भी उन्‍हें पांच विकेट मिले। इस दौरान पांड्या ने बांग्‍लादेश के खिलाफ आखिरी ओवर डाला और भारत को एक रन से जीत दिलाई। वनडे डेब्‍यू के दौरान धर्मशाला में कपिल देव ने उन्‍हें कैप दी। इस मैच में तीन विकेट लेकर वे मैन ऑफ द मैच रहे। दिल्‍ली में खेले गए दूसरे वनडे में बल्‍ले से उन्‍होंने जौहर दिखाए और भारत को जीत के करीब ले गए। उन्‍होंने अभी तक 16 टी20 इंटरनेशनल और चार वनडे खेले हैं। पंड्या बैट और बॉल के साथ ही चुस्‍त फील्‍डर और सेफ कैचर भी हैं।

22 साल के पांड्या के लिए टीम इंडिया तक आने का रास्‍ता काफी मुश्किलों भरा था। उन्‍होंने इंडियन एक्‍सप्रेस को दिए इंटरव्यू में बताया था कि शुरुआती दिनों में उनके पास केवल पांच रुपये की मैगी खाने के पैसे होते थे। बाहर उधारी होने के कारण वे मैदान में ही पड़े रहते और माली से गर्म पानी लेकर मैगी खाते। हार्दिक ने जब बड़ौदा रणजी टीम में खेलना शुरू किया उसी समय उनके पिता हिमांशु को हार्ट अटैक का तीसरा झटका आया। उनके पिता का बिजनेस भी बड़े घाटे में चला गया। उनके पिता घर-घर जाकर पासपोर्ट बनाने का काम करने लगे। पिछले साल ही उनकी मां की भी सर्जरी हुई। हार्दिक को उनके भाई ने काफी मदद की। हार्दिक के एक अन्य भाई कृणाल भी क्रिकेटर हैं। उन्‍होंने आईपीएल 9 में मुंबई इंडियंस की ओर से हिस्‍सा लिया था।

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  1. A
    Abdul mannan
    Nov 3, 2016 at 4:22 am
    Ok
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