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राजकोट में अंग्रेजों का मुकाबला चेतेश्वर पुजारा और रविंद्र जडेजा से ही नहीं, एक और शख्स के हुनर से भी होगा

रसिक की देखरेख में बनायी गई पिच पर ही खेलकर रविन्द्र जडेजा ने पिछले साल चार रणजी मैंचो में 38 विकेट हासिल किए थे। उनके इस प्रदर्शन के दम पर ही उन्हें भारतीय टेस्ट टीम में वापसी का मौका मिला।
विकेट गिरने का जश्न मनाते इंग्लैंड क्रिकेट टीम के खिलाड़ी। (File Photo)

भारत और इंग्लैंड के बीच नौ नवंबर से राजकोट में शुरू हो रहे टेस्ट मैच में मेहमानों की नज़र जिन दो भारतीय खिलाड़ियों पर सबसे ज्यादा होगी वे हैं लोकल ब्वॉय चेतेश्वर पुजारा और रविन्द्र जडेजा। लेकिन इंग्लिश टीम को एक और शख्स से चुनौती मिलेगी जो टीम का हिस्सा तो नहीं हैं, लेकिन भारत दौरे पर आने वाली विदेशी टीमों के लिए हमेशा परेशानी का कारण बनते रहे हैं। यह शख्स कोई और नहीं बल्कि 67 वर्षीय रसिक मकवाना हैं, जो राजकोट और गुजरात के इस हिस्से में जितने भी क्रिकेट पिच हैं उनके निर्माण और देखरेख में शामिल रहे हैं। रसिक मकवाना ही वो शख्स हैं जिन्होंने रविन्द्र जडेजा को भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाने में सबसे ज्यादा मददगार रहे हैं। रसिक की देखरेख में बनायी गई पिच पर ही खेलकर रविन्द्र जडेजा ने पिछले साल चार रणजी मैंचो में 38 विकेट हासिल किए थे। उनके इस प्रदर्शन के दम पर ही उन्हें भारतीय टेस्ट टीम में वापसी का मौका मिला।

जब रसिक से राजकोट में होने वाले टेस्ट सीरीज के पहले मैच के लिए पिच के बारे में पूछा गया तो वो बस मुस्कुरा दिए। शुक्रवार तक पिच बहुत ही सख्त और अपने रंग में दिख रहा था जिससे बल्लेबाजों को कोई परेशानी नहीं होगी। अब यदि रसिक से कोई दरख्वास्त करे तो पिच का मिजाज बदल भी सकता है। रसिक को बल्लेबाजों की अनुकूल पिच को दो दिन में गेंदबाजों के अनुकूल बनाने का मद्दा रखते हैं।

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रविन्द्र जडेजा का यह होम ग्राउंड है और उन्हें पता है कि गेंद कहां डालनी है। रविचन्द्रन अश्विन खुद में इतने सक्षम गेंदबाज हैं कि वो किसी भी पिच पर बल्लेबाजों को छका सकते हैं और इसके लिए उन्हें क्यूरेटर से कोई सहायता ना भी मिले तो कोई परेशानी नहीं। अश्विन को अगर राजकोट में रसिक मकवाना की मदद मिल गयी तो इंग्लैंड के बल्लेबाजों के लिए वह अकेले ही विनाशक साबित हो सकते हैं।

रसिक मकवाना भारतीय विकटों से इस कदर परिचित हैं कि वो किसी भी विकेट को जरूरत के मुताबिक टर्निंग ट्रैक में बदल सकते हैं। रसिक मकवाना कहते हैं कि उनका मिट्टी के साथ दशकों का गहरा नाता है। वह कहते हैं कि जब उन्होंने क्रिकेट पिच बनाना शुरू किया उससे पहले से ही वो मिट्टी से जुड़े हैं। अब वो छोटे थे तब अपने खेतों में काम किया करते थे। सब्जियां उगाते थे। वो कहते हैं, ‘मुझे खेती करने का बहुत शौक था। मेरे हाथों और मिट्टी का बहुत ही अच्छा संबंध है औ जब भी ये दोनों मिलते हैं कुछ अच्छा ही होता है।’ रसिक मकवाना बताते हैं कि उनको क्रिकेट मैदान पर रोलर चलाना अच्छा लगता है। रसिक भाई को 9 नवंबर का बेसब्री से इंतजार है क्योंकि राजकोट के नए मैदान पर यह पहला टेस्ट मैच होगा और पिच रसिक भाई की बनायी हुई होगी।

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