December 10, 2016

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सुप्रीम कोर्ट ने दूर की भारत-इंग्लैंड टैस्ट शृंखला की बाधा

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआइ को बुधवार से शुरू होने वाले पहले मैच के लिए 58.66 लाख रुपए खर्चा करने की अनुमति दे दी है।

Author नई दिल्ली | November 9, 2016 05:13 am
भारतीय कप्तान विराट कोहली ने (शुक्रवार 22 जुलाई) को वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट की पहली पारी में दोहरा शतक जमा दिया है। (Photo-espncricinfo)

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को राज्य क्रिकेट संघों द्वारा भारत-इंग्लैंड टैस्ट शृंखला के आयोजन को लेकर पैदा की गई बाधाओं को हटाते हुए बीसीसीआइ को बुधवार से शुरू होने वाले पहले मैच के लिए 58.66 लाख रुपए खर्चा करने की अनुमति दे दी और साथ ही चेताया भी कि इस राशि का कोई भी हिस्सा मेजबान सौराष्ट्र क्रिकेट संघ को नहीं दिया जाएगा।  शीर्ष अदालत ने भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली समिति को भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआइ) के कार्य के आकलन के लिए और अधिकार देते हुए 2017 में घरेलू, अंतरराष्ट्रीय और आइपीएल मैचों के आयोजन के लिये कंपनियों के साथ हुए सैकड़ों अनुंबधों की जांच की भी अनुमति दी। इसने कहा कि पहले मैच के लिए की गई व्यवस्था तीन दिसंबर तक आयोजित किए जाने वाले टैस्ट मैचों तक जारी रहेगी जबकि वह इस मामले की सुनवाई करेगा जो पहले से ही तय है।

प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाले पीठ ने बीसीसीआइ के सचिव अजय शिर्के सहित उसके शीर्ष अधिकारियों द्वारा पैनल के साथ संवाद में लोढ़ा पैनल के खिलाफ की जाने वाली भाषा का भी कड़ा संज्ञान लिया। लोढ़ा समिति के सचिव और वकील गोपाल शंकर नारायण ने शिकायत की कि उनके द्वारा पैनल के लिए शब्दों के इस्तेमाल और जारी बयान ‘निरंतर अपमान’ करने के समान हैं जिसमें भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय के दो सेवानिवृत्त न्यायाधीश शामिल हैं।  पीठ में न्यायाधीश एएम खानविलकर और डीवाइ चंद्रचूढ़ भी शामिल थे, जिन्होंने बीसीसीआइ का पक्ष पेश करने वाले सीनियर वकील कपिल सिब्बल का ध्यान बोर्ड के सचिव के पत्र के कुछ वाक्यों पर भी आकर्षित कराया और कहा, देखिए शिर्के ने किस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया है।

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सर्वोच्च न्यायालय ने सीनियर वकील और इस मामले में उसकी सहायता कर रहे वकील गोपाल सुब्रमण्यम द्वारा की गई प्रस्तुतियों का संज्ञान लिया कि बीसीसीआइ शीर्ष अदालत के निर्देशों का अनुपालन करने में विफल रहा है, जो आज पीठ के समक्ष रखी गई लोढ़ा समिति की दूसरी रिपोर्ट से स्पष्ट था। प्रस्तुति से सहमति जताते हुए और लोढ़ा पैनल की बीसीसीआइ के कामकाज पर निगरानी के लिए सचिवालय स्तरीय सहयोग की जरूरत की मांग पर पीठ ने कहा, यह उचित है और समिति को विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल करने का अधिकार दिया जाता है, क्योंकि इस मांग का बीसीसीआइ ने विरोध नहीं किया। पीठ ने कहा, ऐसे हालात में हम समिति को अधिकार देते हैं कि वह इस 2017 सत्र में आयोजित होने वाले विभिन्न घरेलू, अंतरराष्ट्रीय और आइपीएल मैचों के लिए अनुबंधों के लिए बीसीसीआइ का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक, सचिव स्टाफ और विशेषज्ञों को शामिल कर सकता है।

पीठ ने कहा कि विशेषज्ञों और सचिव स्टाफ का पारिश्रमिक भी समिति द्वारा तय किया जाएगा और भुगतान का निर्वाह बीसीसीआइ की ओर से किया जाएगा। इसके विपक्ष में सिब्बल ने कहा, आज, हमें एक आदेश की जरूरत है क्योंकि टैस्ट मैच कल से शुरू हो रहा है और कोई भी धनराशि जारी नहीं की गई है। समिति को धनराशि जारी करने का निर्देश दिया जाए, वरना मैच का आयोजन नहीं होगा। उन्होंने कहा, बीसीसीआइ और इंग्लैंड व वेल्स क्रिकेट बोर्ड के बीच एक अनुबंध है। सिब्बल ने साथ ही जोड़ा कि इसका राज्य संघों को कोई लेना-देना नहीं है जो समिति की सिफारिशों का पालन नहीं कर रही हैं।

 

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First Published on November 9, 2016 5:02 am

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