March 27, 2017

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बॉक्‍सर मैरी कॉम ने अपने बेटों को लिखा खुला खत- 17 की उम्र में तीन बार हुई यौन उत्‍पीड़न का शिकार, मजा नहीं चखा पाने का आज भी अफसोस

मैरी कॉम ने लिखा है, "हो सकता है किसी दिन तुम मेरे साथ टहल रहे हो और सुनो की तुम्हारी मां को 'चिंकी' कहा जा रहा है। ये एक गाली है। ये नस्ली भेदभाव है।

बॉक्सर मैरी कॉम ने अपने बेटों को खुला खत लिखकर उन्हें महिला उत्पीड़न के बारे में बताया है।

बॉक्सर और राज्य सभा सांसद मैरी काम ने अपने नौ वर्षीय और तीन वर्षीय बेटों को खुला खत लिखकर उन्हें महिला उत्पीड़न और नस्ली भेदभाव के प्रति सचेत किया है। मैरी ने अपने पत्र में लिखा है कि लड़कों को महिलाओं के संग बरताव के प्रति संवेदनशील बनाए जाने की जरूरत  है। मैरी कॉम ने लिखा है, ” प्यारे बेटों, आओ रेप के बारे में बात करें। आओ महिलाओं के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों के बारे में बात करें। हर रोज महिलाओं का पीछा किया जाता है, उनका उत्पीड़न और रेप किया जाता है। मेरे बच्चों अभी तुम्हारी उम्र केवल नौ साल और तीन साल है लेकिन यही वो उम्र है जब तुम्हें महिलाओं के संग बरताव के बारे में संवेदनशील बनाए जाने की जरूरत है।”

मैरी कॉम ने आगे लिखा है, “मैं अपनी बात तुम्हें ये बताते हुए शुरू करना चाहूंगी कि तुम्हारी मां का यौन शोषण हुआ था। पहले मणिपुर में और उसके बाद फिर जब वो अपनी दोस्तों के साथ दिल्ली और हरियाणा के हिसार में गई थी। मैं जानती हूं कि ये जानकर तुम्हें गहरा धक्का लगेगा कि जिस महिला ने अपनी जिंदगी में सबकुछ बॉक्सिंग से हासिल किया हो उसे भी उत्पीड़न के अनुभव से गुजरना पड़ा। मैं सुबह 8.30 बजे रिक्शा से अपने ट्रेनिंग कैंप जा रही थी तभी एक अजनबी मेरे ऊपर झपटा और मेरे सीने पर हाथ मारा। मुझे गुस्सा आया, बहुत गुस्सा। मैं रिक्शे से कूदकर अपनी चप्पल हाथ में लेकर उसके पीछे दौड़ी लेकिन वो भाग गया। मुझे अफसोस है कि मैं उसे पकड़ नहीं पाई वरना मैंने हाल ही जो कराटे सीखा था उसे आजमा पाती।”

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मैरी कॉम ने लिखा है, “तब मेरी उम्र 17 थी और आज मैं 33 साल की हूं। मैंने अपने देश का नाम रोशन किया है और मेरी पहचान पदक विजेता की है लेकिन एक महिला के तौर पर भी सम्मान चाहती हूं। हम महिलाओं ने नई ऊंचाइयां हासिल की हैं और पुरुषों के गढ़ों को हिलाया है लेकिन कुछ पुरुषों के लिए हम अभी भी केवल शरीर मात्र हैं।” मैरी कॉम ने अपने पत्र में अपने बेटों से कहा है, “मेरे बच्चों याद रखना कि हमारे पास भी तुम्हारी ही तरह दो आंखें और एक नाक है। हमारे शरीर के कुछ हिस्से अलग हैं और हमारे बीच बस इतना ही अंतर है। हम भी सभी पुरुषों की तरह सोचने के लिए अपने दिमाग का इस्तेमाल करते हैं और तुम्हारी ही तरह हमारे दिलों में भी अहसास हैं। किसी को हमारी ब्रेस्ट पर हाथ नहीं मारना चाहिए, न ही हमारे नितंबों को थपथपाना चाहिए। मेरे और मेरी दोस्तों के साथ दिल्ली और हिसार में यही हुआ था। तब हम ट्रेनिंग कैंप के बाहर टहल रहे थे।”

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अपने पत्र में मैरी कॉम ने अपने बेटों से कहा है कि महिला उत्पीड़न का उनके द्वारा पहने जाने वाले कपड़ों और रात या दिन किसी समय से कोई लेना देना नहीं है। पत्र में मैरी ने लिखा है कि भारतीय पुरुषों को घरों में महिलाओं का सम्मान करना सिखाने की जरूरत है। मैरी कॉम ने दुख जताते हुए कहा कि हम एक असंवेदनशील समाज बनते जा रहे हैं। मैरी कॉम ने अपने पत्र में पूर्वोत्तर भारत के लोगों के संग होने वाले नस्ली भेदभाव की भी बात की है। मैरी कॉम ने लिखा है, “हो सकता है किसी दिन तुम मेरे साथ टहल रहे हो और सुनो की तुम्हारी मां को ‘चिंकी’ कहा जा रहा है। ये एक गाली है। ये नस्ली भेदभाव है। मैं एक भारतीय हूं और मैं जानती हूं कि तुम भी एक गर्वान्वित भारतीय बनोगे…एक दिन तुम इस देश का भविष्य बनोगे और महिलाओं का सम्मान करोगे।”

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First Published on October 4, 2016 1:55 pm

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