December 05, 2016

ताज़ा खबर

 

ऐसे बढ़ाएं अपने हाथ में आने वाली सैलरी, ब्रैक-अप में ये करें बदलाव

अगर कोई कंपनी ऐसा करती है तो कर्मचारी सैलरी के ब्रैक-अप में बदलाव करके अपने हाथ में आने वाली सैलरी को बढ़ा सकता है। आइए जानते हैं किस हिसाब से सैलरी ब्रैक-अप बनाया जाए कि आपको ज्यादा फायदा हो सके।

किराए के मकानों में रहने वाले कर्मचारी टैक्स बचाने के लिए एचआरए का दावा कर सकते हैं। अगर आपने होम लोग ले रखा है तो आप किराए के मकान और किश्तों, दोनो पर इनकम टैक्स छूट हासिल कर सकते हैं।

भारत में अधिकतर कंपनियां खुद ही कर्मचारी की सैलरी का ब्रैक-अप तैयार करती है, लेकिन कई ऐसी कंपनियां भी है जो कर्मचारियों को इस बात की छूट देती है और अपने हिसाब से सैलरी ब्रैक-अप तैयार करने का मौका देती है। अगर कोई कंपनी ऐसा करती है तो कर्मचारी सैलरी के ब्रैक-अप में बदलाव करके अपने हाथ में आने वाली सैलरी को बढ़ा सकता है। आइए जानते हैं किस हिसाब से सैलरी ब्रैक-अप बनाया जाए कि आपको ज्यादा फायदा हो सके।

एचआरए- एचआरए का मतलब है होम रेंट अलाउंस यानि घर किराया भत्ता। दरअसल किराए के मकानों में रहने वाले कर्मचारी टैक्स बचाने के लिए एचआरए का दावा कर सकते हैं। अगर आपने होम लोग ले रखा है तो आप किराए के मकान और किश्तों, दोनो पर इनकम टैक्स छूट हासिल कर सकते हैं। अगर ये दोनों ही मकान एक ही शहर में हैं, तब भी आप दोनों पर टैक्स छूट हासिल कर सकते हैं।

एलटीए- एलटीए का मतलब है लीव ट्रेवल अलाउंस यानि छुट्टी यात्रा भत्ता। अगर एलटीए आपकी सैलरी हिस्सा है, तो आप इस भत्ते से टैक्स में छूट हासिल कर सकते हैं। लेकिन याद रखें कि एलटीए देश के भीतर यात्रा पर ही लागू होता है। हर कर्मचारी को यह चार साल में दो यात्राओं के लिए ही मिलता है।

एनपीएस- इसका मतलब है नेशनल पेंशन सिस्टम यानि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली। कॉर्पोरेट मॉडल के तहत, अगर कंपनी एनपीएस में योगदान करती है तो उसे टैक्स में छूट मिलती है। एनपीएस में कंपनी की ओर से कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और डीए (महंगाई भत्ता) के 10 फीसदी तक के योगदान पर सेक्शन 80CCD (2) के तहत छूट मिलती है।

RSMSSB: यहां निकली है 2639 पदों के लिए भर्ती, जानिए- कितनी चाहिए योग्यता

बोनस- अगर कोई कंपनी बोनस देती है तो उस पूरे बोनस पर टैक्स देना होता है। लेकिन कई बार कंपनी कर्मचारियों को बोनस देने से पहले ही उस पर टैक्स काट लेती है। इस स्थिति में कर्मचारी अपने टैक्स-बचत निवेश का विवरण कंपनी को दे सकते हैं, जिससे उनके बोनस पर टैक्स नहीं कटेगा और उन्हें अधिकतम बोनस हाथ में मिल सकेगा। साथ ही टैक्स रिटर्न फाइल करने के वक्त आप टैक्स रिफंड का दावा कर सकते हैं।

रीइम्बर्स्मेंट्स- कर्मचारी अगर किताब- अखबार के खर्चे, टेलीफोन बिल, कार के पेट्रोल व ड्राइवर के वेतन, फूड कूपन जैसे खर्चों के लिए रीइम्बर्स्मेंट्स को वेतन मद के तौर पर क्लेम करते हैं, तो उनका टैक्स दायित्व काफी कम हो सकता है।

जॉब इंटरव्यू में सक्सेस के लिए ध्यान में रखें ये 12 टिप्स

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on October 19, 2016 4:44 pm

सबरंग