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प्रोफेसर ने की पैरवी, बच्चों को स्कूलों में दिखाई जाए पोर्न मूवी!

प्रोफेसर ने कहा कि स्कूली बच्चों को, पॉर्न मूवी में दिखाए जाने वाले सेक्स और असल जिंदगी में सेक्स के बीच के क्या अंतर होता है, समझाना जरूरी है।
‘ये सभी को पता है कि कम युवा कम उम्र से ही पोर्न मूवी देखने लगते हैं, इसलिए यहां प्रश्न युवाओं को पोर्न से अवगत कराना नहीं है।'(यूट्यूब)

पोर्न मूवी क्या स्कूल के सिलेबस का हिस्सा होना सही है? ये बात पर दुनियाभर में जानकारों के बीच चर्चा का विषय है। लेकिन एक प्रोफेसर ने पोर्न मूवी को स्कूल के सिलेबस में एड करने के लिए कह दिया है। डेनमार्क के एक सेक्स विशेषज्ञ प्रोफेसर क्रिस्टियन ग्रॉगार्ड ने स्कूल में ही पॉर्न फिल्में दिखाए जाने की सलाह दे डाली है। समाचार पत्र ‘द गार्डियन’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट में आलबोर्ग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर क्रिस्टियन ग्रॉगार्ड ने कहा कि ये बच्चों को कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार उपभोक्ता बनाने में मददगार साबित हो सकती है और स्कूली बच्चों को पॉर्न मूवी में दिखाए जाने वाले सेक्स और असल जिंदगी में सेक्स के बीच के अंतर को ज्यादा अच्छी तरह समझ सकते हैं। ग्रॉगार्ड ने कहा, ‘मेरा सुझाव है कि अच्छी तरह प्रशिक्षित शिक्षकों की मदद से आठवीं और नौवीं कक्षा के बच्चों के साथ संवेदनात्मक शिक्षाप्रद तरीके से पॉर्न पर गंभीर बहस की जानी चाहिए।’

प्रोफेसर ने रिसर्च का हवाला देते हुए कहा कि ‘ये सभी को पता है कि कम युवा कम उम्र से ही पोर्न मूवी देखने लगते हैं, इसलिए यहां प्रश्न युवाओं को पोर्न से अवगत कराना नहीं है। प्रोफेसर ने नॉर्डिक स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि स्टडी से पता चलता है कि तकरीबन 99 फीसदी लड़के और 86 फीसदी लड़कियां 16 साल की उम्र से ही पोर्न फिल्में देखना शुरू कर देते हैं तो क्या उनके गार्डियन नहीं चाहते कि युवा पोर्न को रचनात्मक रूप से देखने के लिए आवश्यक कौशल प्राप्त करें।

बता दें कि डेनमार्क में 1970 से ही यौन शिक्षा स्कूली पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा है और कई स्कूलों के पाठ्यक्रमों में तो पॉर्न को भी शामिल कर लिया गया है। हालांकि डेनमार्क के सभी स्कूलों में अभी इसे शुरू नहीं किया गया है।

इससे पहले प्रोफेसर ग्रॉगार्ड डेनमार्क के सरकारी प्रसारक ‘डीआर’ से कह चुके हैं कि कक्षा में पोर्न फिल्में दिखाना यौन शिक्षा से बेहतर है, क्योंकि यौन शिक्षा के अंतर्गत ककड़ी के ऊपर कंडोम पहनाने जैसी शिक्षण विधि अब पुरानी और उबाऊ हो चुकी है।

प्रोफेसर ग्रॉगार्ड के अनुसार, ”अब हम अनुसंधान के जरिए जान चुके हैं कि अधिकांश किशोर पोर्न काफी कम उम्र से ही पोर्न से परिचित हो चुके होते हैं। इसका मतलब यह है कि आप उन्हें कक्षा में पहली बार पोर्न नहीं दिखाएंगे।” डेनमार्क दुनिया का पहला देश है, जिसने 1967 में सबसे पहले पोर्न से प्रतिबंध समाप्त कर दिया था।

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