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शाम छह बजे बताया और रात 2 बजे फांसी, जानिए आखिरी 8 घंटों में जुल्फिकार अली भुट्टो ने न‍िपटाए थे कौन-कौन से काम

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फीकार अली भुट्टो को चार अप्रैल 1979 को फांसी दे दी गई थी। उस समय जेल में तैनात एक अधिकारी ने भुट्टो के अंतिम दिनों पर किताब लिखी।
भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ पाकिस्तानी पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फीकार अली भुट्टो।

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फीकार अली भुट्टो को चार अप्रैल 1979 को फांसी दे दी गई थी लेकिन पाकिस्तान की राजनीति में वो आज भी जिंदा हैं। पाकिस्तान की सिंध प्रांत की सरकार ने चार अप्रैल को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। वहीं पाकिस्तानी सीनेट के चेयरपर्सन ने रविवार (दो अप्रैल) को कहा कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फीकार अली भुट्टो की हत्या के पीछे राजनीतिक साजिश थी।पांच जनवरी 1928 को अविभाजित भारत के सिंध में जन्मे जुल्फीकार अली भुट्टो पाकिस्तान के नौवें प्रधानमंत्री थे। उनकी बेटी बेनजीर भुट्टो भी पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनीं। भुट्टो 14 अगस्त 1973 से पांच जुलाई 1977 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे। पांच जुलाई 1977 को पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल मोहम्मद जिया-उल-हक ने उनका तख्तापलट कर दिया।

भुट्टो ने इस तख्ता पलट का विरोध किया। वो पूरे देश में जनसभाएं करने लगे। तीन सितंबर को सेना ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन पर मार्च 1974 में अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की हत्या का आरोप था। भुट्टो का मुकदमा स्थानीय कोर्ट के बजाय सीधे हाई कोर्ट में चला। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि उन्हें अदालत में अपना पक्ष रखने का मौका नहीं मिला। 18 मार्च 1978 को भुट्टो को हत्या का दोषी न पाए जाने के बावजूद मौत की सजा दी गई। भुट्टो के करीबियों और उनके बेटे मुर्तजा और बेटी बेनजीर की तमाम कोशिशों के बावजूद वो रिहा न हो सके। चार अप्रैल 1979 को रावलपिंडी की सेंट्रल जेल में उन्हें फांसी हो गई। उस समय रावलपिंडी जेल के स्पेशल सिक्योरिटी सुपरिटेंडेंट रहे कर्नल रफी-उद-दीन ने भुट्टो के जेल के दिनों पर उर्दू में एक किताब (भुट्टो के आखिरी 323 दिन) लिखी है। 1991 में प्रकाशित इस किताब में दीन ने भुट्टो के आखिरी वक्त का तफ्सील से ब्योरा दिया है।

फांसी दिए जाने से एक दिन 3 अप्रैल को शाम 6.05 बजे जेल के अधिकारियों, मजिस्ट्रेट और डॉक्टर ने भुट्टो को बताया कि सुप्रीम कोर्ट में उनकी फांसी की सजा के खिलाफ अपील रद्द हो गई है। ये खबर सुनकर भुट्टो के चेहरे पर कोई भाव नहीं आया। भुट्टो ने जेल अधीक्षक से कहा कि “मुझे फांसी से 24 घंटे पहले सूचित करना चाहिए था। आज दोपहर 11.30 बजे जब मेरी बेटी और पत्नी मुझसे मिलने आईं तो उन्हें भी इस बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं थी। भुट्टो ने कहा कि चूंकि उन्हें फांसी का कोई लिखित आदेश नहीं दिखाया गया है इसलिए वो अपने वकील से यथाशीघ्र मिलना चाहेंगे और उनके दांत में दर्द है इसलिए वो अपने डॉक्टर जफर नियाजी से भी तत्काल मिलना चाहेंगे।

जब अधिकारी भुट्टो को फांसी की सूचना देकर जाने लगे तो वो कांपते हुए उठे। उन्होंने कहा कि उनके पेट में दर्द हो रहा है। भुट्टो ने अपने सहायक अब्दुर रहमान को बुलाया और दाढ़ी बनाने के लिए गरम पानी लाने को कहा। फिर भुट्टो ने रफी से पूछा, “रफी, क्या ड्रामा रचा जा रहा है?” रफी चुप रहे। जब भुट्टो ने दोबार वही सवाल किया तो उन्होंने उन्हें साफ बता दिया कि उन्हें आज ही फांसी दी जाएगी। ये सुनकर थोड़ी देर के लिए भुट्टो के चेहरे पर अजीब कैफियत तारी हो गयी और फिर वो बोले, “ठीक है, सब खत्म..ठीक है सब खत्म…”

भुट्टो का चेहरा पीला पड़ गया और उनका चेहरा सूख गया। उन्होंने फिर रफी से पूछा, “आज कब?” रफी ने उन्हें जवाब में सात अंगुलिया दिखाईं तो भुट्टो ने पूछा, “सात दिन बाद?” रफी ने उन्हें बताया सात घंटे बाद। थोड़ी देर बाद भुट्टो ने कहा, “मेरे वकीलों ने मामले को बिगाड़ दिया। मेरी फांसी के लिए याहया जिम्मेदार है। वो मुझे सब गलत बताता रहा। उसने सब मिट्टी में मिला दिया।” भुट्टो ने कहा कि उनकी पार्टी को जिंदा के बजाय मुर्दा भुट्टो चाहिए।

दाढ़ी बनाते समय भुट्टो ने जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट से कहा, “डिप्टी साहब, आपको मेरे जैसा नेता कहां मिलेगा? लेकिन आपको मेरे जैसे नेता की जरूरत ही कहां है? मेरी जरूरत गरीबों को है, आप जैसों को नहीं। मैं मोची गेट पर मोचियों के लिए भाषण दिया करता था क्योंकि मैं भी मोची हूं। आप लोग गरीबों से उनका नेता छीन रहे हैं। मैं एक क्रांतिकारी हूं। मैं गरीबों का मददगार हूं….यार जब तुम्हें मुझे मारना ही था तो दो साल पहले क्यों नहीं मार दिया?”

भुट्टो ने डिप्टी से कहा कि उनकी कलाई घड़ी उनकी मौत के बाद उनकी कोठरी के संतरी को दे दी जाए। फांसी से पहले उनका सहायक रहमान जब उनके लिए कॉफी लेकर आया तो भुट्टो ने उससे कहे-सुने के लिए माफी मांगी। रात 8.45 से 9.45 तक वो अपनी वसीयत लिखते रहे। कुछ देर बाद वो अपनी कंघी, शीशा, जानमाज इत्यादि टेबल पर ठीक करने लगे। फिर उन्होंने अपने सिगार की राख वगैरह साफ की। 101.0 पर उन्होंने फिर लिखना शुरू किया और 11.05 तक लिखते रहे। उन्होंने रहमान को बुलाकर अपनी कोठरी साफ करने के लिए कहा। थोड़ी देर बाद ही उसने उनकी कोठरी साफ भी कर दी।

रात 11.25 पर भुट्टो ने कहा कि वो थोड़ी देर सोना चाहते हैं क्योंकि पिछली रात वो ठीक से सो नहीं सके थे। हालांकि उन्होंने अपने सहायक को 12 बजे जगा देने की भी हिदायत दी। उन्होंने अपनी बेटी सनम का नाम कई बार पुकारा। 12 बजे जब उन्हें जगाया गया तो वो नहीं उठे तो जेल के अधिकारियों ने सोने दिया। वो अपने आप चार अप्रैल को तड़के 1.10 पर उठे। ठीक 2.04 बजे उन्हें फांसी दे दी गयी।

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