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सरकार के खिलाफ हुए पाकिस्‍तानी अखबार, पूछा- मसूद अजहर, हाफिज सईद के खिलाफ क्‍यों एक्‍शन नहीं लेता पाक?

एक संपादकीय में ‘डॉन’ ने कहा कि वह अलमीडा की स्टोरी के पक्ष में खड़ा है और निहित स्वार्थ और फर्जी खबरों के आरोपों को खारिज करता है।
Author इस्लामाबाद | October 12, 2016 20:18 pm
चित्र का इस्‍तेमाल केवल प्रस्‍तुतिकरण के लिए किया गया है।

पाकिस्तान के एक अग्रणी अखबार ने आज असैन्य और सैन्य प्रतिष्ठानों से पूछा कि जेईएम प्रमुख मसूद अजहर और जेयूडी के हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ‘‘खतरा’’ किस तरह है। हक्कानी नेटवर्क, तालिबान और लश्करे तैयबा जैसे आतंकी गुटों को गुप्त रूप से सेना के समर्थन पर सेना और नागरिक सरकार के बीच विवाद को लेकर ‘डॉन’ के पत्रकार सायरिल अलमीडा की रिपोर्ट के कारण उनपर पाकिस्तान से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगाने के बीच सरकारी और सैन्य प्रतिष्ठानों के करीबी समझे जाने वाले ‘द नेशन’ में तीखा संपादकीय लिखा है। ‘हाउ टू लूज फ्रेंड्स एंड अलायनेट पीपुल’ शीर्षक वाले संपादकीय में कहा गया है कि अजहर और सईद पर कार्रवाई करने की बजाए सरकार और सेना प्रेस को नसीहत दे रही है। जैश ए मोहम्मद (जेईएम) नेता और पठानकोट आतंकी हमले का सरगना अजहर तथा 2008 मुंबई हमले का सरगना जमात उद दावा (जेयूडी) प्रमुख सईद पाकिस्तान में खुलेआम घूमता है और माना जाता है कि उसे सेना का संरक्षण प्राप्त है। अखबार ने अपने संपादकीय में कहा कि यह व्यथित करने वाला दिन है जब असैन्य और सैन्य आला नेतृत्व मीडिया को इस पर लेक्चर दे रहा है कि किस तरह काम किया जाए।

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अखबार कहता है, ‘‘वस्तुत: आॅनलाइन दुरूपयोग की बौछार, और तीन आधिकारिक खंडन अलमीडा की डॉन अखबार में छपी एक रिपोर्ट को लेकर उठे गुस्से के गुबार को शांत करने के लिए पर्याप्त नहीं थे। इस रिपोर्ट में असैन्य और सैन्य शीर्ष अधिकारियों के बीच मतभेद को लेकर विस्तृत जानकारी दी गई थी और ये वही लोग हैं, जिन्होंने कल एक बयान जारी कर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर रिर्पोटिंग करते समय वैश्विक रूप से स्वीकार्य सिद्धांतों का पालन करने का उपदेश दे डाला।’’

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अखबार में कहा गया है , ‘‘मिस्टर अलमीडा की रिपोर्ट को ‘मनगढंत’ और ‘कयास वाली खबर’ बताया गया है। पर, सरकार और सेना के आला अधिकारियों ने कल की बैठक में यह नहीं बताया कि सरकारी एमएनए पाकिस्तान में प्रतिबंधित संगठनों की नजर आने वाली मौजूदगी का विरोध क्यों नहीं करता। या मसूद अजहर, या हाफिज सईद के खिलाफ संभावित कार्रवाई किस तरह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। या पाकिस्तान अलग थलग क्यों पड़ता जा रहा है।’’ एक संपादकीय में ‘डॉन’ ने कहा कि वह अलमीडा की स्टोरी के पक्ष में खड़ा है और निहित स्वार्थ और फर्जी खबरों के आरोपों को खारिज करता है।

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  1. K
    Khan_ Khan
    Oct 12, 2016 at 3:41 pm
    किया कभी हमारे देश के अख़बार लिखेंगे कि कश्मीर में जो क़त्लेआम हो रहा है गलत है ?
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    Reply
    1. K
      Khan_ Khan
      Oct 12, 2016 at 3:45 pm
      भारत के अख़बार देख के लगता है की जैसे गवमेंट के लिए आप सब काम कर रहे हो.
      (0)(0)
      Reply
      1. R
        reply to
        Oct 12, 2016 at 4:20 pm
        कत्लेआम करना होता तो सुखोई और स्मेर्च इस्तेमाल करते। पैलेट गन और पावा बम नहीं। बताओ कि कितने पत्थरबाज घायल हुए ऐर किते पुलिस वाले? ३५०० पुलिस वाले अस्पताल में हैं। सोचे समझे बिना मत बोला करो।
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        Reply
        1. S
          suresh chandra
          Oct 13, 2016 at 11:15 am
          कांग्रेश पार्टी के नेताओ को सच से मुह नहीं मोड़ना चाहिए । इसमे कोई संदेह नहीं है की भारतीय सेना विश्व की महानतम सेनाओ मे है लेकिन उनके मार्ग दर्शक भी आज मोदी जी ही है । अगर मोदी जी को भी नेतृत्व का श्रेय जा रहा है तो इसमे कांग्रेश को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है । यदि उनके कार्यकाल मे ऐसा होता तो उन्हे श्रेय मिलता । अभद्र भाषा का प्रयोग करने से 44 सीटो से भी नीचे आने का खतरा है । शांति रखे उनका समय अभी नहीं आ सकता देश हित मे मोदी जी का साथ दे अच्छा विपक्ष बने । भगवान इन्हे सद्बुद्धि दे ।
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