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अफ्रीका में परेशानी का सबब बन गया मलेरिया, अरबों डॉलर खर्च करने पर भी नहीं मिल रहीं मच्छरदानियां

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आज जारी एक नयी रिपोर्ट में कहा है कि अफ्रीका में मलेरिया अब भी परेशानी का सबब बना हुआ है और इस घातक बीमारी से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयास ‘पटरी से उतर गए हैं’।
Author लंदन | December 13, 2016 12:04 pm
संयुक्त राष्ट्र की इस स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा कि मलेरिया कार्यक्रमों पर अरबों डॉलर खर्च किए जाने के बावजूद बहुत से लोगों को दवाएं और बीमारी फैलाने वाले मच्छरों से बचाने वाली मच्छरदानियां नहीं मिल पा रही हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आज जारी एक नयी रिपोर्ट में कहा है कि अफ्रीका में मलेरिया अब भी परेशानी का सबब बना हुआ है और इस घातक बीमारी से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयास ‘पटरी से उतर गए हैं’। संयुक्त राष्ट्र की इस स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा कि मलेरिया कार्यक्रमों पर अरबों डॉलर खर्च किए जाने के बावजूद बहुत से लोगों को दवाएं और बीमारी फैलाने वाले मच्छरों से बचाने वाली मच्छरदानियां नहीं मिल पा रही हैं।
डब्ल्यूएचओ ने पिछले साल के अंत में मलेरिया के मामलों को खत्म कर ‘शून्य के करीब’ ले आने का लक्ष्य तय किया था। यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सका और अब वह वर्ष 2030 तक मलेरिया के मामलों और इससे होने वाली मौतों के मामलों कम से कम 90 प्रतिशत कम करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।

डब्ल्यूएचओ के मलेरिया विभाग के निदेशक डॉ पेड्रो अलोंसो ने कहा, ‘‘हम लक्ष्य को पूरा कर पाने से बहुत दूर हैं। इससे भी कठिन समय अभी आना है।’’उन्होंने कहा कि वित्त की कमी के कारण उपलब्धियों पर असर पड़ सकता है। पिछले छह साल में कोष में गतिहीनता आ गई।
मंगलवार की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2015 में मलेरिया के 21.2 करोड़ नए मामले सामने आए और 4.29 लाख लोग इसके चलते मारे गए। यह संख्या पिछले साल की तुलना में कुछ कम थी लेकिन गणना अपूर्ण आंकड़ों एवं मॉडलिंग पर आधारित थी। रिपोर्ट में कहा गया कि निगरानी तंत्रों में 20 प्रतिशत से कम मामले आ पाते हैं। अधिकतर मामले अफ्रीका में हैं। मरने वालों में 70 प्रतिशत बच्चे थे, जिनकी उम्र पांच साल से कम थी। अन्य विशेषज्ञों ने कहा कि डब्ल्यूएचओ को मलेरिया के फैलाव को रोकने के संदर्भ में अपनी प्राथमिकताओं पर नए सिरे से सोचना चाहिए।

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