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अमेरिकी मूल्यों को खतरे में डालने वाला हर व्यक्ति आखिर में नाकाम होगा: ओबामा

बराक ओबामा ने कहा, ‘जो कोई हमारे मूल्यों को खतरे में डालेगा- वह चाहे फासीवादी हो या कम्यूनिस्ट, जिहादी हो या घरेलू भड़काऊ नेता- अंतत: वह विफल ही होगा।’
Author फिलाडेल्फिया | July 28, 2016 15:04 pm
फिलाडेल्फिया में डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन को संबोधित करते बराक ओबामा। (REUTERS/Jim Young/File)

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने हिलेरी क्लिंटन को राष्ट्रपति बनाने का पुरजोर समर्थन करते हुए गुरुवार (28 जुलाई) को कहा कि हर धर्म और हर नस्ल के लोगों द्वारा ‘पसंद किए जाने वाले’ प्राचीन अमेरिकी मूल्यों को जो कोई भी चुनौती देगा या खतरे में डालेगा, वह अंतत: विफल ही होगा। लोगों से हिलेरी क्लिंटन के पक्ष में मतदान करने का आग्रह करते हुए ओबामा ने उन मूल्यों का उल्लेख किया, जो उन्हें उनके कंसास निवासी दादा-दादी ने सिखाए थे। यह कहानी उन्होंने 12 साल पहले बोस्टन कन्वेंशन में सुनाई थी। ओबामा ने डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन को संबोधित करते हुए कहा, ‘जो कोई हमारे मूल्यों को खतरे में डालेगा- वह चाहे फासीवादी हो या कम्यूनिस्ट, जिहादी हो या घरेलू भड़काऊ नेता- अंतत: वह विफल ही होगा।’ उन्होंने कहा, ‘वे (दादा-दादी) मध्य भाग से आए थे। उनके पूर्वजों ने वहां लगभग 200 साल पहले बसना शुरू किया था। उनमें अधिकतर स्कॉटिश-आइरिश थे, किसान, शिक्षक, दवा विक्रेता, तेल क्षेत्र कर्मचारी थे। छोटे शहर के मेहनती लोग। इनमें से कुछ डेमोक्रेट थे लेकिन बहुत से रिपब्लिकन थे।’

ओबामा ने कहा कि उनके दादा-दादी ‘दिखावा करने वालों’, ‘शेखीबाजों’ या ‘धौंस दिखाने वालों’ को पसंद नहीं करते थे। उनके मन में ‘जीवंतता की कमी’ वाले लोगों या जीवन में छोटा रास्ता ढूंढ़ते रहने वालों के लिए कोई सम्मान नहीं था। उन्होंने कहा, ‘इसके बजाए, वे ईमानदारी और मेहनत जैसे मूल्यवान गुणों को महत्व देते थे। उनके लिए दया और विनम्रता, जिम्मेदारी, एक दूसरे की मदद करने जैसी चीजों का महत्व था।’ ओबामा ने कहा, ‘वे लोग इनमें यकीन रखते थे। वास्तविक चीजें, जो हमेशा रहती हैं। ऐसी चीजें, जो हम अपने बच्चों को सिखाने की कोशिश करते हैं। मेरे दादा-दादी ने इस बात को समझा कि ये मूल्य कंसास तक सीमित नहीं थे। ये छोटे शहरों तक सीमित नहीं थे।’

उन्होंने कहा कि वे जानते थे कि इन मूल्यों पर किसी एक नस्ल का एकाधिकार नहीं है। इन्हें अपने आधे-केन्याई पोते को, आधी एशियाई पोती को सिखाया जा सकता है। ये वही मूल्य थे, जो मिशेल के माता-पिता, यानी दासप्रथा के शिकार लोगों के वंशजों ने शिकागो के साउथ साइड में एक बंगले में रहते हुए अपने बच्चों को सिखाया। उन्होंने कहा, ‘इतने वर्षों में अमेरिका बदला है लेकिन जो मूल्य मुझे मेरे दादा-दादी ने सिखाए हैं, वे कहीं नहीं गए। वे हमेशा की तरह मजबूत हैं। आज भी हर पार्टी, हर नस्ल और हर धर्म के लोग इन्हें पसंद करते हैं। ये मूल्य हम सबमें मौजूद हैं।’

उन्होंने कहा कि इन साझा मूल्यों के कारण ही अमेरिका दुनियाभर से परिश्रमी लोगों और उद्यमियों को आकर्षित करता है। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका ऐसा ही है। यह स्नेह के बंधन और साझेपन का सिद्धांत। हम भविष्य से डरते नहीं हैं, उसे गढ़ते हैं और उसे एक होकर गले लगाते हैं। हमारे एकजुट होने पर हम अकेले रहने से ज्यादा मजबूत हैं। हिलेरी इस बात को समझती हैं- वह जुझारू, दूरदर्शी महिला, एक मां और एक नानी, एक लोकसेवक, एक देशभक्त- वह ऐसे ही अमेरिका के लिए लड़ती रही हैं।’ ओबामा ने कहा, ‘इसीलिए आज रात यह मंच छोड़कर जाते समय मुझे यह यकीन है कि डेमोक्रेटिक पार्टी अच्छे हाथों में है। मेरे कार्यकाल में सबकुछ ठीक नहीं किया जा सका। जितना भी हमने किया हो, उससे भी कहीं ज्यादा काम है, जो मैं करना चाहता हूं।’

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