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हाफिज सईद जैसे सनकियों का इस्तेमाल करने से पाकिस्तान को ही होगा नुकसान: पूर्व नौकरशाह हक्कानी

मेरी दलील है कि एक पाकिस्तानी के तौर पर हम क्यों सैन्य शक्ति के मामले में हम भारत की बराबरी करना चाहते हैं। क्यों नहीं हम खुश, खुशहाल और सफल होना चाहते।
Author बेंगलुरू | July 27, 2016 20:21 pm
अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी

अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने कहा कि पाकिस्तान की सैन्य शक्ति में भारत से बराबरी करने की सनक और क्षेत्र में हाफिज सईद जैसे ‘सनकियों’ से क्षेत्र की बराबरी करने के प्रयासों से सिर्फ घृणा पैदा होगी, जिससे उसे ही नुकसान होगा।  उन्होंने कहा, ‘‘मेरी दलील है कि एक पाकिस्तानी के तौर पर हम क्यों :सैन्य शक्ति के मामले में हम भारत की: बराबरी करना चाहते हैं। क्यों नहीं हम खुश, खुशहाल और सफल होना चाहते।’ हक्कानी ने अपनी पुस्तक ‘इंडिया वर्सेस पाकिस्तान–व्हाई कान्ट वी जस्ट बी फ्रेंड्स’ पर संवाद के दौरान कल रात उन्होंने कहा, ‘‘बराबरी करने की यह क्या सनक है और हाफिज सईद जैसे सनकियों के साथ क्षेत्र की बराबरी करने का प्रयास कर रहे हैं क्योंकि वह सिर्फ नफरत पैदा करेगा, जो पलटकर हमें ही काटेगा।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘पाकिस्तान की हमेशा यह धारणा रही है कि भारत के पास जबर्दस्त पारंपरिक सैन्य बढ़त है और भारतीय सेना पाकिस्तान से काफी बड़ी होगी। इसलिए, पाकिस्तान को समान होने में सक्षम बनाने के लिए अनियमित तरीके की आवश्यकता है।’’ हक्कानी ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ की समाचार पत्रों के संपादकों के साथ निजी बातचीत को याद करते हुए हक्कानी ने बताया कि उसमें मुशर्रफ ने कहा कि लश्कर-ए-तय्यबा भारत के साथ लड़ने के लिए उनका रिजर्व कोर है और इसलिए आईएसआई, आतंकवादियों और पाकिस्तानी प्रतिष्ठान के बीच मजबूत गठजोड़ को स्थापित करता है।

हक्कानी ने कहा, ‘‘उन्होंने :मुशर्रफ ने: पाकिस्तानी समाचार पत्रों के संपादकों के साथ निजी बैठक में कहा था कि आप सब मुझसे कहते रहते हैं या आपमें से कुछ मुझे कहते रहते हैं कि मुझे लश्कर-ए-तय्यबा पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए, लेकिन भारत से लड़ने में वास्तव में यह मेरा आरक्षित बल है। यह तथ्य आईएसआई, आतंकवादियों और पाकिस्तानी प्रतिष्ठान के बीच मजबूत गठजोड़ को स्थापित करता है।’’ पूर्व पाकिस्तानी राजदूत ने कहा कि यह जानना तकलीफदेह था कि किसी देश के प्रमुख ने ऐसा सोचा, क्योंकि ये आतंकवादी पाकिस्तान का कोई भला नहीं करेंगे क्योंकि दुनिया ने देखा है कि भारत पर हमला करने के अलावा उन्होंने पाकिस्तान में शियाओं, अहमदिया और ईसाइयों पर हमला किया।

हक्कानी ने कहा कि दुर्भाग्य से वर्दीधारी पाकिस्तानी रणनीतिक विचारक आतंकवादियों और जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तय्यबा जैसे संगठनों का समर्थन करने की इस तकलीफदेह सोच को नहीं महसूस करते हैं। पाकिस्तान में जिहादी गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए पूर्व राजनयिक ने कहा कि जिया-उल-हक पहले व्यक्ति नहीं थे जिन्होंने जिहादी जागरूकता का प्रसार किया, जैसा माना जाता है, बल्कि उनसे काफी पहले ऐसा शुरू हो चुका था। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी धारणा है कि जिया-उल-हक पहले व्यक्ति थे जिन्होंने जिहादी जागरूकता शुरू की, लेकिन मेरा कहना है कि ऐसा काफी पहले शुरू हो चुका था और हमेशा अनियमित युद्ध की इच्छा थी।’’बड़े सशस्त्र मिलिशिया को कैसे बंद किया जाए इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह आसान नहीं है क्योंकि वे युद्ध कौशल में अच्छी तरह प्रशिक्षित हैं।उन्होंने कहा कि लेकिन प्रतिष्ठान उन्हें गतिविधि से दूर कर सकता है, अगर उन्हें उनकी गतिविधि के लिए संसाधनों से वंचित कर दिया जाए। हक्कानी ने कहा, ‘‘अगर हम यह फैसला अभी करते हैं तो उनकी गतिविधियों पर रोक लगाने में करीब 15 साल का वक्त लग जाएगा।’’

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