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सर्जिकल स्ट्राइकस पर अमेरिका ने कहा, भारत को ‘आत्मरक्षा का अधिकार’

अमेरिका यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास कर रहा है कि भारत इस साल के अंत तक परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) का सदस्य बन जाए।
Author वॉशिंगटन | October 14, 2016 11:43 am
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भारत के लक्षित हमलों के समर्थन का स्पष्ट संकेत देते हुए अमेरिका ने कहा है कि वह भारत के इस रुख से सहमति रखता है कि आतंकी खतरों से सैन्य तरीके से निपटने की आवश्यकता है। उसने उरी हमले को ‘सीमा पार आतंकवाद का स्पष्ट मामला’ करार दिया। अमेरिका ने पाकिस्तान के उस हालिया तर्क को भी खारिज कर दिया जिसमें उसने युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में शांति को कश्मीर मुद्दे से जोड़ने की कोशिश की थी। व्हाइट हाउस ने हालिया लक्षित हमलों के मद्देनजर भारत के खुद की रक्षा के अधिकार का समर्थन किया, लेकिन दोनों पड़ोसियों के बीच भारी सैन्यीकरण को लेकर सावधानी और संयम बरतने की भी सलाह दी। इसने यह भी कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक प्रयास कर रहा है कि भारत इस साल के अंत तक परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) का सदस्य बन जाए।

वॉशिंगटन के दर्शकों के समक्ष एक दुर्लभ उपस्थिति में दक्षिण एशिया मामलों के लिए व्हाइट हाउस के प्रभारी पीटर लैवोय ने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध हमारे लिए ‘अत्यंत महत्वपूर्ण संबंध’ हैं । उन्होंने इस दौरान दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच संबंध मजबूत करने में ओबामा प्रशासन की उपलब्ध्यिां गिनाईं। उन्होंने उरी हमले के संबंध में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, ‘उरी हमला सीमा पार आतंकवाद का स्पष्ट मामला है। हम आतंकवाद के इस कृत्य की निन्दा करते हैं। यह एक भयावह हमला था। प्रत्येक देश को आत्मरक्षा का अधिकार है। लेकिन भारी सैन्यीकरण जिसका नतीजा तीन युद्धों के रूप में निकल चुका है, के मद्देनजर सावधानी और संयम बरतने की आवश्यकता है।’

लैवोय ने बुधवार (12 अक्टूबर) को कहा, ‘हम भविष्य में किसी हमले को रोकने संबंधी चिंता भारत के साथ साझा करते हैं। हमारा रुख भारत के रुख के समान ही है कि सीमा पार आतंकवाद का जवाब सैन्य तरीके से दिए जाने की आवश्यकता है। लेकिन हम सावधानी बरतने की भी सलाह देते हैं।’ उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध ‘वैमनस्य भरे’ हैं और उन्होंने इसे दूर करने के लिए कोई मार्ग नहीं खोजा है। पिछले हफ्ते लैवोय ने कश्मीर पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के दो विशेष दूतों से मुलाकात की थी। दोनों पाकिस्तानी दूतों ने अपनी जनसभाओं में अफगानिस्तान की शांति को कश्मीर मुद्दे के समाधान से जोड़ा था। व्हाइट हाउस के अधिकारी ने कहा, ‘हम बिलकुल नहीं मानते कि अफगानिस्तान की स्थिति कश्मीर से संबंधित है।’ लैवोय ने कहा कि अमेरिका पूरी कोशिश कर रहा है कि भारत इस साल के अंत तक 48 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह का सदस्य बन जाए ।

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