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एससीएस फैसले के बाद अमेरिका-चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की वार्ता

हेग के स्थायी मध्यस्थता न्यायालय ने 12 जुलाई को कहा था कि तकरीबन समूचे जलमार्ग पर चीन के दावे का कोई कानूनी आधार नहीं है।
Author बीजिंग | July 25, 2016 18:28 pm
दक्षिणी चीन सागर (फाइल फोटो)

अमेरिका ने यहां चीन के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की वार्ता से पहले सोमवार (26 जुलाई) को ‘स्पष्टवादिता एवं खुलेपन’ का आह्वान किया। यह दक्षिण चीन सागर पर चीन के विस्तारवादी दावे को अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण से खारिज होने के बाद दोनों देशों के बीच ऐसी पहली उच्च स्तरीय राजनीतिक वार्ता है। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सुसन राइस ने अपने चीनी समकक्ष यांग जीची के साथ भेंटवार्ता कर अपनी चीन यात्रा की शुरुआत की। चीन ने न्यायाधिकरण की वैधता पर सवाल उठाते हुए उसके फैसले को खारिज कर दिया है।

राइस का स्वागत करते हुए यांग ने वार्ता से पहले कहा कि अमेरिका और चीन परमाणु अप्रसार और इबोला महामारी जैसे वैश्विक मुद्दों पर काफी घनिष्टता से आपस में सहयोग कर रहे हैं और दोनों पक्षों को अपने मतभेदों का सावधानीपूर्वक प्रबंधन करना चाहिए। राइस ने माना कि अमेरिका ओर चीन कई अन्य वैश्विक मुद्दों एवं चुनौतियों का सामना किया और अब ‘एक हद तक हम इन चुनौतियों को स्पष्टवादिता और खुलेपन के साथ सामने आने देने में समर्थ हैं और मुझे विश्वास है कि हम उन पर काम कर पाएंगे जैसा कि हमने पहले अन्य कई विषयों पर किया है।’

हेग के स्थायी मध्यस्थता न्यायालय ने 12 जुलाई को कहा था कि तकरीबन समूचे जलमार्ग पर चीन के दावे का कोई कानूनी आधार नहीं है। चीन के दावे को खारिज करते हुए उसने उस क्षेत्र पर फिलीपीन के अधिकार को बनाए दखा था। चीन करीब करीब पूरे दक्षिण चीन सागर पर दावा करता है। फिलीपीन, वियतनाम, मलेशिया, ब्रूनेई और ताइवान चीन के दावे का प्रतिवाद करते हैं और चीन पर अवैध रूप से विवादित क्षेत्रों पर कब्जा करने का आरोप लगाया। यांग ने 15 जुलाई को कहा था कि संप्रभुता चीन की निर्णायक बिंदु है। उन्होंने पंचाट के फैसले पर एक साक्षात्कार में कहा था, ‘वैसे चीन विशाल है, लेकिन हम अपने पूर्वजों से मिली विरासत में एक सेंटीमीटर भी छोड़ नहीं सकते।’

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