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अमेरिका व यूरोपीय संघ ने ईरान पर से हटाए प्रतिबंध

अमेरिका और यूरोपीय संघ ने रविवार को ईरान पर लगे तेल और वित्तीय प्रतिबंध हटा लिए और उसकी करीब 100 अरब की संपत्तियां जारी कर दीं।
Author तेहरान | January 18, 2016 01:49 am
ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी

अमेरिका और यूरोपीय संघ ने रविवार को ईरान पर लगे तेल और वित्तीय प्रतिबंध हटा लिए और उसकी करीब 100 अरब की संपत्तियां जारी कर दीं। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजंसी (आइएइए) द्वारा ईरान के अपने वादे पूरे करने की बात कहने के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने वियना में कहा, ‘आज का दिन दुनिया को ज्यादा सुरक्षित बनाने वाला दिन है।’ उन्होंने कहा कि ईरान ने वे सभी कदम उठाए हैं, जिनकी उसने दो साल पहले प्रतिबद्धता जताई थी।’ आज वह पल आ गया जब ईरान का परमाणु समझौता कागजी महत्वाकांक्षी वादों से कार्रवाइयों में बदला।’ उन्होेंने ईरान के खिलाफ लगे सख्त अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने की घोषणा करते हुए कहा कि प्रतिबंधों को लेकर अमेरिका ने जो प्रतिबद्धताएं की थीं वे अब प्रभाव में आ गई हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री बयान से कुछ घंटों पहले ईरान और अमेरिकी ने लंबे समय से एक- दूसरे की जेलों में बंद अपने- अपने कैदियों का अदान- प्रदान किया।

ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी ने दुनिया की अहम ताकतों के साथ परमाणु समझौते के प्रभावी होने के बाद ईरान पर से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाए जाने की सराहना की है। ईरान की सरकारी समाचार एजंसी इरना की रिपोर्ट के अनुसार रूहानी ने कहा, ‘हम ईरानी दोस्ती का पैगाम लेकर दुनिया के पास पहुंचे और दुश्मनी, शक-शुब्हा और साजिशें छोड़ कर दुनिया के साथ ईरान के रिश्तों का एक नया अध्याय खोला।’ संयुक्त राष्ट्र की परमाणु प्रहरी ने यह पुष्टि कर दी कि करार के अनुरूप ईरान कदम उठा रहा है। इसके बाद ईरान ने अंतरराष्ट्रीय अलगाव खत्म करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया। रूहानी ने ‘कार्रवाई की संयुक्त समग्र योजना’ (जेसीपीओए) का जिक्र करते हुए कहा कि जेसीपीओए का क्रियान्वयन किसी देश के लिए नुकसानदेह नहीं है। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, ‘ईरान के दोस्त खुश हैं और इसके प्रतिद्वंद्वियों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। हम किसी सरकार या देश के लिए कोई खतरा नहीं हैं।’

पिछले साल जुलाई में प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ हुए परमाणु समझौते के लागू होने के बाद इस्लामी गणतंत्र ईरान पर लगे प्रतिबंध हटा लिए गए और इसके साथ ही देश ने अपने अंतरराष्ट्रीय एकाकीपन को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा लिया है। साल 2013 में हसन रूहानी ने ईरान का राष्ट्रपति बनने के बाद 14 जुलाई के वियना समझौते की दिशा में बेहद कठिन राजनयिक प्रयास शुरू करने में मदद की थी। रूहानी ने कल कहा कि यह ‘धैर्यवान देश ईरान’ के लिए एक ‘बड़ी जीत’ है। छह वैश्विक शक्तियों का प्रतिनिधित्व करते हुए यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख फेडेरिका मोघेरिनी ने कहा कि इसके परिणामस्वरूप ‘ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े बहुपक्षीय, राष्ट्रीय आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंध हटा लिए गए हैं।’ इनमें ईरान की जीवन शक्ति कहे जाने वाले तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध भी शामिल होंगे और साथ ही आठ करोड़ की आबादी वाले इस देश के लिए कारोबार के द्वार भी खोल दिए जाएंगे। रूहानी ने इस साल को अपने देश के लिए ‘समृद्धि का साल’ बताया है।

मोघेरिनी ने वियना में ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ के साथ एक संयुक्त बयान में कहा कि यह उपलब्धि निश्चित रूप से बताती है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, धैर्य और बहुपक्षीय कूटनीति के जरिए हम बेहद मुश्किल मुद्दों को हल कर सकते हैं।’ ईरान की ओर से उठाए गए कदमों में उसके दो तिहाई यूरेनियम अपकेंद्रण यंत्रों की कटौती करना, यूरेनियम के अपने भंडार को कम करना और ईरान को हथियारों के स्तर के प्लूटोनियम मुहैया करा पाने में सक्षम अराक संयंत्र का मूल हिस्सा हटाना शामिल है। ईरान हमेशा परमाणु हथियार की बात से इनकार करता रहा है। इरान का कहना है कि उसकी गतिविधियां बिजली उत्पादन जैसे शांतिपूर्ण कार्यों के लिए हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने वियना में कहा, ‘आज अमेरिका, हमारे मित्र, पश्चिमी एशिया में हमारे सहयोगी और पूरी दुनिया सुरक्षित हैं, क्योंकि परमाणु हथियारों का खतरा कम हो गया है।’ ब्रिटिश विदेश सचिव फिलिप हेमंड ने कहा कि सालों की धैर्यपूर्ण और सतत कूटनीति का फल मिला है। जर्मन विदेश मंत्री फ्रैंक-वॉल्टर स्टीनमियर ने परमाणु समझौते के क्रियान्वयन को ‘कूटनीति की एक ऐतिहासिक सफलता’ करार दिया है।

नरमपंथी रूहानी के जून 2013 में राष्ट्रपति बनने के बाद दो साल तक वार्ताएं चलीं और तब जाकर जुलाई में वियना समझौता हुआ और इसे एक शानदार कूटनीतिक उपलब्धि कहकर सराहा गया। इस बेहद जटिल समझौते ने विफल राजनयिक पहलों, अभूतपूर्व कड़े प्रतिबंधों, इरान की ओर से अवज्ञापूर्ण ढंग से परमाणु प्रसार और सैन्य कार्रवाई की धमकियों के चलते वर्ष 2002 से आए गतिरोध को रेखांकित किया है। इसके साथ ही इसने अमेरिका समर्थित शाह को सत्ता से हटाने वाली करीब 35 साल पहले की इस्लामी क्रांति के बाद दोनों देशों को बेहतर संबंधों की राह पर अग्रसर किया है। यह इस्लामी क्रांति ऐसे समय पर हुई थी, जो पश्चिम एशिया के लिए विशेष तौर पर विस्फोटक समय था। अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ईरान की ओर से जिन पांच कैदियों को रिहा किया जाना है, उनमें वाशिंगटन पोस्ट के संवाददाता जैसन रेजाइयां और इदाहो के पादरी सईद अबेदिनी भी शामिल हैं। वाशिंगटन ने कहा कि उसने इसके बदले में सात इरानियों को क्षमादान देने का वादा किया है, इनमें छह लोग अमेरिका-ईरान की दोहरी नागरिकता रखते हैं। इसके अलावा उसने 14 अन्य के खिलाफ लगे आरोप हटाने का वादा किया है। समझौते को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की विदेश नीति की सबसे बड़ी जीत मानी जा रही है।

ओबामा के रिपब्लिकन विरोधियों का आरोप है कि यह समझौता इस बात को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि ईरान कभी भी परमाणु बम हासिल नहीं कर पाएगा। यह शिकायत ईरान के चिर प्रतिद्वंद्वी इस्राइल की है। माना जाता है कि उसके पास भी परमाणु हथियार हैं। रिपब्लिकन हाउस स्पीकर पॉल रेयान ने कहा, ‘आज ओबामा प्रशासन विश्व के प्रमुख आतंकवाद समर्थक देश पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना शुरू करेगा।’ सुन्नी बहुल सऊदी अरब इस क्षेत्र में ईरान का एक अन्य सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी है। वह भी अमेरिका और ईरान के बीच गर्माते रिश्तों को लेकर सशंकित है। उसे इस बात की भी चिंता है कि तेल राजस्व के नए प्रवाह के साथ शिया बहुल ईरान का प्रभाव बढ़ सकता है।

सऊदी अरब और ईरान यमन में एक अप्रत्यक्ष युद्ध लड़ रहे हैं और ये दोनों सीरियाई संघर्ष के प्रमुख पक्ष हैं। सऊदी अरब की ओर से जनवरी की शुरुआत में एक शिया धर्मगुरु को मौत की सजा दिए जाने और फिर तेहरान में सऊदी अरब का दूतावास जला दिए जाने के बाद से दोनों देशों में तनाव बढ़ गया है। तेल के बाजार में ईरान की वापसी से इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में पिछले 12 साल की तुलना में तेज गिरावट आई है, जिससे इसकी कीमत 30 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। इसके साथ ही सऊदी अरब के राजस्व पर असर पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तेहरान या वाशिंगटन में ज्यादा कठोर रूख वाली सरकारें नहीं आती हैं, तो इस समझौते को कम से कम एक दशक से ज्यादा समय तक चलना ही है। उनका यह भी कहना है कि यह डगर मुश्किलों से भरी रहने वाली है। इसमें कहा गया है कि कई प्रतिबंधों को त्वरित गति से वापस लागू किया जा सकता है और किसी भी गलतफहमी से निपटने के लिए एक विशेष संयुक्त आयोग होगा। केरी ने कहा, ‘ईरान ने अपना वादा पूरा किया है और हम ऐसा करना जारी रखेंगे। लेकिन हम आने वाले सालों में हर दिन के हर घंटे में ईरान की प्रतिबद्धता की जांच करने के लिए सतर्क भी रहेंगे।

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