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यूएन ने फिर की मोदी सरकार की आलोचना, रोहिंग्या मुस्लिम, गाय और गौरी लंकेश पर घेरा

म्यांमार से कई लाख रोहिंग्या मुसलमान पलायन कर चुके हैं और विभिन्न रिपोर्ट के अनुसार करीब 400 मारे गये हैं।
बुजुर्ग महिला को गोद में उठाकर लाता एक रोहिंग्या मुस्लिम युवक।(Photo Source: REUTERS)

संयुक्त राष्ट्र संघ ने म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों, गाय के नाम पर हो रही हिंसा और पत्रकार गौरी लंकेशकी हत्या पर भारत की  नरेंद्र मोदी सरकार के रवैये की आलोचना की है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संघ के प्रमुख जैद राद अल हुसैन रोहिंग्या मुसलमानों को भारत से वापस भेजने की नरेंद्र मोदी सरकार की कोशिशों की निंदा की है। अल हुसैन ने कहा कि ,’भारत के गृह राज्य मंत्री ने कथित रूप से बयान दिया है कि चूंकि भारत पर रिफ्यूजी कन्वेंशन पर हस्ताक्षर करने वाला देश नहीं है इसलिए भारत इस मामले पर अंतर्राष्ट्रीय कानून से हटकर काम कर सकता है, लेकिन बुनियादी मानव करुणा के साथ।’ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख के मुताबिक भारत का ये कदम अतंर्राष्ट्रीय कानूनों और प्रावधानों के विधिसंगत नहीं होगा। उन्होंने कहा, ‘ हालांकि प्रचलित कानून के आधार पर भारत रोहिंग्या मुसलमानों का उन देशों या उन इलाकों में सामूहिक निष्कासन नहीं कर सकता है जहां उन पर अत्याचार होने की आशंका है या फिर उन्हें निशाना बनाया जा सकता है।’ सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस वक्त भारत में 40 हजार रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं इनमें से 16 हजार लोगों ने शरणार्थी दस्तावेज भी हासिल कर लिये हैं।

हुसैन ने भारत में गाय के नाम पर हो रही हिंसा की निंदा करते हुए इसे “बेहद चिंताजनक” बताया। हुसैन ने कर्नाटक में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या पर ध्यान दिलाते हुए इस बात पर राहत जतायी कि लंकेश की हत्या पर भारत के 12 शहरों में विरोध प्रदर्शन आयोजित हुए। हुसैन ने कहा कि म्यांमार में अल्पसंख्यक रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ हिंसा और अन्याय ‘‘नस्ली सफाये’’ की मिसाल मालूम पड़ती है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सत्र को संबोधित करते हुए जैद राद अल हुसैन ने पहले 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका में हुए आतंकी हमले की बरसी का उल्लेख किया और फिर म्यामां में मानवाधिकार की स्थिति को लेकर चिंता प्रकट की। उन्होंने बुरूंडी, वेनेजुएला, यमन, लीबिया और अमेरिका में मानवाधिकार से जुड़ी चिंताओं के बारे में बात की। जैद ने कहा कि हिंसा की वजह से म्यांमार से 270,000 लोग भागकर पड़ोसी देश बांग्लादेश पहुंचे हैं और उन्होंने ‘सुरक्षा बलों और स्थानीय मिलीशिया द्वारा रोंहिंग्या लोगों के गांवों को जलाए जाने’ और न्याय से इतर हत्याएं किए जाने की खबरों और तस्वीरों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि म्यामांर ने मानवाधिकार जांचकर्ताओं को जाने की इजाजत नहीं दी है, मौजूदा स्थिति का पूरी तरह से आकलन नहीं किया जा सकता, लेकिन यह स्थति नस्ली सफाए का उदाहरण प्रतीत हो रही है।’’ उधर, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने कहा है कि म्यामां के रखाइन प्रांत में ताजा हिंसा की वजह से 25 अगस्त से अब तक 3,13,000 रोहिंग्या बांग्लादेश की सीमा में दाखिल हो चुके हैं। म्यांमार के मध्य हिस्से में एक मुस्लिम परिवार के मकान पर पथराव करने वाली भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने रबर की गोलियां चलाईं। भीड़ ने मागवे क्षेत्र में रविवार रात हमला किया।

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  1. P
    Pasha Muzammil
    Sep 13, 2017 at 12:27 am
    not have Right to change any religion or suggest them to change.so plz shut your durty mouths. and keep calm god is the best planner for all.... inshallah the situation under control as much as earlier......if you not supporting others...so don't comment rubbish....there is no religion of war and terrorism.. Humanity is the best religion....shame of saying such idiologies... because you not facing such situation...
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    Reply
    1. C
      Chanakya sharma
      Sep 12, 2017 at 1:17 pm
      बताओ मुस्लिम किस धरम वाले से नहीं लड़ते हैं ? यह तो आपस में ही लड़ते है , जो धरम इतना बदनाम हो गया है क्या उनको कोई देश अपने यहाँ लेकर आएगा नहीं . अब तो एक ही चारा है धर्म को बदलो , नाम बदलो और कहीं भी चले जाओ .
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      Reply
      1. A
        Arun Sharma
        Sep 12, 2017 at 12:04 pm
        ऐसी निंदा पर घबराने की कोई ज़रुरत नहीं. देश का हित सर्वोपरि है. विश्व में हमसे ज़्यादा मानवाधिकार हनन होते है. जैद राद अल हुसैन को वंहा पर ज्यादा ध्यान देने की ज़रुरत है.
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        1. V
          Varik
          Sep 12, 2017 at 9:58 am
          if UN other muslim countries wants Burma and India should accommodate these illegal population of muslims,why they themselves share the whole populations equally? And when they cry about human rights,why it was not applied when lakhs of Hindus were murdered and forced to leave kashmir.Even further I would demand apology from all the muslim world when their ancestors since 6th century (Ghazani) to 17th Century(Tipu Sultan) attacked India and murdered,raped thousands of Hindus. Have they ever said a single word about that? if not, better shut your mouth now and as a courtesy to Rohingya muslims share the contribution equally rather than pushing them only on India and Burma.
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          सबरंग