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UN ने पास किया प्रस्ताव, ISIS के खिलाफ एक जुट हुए सभी देश

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने फ्रांस द्वारा प्रायोजित प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया...
Author सयुंक्त राष्ट्र | November 21, 2015 23:29 pm

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने फ्रांस द्वारा प्रायोजित प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया जिसमें सभी देशों से इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों और अन्य कट्टरपंथी समूहों को और हमले करने से रोकने के लिए अपने प्रयास दोगुने करने और इस संबंध में समन्वित कार्रवाई की अपील की गई है।

प्रस्ताव में कहा गया है कि इस्लामिक स्टेट संगठन ‘अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा के लिए एक वैश्विक व अभूतपूर्व खतरा है।’ इस प्रस्ताव में ‘इस अभूतपूर्व खतरे से सभी माध्यमों का उपयोग करके निपटने को लेकर परिषद की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है।’
संयुक्त राष्ट्र की सबसे शक्तिशाली इकाई ने वर्ष 1999 के बाद से आतंकवाद के संबंध में यह 14वां प्रस्ताव पारित किया है। यह प्रस्ताव ऐसे समय में पारित किया गया है जब एक सप्ताह पहले हिंसक कट्टरपंथियों ने पेरिस में गोलीबारी और बम हमले किए थे जिनमें 130 लोग मारे गए थे। इस्लामिक स्टेट समूह ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है।

प्रस्तावित पारित किए जाने के आठ दिन पहले बेरूत में भी दोहरा आत्मघाती हमला हुआ था जिसमें 43 लोग मारे गए थे। तीन सप्ताह पूर्व एक रूसी विमान पर हमला किया गया था और वह मिस्र के सिनाई प्रायद्वीप में गिरा था। इस घटना में विमान में सवार सभी 224 लोग मारे गए थे। इन दोनों हमलों की जिम्मेदारी भी आइएस ने ली है।

यह प्रस्ताव सॉसे, ट्यूनीशिया, अंकारा और तुर्की में इस साल इस्लामिक स्टेट द्वारा किए गए इन हमलों की और पूर्व में भी हुए ‘भयानक आतंकवादी हमलों’ की ‘ बेहद कड़े शब्दों में स्पष्ट रूप से आलोचना करता है।’ प्रस्ताव में इस्लामिक स्टेट समूह और सभी अन्य हिंसक अतिवादी समूहों के खिलाफ ‘सभी आवश्यक कदम उठाने की क्षमता रखने वाले’ संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों से अपील की गई है कि वे ‘उन सभी सुरक्षित पनाहगाहों को नष्ट करें जो आतंकवादियों ने इराक और सीरिया के बड़े हिस्सों में स्थापित किए हैं।’
हालांकि यह प्रस्ताव सैन्य कार्रवाई का अधिकार नहीं देता है क्योंकि यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र चार्टर के चैप्टर सात के तहत तैयार नहीं किया गया है। चैप्टर सात ही एकमात्र ऐसा तरीका है, जिसके माध्यम से संयुक्त राष्ट्र बलों के उपयोग को हरी झंडी दे सकता है।
प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों से अपील की गई है कि वे ‘इराक और सीरिया में विदेशी आतंकवादी लड़ाकों के प्रवाह को रोकने के अपने प्रयासों को तेज करें और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकें और दबाएं।’ अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सितंबर 2014 में सुरक्षा परिषद की एक बैठक की अध्यक्षता की थी जिसमें सदस्यों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था। इस प्रस्ताव में सभी देशों से इस्लामिक स्टेट समूह जैसे आतंकवादी संगठनों में शामिल होने की तैयारी कर रहे विदेशी लड़ाकों की भर्ती और उनके आवागमन को रोकने की अपील की गई थी।

 

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