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भारत-पाकिस्‍तान के बीच पुल का काम कर सकते हैं डोनाल्‍ड ट्रंप, अमेरिका ने कहा- कुछ होने का इंतजार नहीं करेंगे

अमेरिका ने जम्मू-कश्मीर पर अपनी तटस्थ नीति में परिवर्तन के संकेत दिए हैं।
Author वाशिंगटन | April 4, 2017 20:29 pm
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निक्की हेली

अमेरिका ने जम्मू-कश्मीर पर अपनी तटस्थ नीति में परिवर्तन के संकेत दिए हैं। अमेरिका ने मंगलवार को कहा कि वह भारत तथा पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने के प्रयासों में अपनी ‘जगह बनाने की कोशिश’ करेगा। अमेरिका ने कहा कि वह ‘कुछ घटित होने’ का इंतजार नहीं करेगा। इस तरह अमेरिका ने संकेत दिया है कि ऐसे प्रयासों में राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भूमिका निभा सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने भारत-पाक विवाद में नहीं उलझने के अमेरिकी रुख में अचानक आए परिवर्तन की ओर संकेत देते हुए संवाददाताओं से कहा, ‘यह बिल्कुल सही है कि यह प्रशासन भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को लेकर चिंता रखता है और हम यह देखना चाहते हैं कि किसी भी विवाद को आगे बढ़ने से रोकने में हम किस तरह की भूमिका निभा सकते हैं।’ ट्रंप मंत्रिमंडल की वरिष्ठ भारतीय-अमेरिकी सदस्य हेली ने उम्मीद जताई कि प्रशासन बातचीत करेगा और तनाव को कम करने के प्रयासों का हिस्सा बनेगा।’

अप्रैल माह के लिए सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष पद संभालने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘हमें नहीं लगता कि कुछ घटित होने तक हमें इंतजार करना चाहिए।’ उनसे पूछा गया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे को लेकर तनाव बढ़ने के मद्देनजर क्या अमेरिका दक्षिण एशिया के दो पड़ोसियों के बीच शांति वार्ता करवाने के लिए कोई प्रयास करेगा, जिस पर उन्होंने यह टिप्पणी की। हेली ने कहा, ‘हां हमें बिलकुल ऐसा लगता है कि हमें इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। तनाव और विवाद बढ़ रहा है इसलिए हम यह देखना चाहते हैं कि हम इसका किस तरह हिस्सा बन सकते हैं।’

हेली ने कहा, ‘मुझे लगता है कि इसमें आप राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सदस्य को भागीदारी करते देखेंगे और आपको अचरज नहीं होना चाहिए अगर खुद राष्ट्रपति भी इसमें शामिल हों।’ यह पहली बार है जब ट्रंप मंत्रिमंडल की सदस्य के तौर पर निक्की हेली ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को लेकर चिंता जाहिर की है। पूर्ववर्ती बराक ओबामा प्रशासन का यह कहना था कि कश्मीर दक्षिण एशिया के दो पड़ोसियों के बीच द्विपक्षीय मुद्दा है। विदेश मंत्रालय के पूर्व प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा था कि कश्मीर के मुद्दे पर दोनों राष्ट्रों को मिलकर काम करना चाहिए इसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं है। अमेरिका ने यह भी कहा था कि कश्मीर मुद्दे पर बातचीत का स्वरूप, व्यापकता और गति क्या होगी यह भारत और पाकिस्तान को तय करना है।

भारत दृढ़ता से कहता आ रहा है कि कश्मीर उसके और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दा है, इसके साथ ही भारत ने संयुक्त राष्ट्र या अमेरिका समेत किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार कर दिया था। दूसरी ओर पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न मंचों पर कश्मीर मुद्दा बार-बार उठाता रहा है और इसका समाधान निकालने की खातिर विश्व समुदाय के साथ-साथ वॉशिंगटन की मध्यस्थता के लिए तैयार है।

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