December 03, 2016

ताज़ा खबर

 

‘ब्रिटेन में भारतीय या एशियाई कहलाना पसंद नहीं करते हैं कई सिख’

94 प्रतिशत से ज्यादा सिखों ने कहा कि वे पांच ककारों (केश, कंघा, कड़ा, कच्छा और कृपाण) तथा सिख पगड़ी को कानूनी रूप दिए जाने का स्वागत करेंगे।

Author लंदन | November 25, 2016 21:45 pm
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

ब्रिटेन में रहने वाले कई सिख खुद को ‘भारतीय’ या ‘एशियाई’ कहलाना पसंद नहीं करते और सिख समुदाय के लिए अलग जातीय श्रेणी चाहते हैं। उक्त बात शुक्रवार (25 नवंबर) को जारी हुए ब्रिटेन सिख सर्वेक्षण 2016 में कही गई है। ‘सिख नेटवर्क’ के वार्षिक सर्वेक्षण में पूरे ब्रिटेन से 4,500 लोगों ने हिस्सा लिया। इसमें यह बात भी सामने आयी है कि समुदाय के लोग लगातार भेदभाव और घृणा अपराधों का शिकार होते रहते हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, ‘रिपोर्ट में नेटवर्क के सर्वेक्षण परिणामों को शामिल किया गया है। इसका लक्ष्य ब्रिटिश सिख समुदाय के मौजूदा ट्रेंड्स और विकास से सरकारी विभागों, अन्य सार्वजनिक संस्थाओं और राजनीतिक दलों को अवगत करना है।’ इसमें कहा गया है, ‘20 में से 19 सिख खुद को ‘भारतीय’ या ‘एशियाई’ कहलाने से इनकार करते हैं। 93.5 प्रतिशत सिखों का कहना है कि वे 2021 की जनगणना में सिखों के लिए पृथक जातीय कॉलम शामिल किए जाने का स्वागत करेंगे। 94 प्रतिशत से ज्यादा सिखों ने कहा कि वे पांच ककारों (केश, कंघा, कड़ा, कच्छा और कृपाण) तथा सिख पगड़ी को कानूनी रूप दिए जाने का स्वागत करेंगे।’

यह ब्रिटेन-भारत संबंधों के बीच‘‘गंभीर’ उलझाव को भी दिखाता है। सर्वेक्षण में भाग लेने वाले ज्यादातर लोगों ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में जून 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार के पहले और बाद के घटनाक्रम की ‘स्वतंत्र सार्वजनिक जांच’ कराने की मांग की है। रिपोर्ट के अनुसार, ‘श्री हरमन्दर साहिब पर 1984 में हुई कार्रवाई में ब्रिटिश सरकार की संलिप्तता के पूर्ण तथ्यों को स्थापित करने के लिए स्वतंत्र जांच होनी चाहिए, ऐसा 92 प्रतिशत लोगों का मानना है।’

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on November 25, 2016 6:38 pm

सबरंग