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‘हमारे पड़ोस’ से पैदा हुआ आतंकवाद बड़ा खतरा: प्रणब

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने परोक्ष रूप से पाकिस्तान का संदर्भ देते हुए कहा कि ‘हमारे पड़ोस’ से उत्पन्न आतंकवाद भारत के लिए बड़ा सुरक्षा खतरा बना हुआ है..
Author अम्मान | October 12, 2015 09:27 am
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (पीटीआई फोटो)

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने परोक्ष रूप से पाकिस्तान का संदर्भ देते हुए रविवार को कहा कि ‘हमारे पड़ोस’ से उत्पन्न आतंकवाद भारत के लिए बड़ा सुरक्षा खतरा बना हुआ है और इस चुनौती से निपटना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अहम प्राथमिकता होनी चाहिए।

प्रणब ने कहा कि दशकों से लंबित अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र संधि को यथाशीघ्र मंजूर किया जाना चाहिए। इससे देशों को आतंकवादी गतिविधियों के लिए अपनी धरती का इस्तेमाल होने देने पर रोक लगेगी जिससे मानवता का भला होगा।

जार्डन विश्वविद्यालय में डॉक्टरेट की मानद उपाधि ग्रहण करने के बाद राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा, ‘हमारे पड़ोस से उपजने वाला आतंकवाद हमारे लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। हमारा विश्वास है कि इस चुनौती से निपटना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की एक बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। भारत का मानना है कि आतंकवादियों की पहचान करने और उससे निपटने में देशों को चयनात्मक नीति नहीं अपनानी चाहिए। खासकर उनको जो ऐसी ताकतों को अपनी धरती पर पनपने दे रहे हैं। इससे अंतत: इन ताकतों से उन्हीं को खतरा पैदा होगा।’
राष्ट्रपति ने हालांकि पाकिस्तान का नाम नहीं लिया लेकिन ‘भारत के पड़ोस’ और अन्य टिप्पणियों से यह लगभग स्पष्ट हो गया है कि वह किसका उल्लेख कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत विदेश और आंतरिक नीतियों में शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्ध है और रहेगा।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘हमारे पड़ोस में अस्थिरता हमारी सुरक्षा को खतरा पैदा कर सकती है और हमारी प्रगति को धीमा कर सकती है। ऐसे समय में जबकि पूरा विश्व आतंकवाद से प्रभावित है, यह समझना बहुत जरूरी है कि भारत चार दशकों से अधिक से इस बुराई से जूझ रहा है।’

उन्होंने याद दिलाया कि भारत ने जार्डन के पायलट मुआत अल कसास्ब एह की निर्मम हत्या की निंदा की थी और आतंकवाद की इस बुराई से लड़ने में क्षेत्रीय और अतंरराष्ट्रीय प्रयासों को दिशा देने के लिए जार्डन के प्रयासों की सराहना की थी।

इससे पहले जॉर्डन के प्रधानमंत्री अब्दुल्ला इनसौर से भेंट के दौरान मुखर्जी ने सीरिया, फिलस्तीन में विस्फोटक स्थिति और आइएस के खतरों के बारे में भी चर्चा की। इस मौके पर दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक जहाजरानी, राजनयिकों के प्रशिक्षण, सूचना प्रौद्योगिकी, सांस्कृतिक आदान-प्रदान व मीडिया सहित विविध विषयों पर छह समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

इनके अलावा भारत और जॉर्डन के विश्वविद्यालयों के बीच अकादमिक सहयोग संबंधी 10 सहमति पत्रों पर भी हस्ताक्षर हुए। जॉर्डन के प्रधानमंत्री इनसौर और मुखर्जी ने आपसी हितों से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया। इस मुलाकात के बाद प्रतिनिधि स्तर की बैठक हुई और समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

जॉर्डन की समाचार एजंसी पेट्रा और पे्रस ट्रस्ट आफ इंडिया के बीच समाचारों के आदान-प्रदान संबंधी एक समझौता भी हुआ है। इसके अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू और जामिया मिलिया इस्लामिया व आइआइटी- खड़गपुर के साथ अकादमिक सहयोग संबंधी एक सहमति पत्र पर भी हस्ताक्षर किए गए।

राष्ट्रपति मुखर्जी ने अम्मान में महात्मा गांधी के नाम पर एक मार्ग का उद्घाटन भी किया। अम्मान में सदजाग्लौल मार्ग के एक हिस्से का नाम महात्मा गांधी मार्ग रखा गया है। अम्मान के मेयर अकील बेल तागी ने इस मौके पर आयोजित समारोह में कहा कि इस मार्ग का नामकरण विशेष तौर पर भारतीय नेता के नाम पर रखने के लिए चुना गया क्योंकि यह भारत और दुनिया के इस हिस्से में शांति के लिए हुए संघर्ष के इतिहास को जोड़ता है।

बेल तागी ने कहा-‘इस सड़क को इसलिए चुना गया क्योंकि सड़क का एक हिस्सा शाही परिवार के एक सदस्य जो कि शाह अब्दुल्ला के भाई हैं, से जुड़ा है और दूसरा शांतिपूर्ण क्रांति के नेता सदजाग्लौल से जुड़ा है जो कि उस समय सक्रिय थे जब महात्मा गांधी भी सक्रिय थे।’ मेयर ने कहा कि पूर्व शाह अब्दुल्ला प्रथम ने भी भारत की आजादी से एक वर्ष पूर्व 1946 में साम्राज्यवादी शासन से आजादी पाने के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष चलाया था। यह हमारे बीच समानता को प्रदर्शित करता है।

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