March 25, 2017

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पाकिस्तान को सर्जिकल स्ट्राइक के मामले में नहीं मिल रहा संयुक्त राष्ट्र में सहयोग: अकबरुद्दीन

भारतीय दूत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने महासभा में भी कश्मीर मसला उठाया था लेकिन कितने देशों से इसे 'समर्थन' दिया? उन्होंने कहा, 'मेरे हिसाब से किसी ने भी नहीं।'

Author संयुक्त राष्ट्र | October 1, 2016 14:45 pm
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन। (फाइल फोटो)

भारत ने कहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लक्षित हमलों के मामले को संयुक्त राष्ट्र में ले जा रहे पाकिस्तान को वैश्विक संस्था में कोई समर्थन नहीं मिला है और उन्होंने इन दावों को भी खारिज किया कि संघर्षविराम पर नजर रख रहे संयुक्त राष्ट्र मिशन ने नियंत्रण रेखा पर ‘सीधे तौर पर’ किसी प्रकार की गोलीबारी प्रत्यक्ष रूप से ‘नहीं देखी है’। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर 29 सितंबर को भारत के लक्षित हमलों का जिक्र करते हुए महासचिव बान की मून के प्रवक्ता स्टीफेन दुजारिक के इन बयानों को खारिज कर दिया कि भारत एवं पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के सैन्य निगरानी समूह (यूएनएमओजीआईपी) ने ‘नियंत्रण रेखा के पार ताजा घटनाक्रम संबंधी कोई गोलीबारी सीधे तौर पर नहीं देखी है।’

अकबरुद्दीन ने यहां भारतीय स्थायी मिशन में शुक्रवार (30 सितंबर) को संवाददाताओं से कहा कि किसी के ‘देखने’ या नहीं देखने से असल बात बदल नहीं जाती। भारतीय दूत से जब दुजारिक के बयान पर टिप्पणी करने को कहा गया तो उन्होंने कहा, ‘मेरे पास कहने के लिए कुछ भी नहीं है क्योंकि (दुजारिक) ने जो कहा उसे ‘सीधे तौर पर देखा गया।’ यह उन्हें ही देखना है। मैं उनके दृष्टिकोण से चीजों को नहीं देख सकता और किसी चीज पर सीधे तौर पर नजर नहीं रख सकता।’ अकबरुद्दीन ने कहा कि ‘कोई किसी बात को स्वीकार करता है या नहीं ,इससे हकीकत बदल नहीं जाती। वास्तविकता, वास्तविकता होती है, हमने तथ्य सामने रखे।’

दुजारिक से उनके दैनिक संवाददाता सम्मेलन में जब इस बात पर स्पष्टीकरण मांगा गया कि भारत ने कहा है कि उसने लक्षित हमला किया तो यूएनएमओजीआईपी कैसे यह कह सकता है कि उसने कोई गोलीबारी नहीं देखी, तब उन्होंने दोहराया कि यूएनएमओजीआईपी ने ‘सीधे तौर पर कोई गोलीबारी’ नहीं देखी। उन्होंने कहा कि जिन उल्लंघनों के बारे में बात की जा रही है, वह निश्चित ही उनकी रिपोर्टों से वाकिफ हैं और वे संबंधित प्राधिकारियों से बात कर रहे हैं। अकबरुद्दीन ने कहा कि पाकिस्तान कश्मीर एवं लक्षित हमलों के मामलों को लेकर संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एवं 15 सदस्यीय परिषद के पास गया है लेकिन वैश्विक संस्था द्वारा हस्तक्षेप की उसकी अपील को कोई समर्थन नहीं मिला क्योंकि इस मामले पर आगे कोई चर्चा नहीं हुई।

पाकिस्तान की दूत मलीहा लोधी ने सितंबर महीने के लिए परिषद के अध्यक्ष एवं संयुक्त राष्ट्र में न्यूजीलैंड के राजदूत गेरार्ड वान बोहेमेन से मुलाकात करके भारत की कार्रवाई का मामला यूएनएससी में उठाया था। अकबरुद्दीन ने इसका जिक्र करते हुए कहा, ‘कल (शुक्रवार, 30 सितंबर) कुछ कार्रवाई हुई थी। आप प्रतिक्रिया के बारे में भी जानते हैं।’ अकबरुद्दीन ने कहा, ‘पाकिस्तान की राजदूत ने कल (शुक्रवार, 30 सितंबर) न्यूजीलैंड से संपर्क किया था। उन्होंने इसके बाद आपको जो नहीं बताया, वह हुआ। क्या किसी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हुई बात के बारे में कोई बात उठाई। इसके बारे में मैं जो उत्तर जानता हूं, वह यह है कि इस (लक्षित हमला एवं कश्मीर मसले) पर आगे कोई बात नहीं हुई।’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने परिषद के ‘अनौपचारिक विचार विमर्श’ में न्यूजीलैंड के राजदूत के जरिए इस मामले को उठाया था। अकबरुद्दीन ने कहा, ‘क्या इसके बारे में कोई बात हुई। मैंने नहीं सुनी, न ही उन अनौपचारिक वार्ताओं में किसी और ने यह सुना। हम एक जिम्मेदार देश हैं। हमारी मंशा स्थिति को और बिगाड़ने की नहीं है।’ उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार देश के तौर पर भारत दोषियों को सजा नहीं दिए जाने को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा, ‘हम इस बात को लेकर उदासीन नहीं रहेंगे कि क्षेत्र का इस्तेमाल हमारे देश के निर्दोष नागरिकों की हत्या करने के लिए किया जा रहा है।’ उन्होंने साथ ही कहा कि भारत ‘इस प्रयास में पाकिस्तान से भी समर्थन मिलने की उम्मीद करता है।’ अकबरुद्दीन ने कहा, ‘आखिरकार वे इस मामले में द्विपक्षीय समझ को लेकर प्रतिबद्ध हैं।’

भारतीय दूत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने महासभा में भी कश्मीर मसला उठाया था लेकिन कितने देशों से इसे ‘समर्थन’ दिया? उन्होंने कहा, ‘मेरे हिसाब से किसी ने भी नहीं।’ अकबरुद्दीन ने कहा, ‘उच्च स्तरीय आम बहस में पाकिस्तान ने (कश्मीर पर) एक विशेष एवं लंबी बात रखी थी। मैंने मंच पर आए किसी भी सदस्य देश को इसके समर्थन में बात करते नहीं सुना। आखिरकार उनमें से 193 देश मंच पर आए। किसी ने कोई समर्थन नहीं किया। यदि आप कोई विरोधाभासी बात पाते हैं तो मैं उससे सुनना चाहूंगा।’ उन्होंने कहा, ‘हमारा दृष्टिकोण यह है कि हमने कल (शुक्रवार, 30 सितंबर) जो प्रतिक्रिया (लक्षित हमले) दी.. वह एक सोचा समझा, उचित एवं आतंकवाद रोधी हमला था। यह एक स्पष्ट एवं निकटस्थ हमले को रोकने की हमारी इच्छा को दर्शाता है। हमारे लक्ष्य पूरे हो गए हैं।’ अकबरुद्दीन ने दोहराया कि ‘जिम्मेदार देश’ के तौर पर भारत का प्रयास उचित तरीके एवं सोच समझकर जवाब देना और इसके लक्ष्यों को पूरा करना है। उन्होंने कहा, ‘इस मामले में, हमारा मानना है कि हमारे लक्ष्य पूरे हो गए हैं। कौन बात को किस प्रकार से घुमाता है, किसी ने उसे देखा है या नहीं, इस मुद्दे के लिए इसका कोई औचित्य नहीं है। यह हमला किया गया, हमें लगता है कि इससे हमारा मकसद पूरा हो गया, यही देश के तौर पर हमारे लिए महत्वपूर्ण है।’ अकबरुद्दीन से जब पूछा गया कि क्या महासचिव के कार्यालय या सुरक्षा परिषद ने तनाव कम करने के संबंध में भारत से संपर्क किया है, उन्होंने कहा, ‘मैंने (पाकिस्तान के) निवेदन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं सुनी।’

उन्होंने कहा कि सामान्य कूटनीतिक परंपरा के अनुसार यदि इस मामले पर उनसे या किसी अन्य भारतीय रायनयिक से कोई अनुरोध किया जाता है तो ‘राजनयिक के तौर पर उस पर प्रतिक्रिया देना हमारा काम है।’ अकबरुद्दीन ने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र में हमारा बहुत विस्तृत एजेंडा है। हमारे एजेंडे में शांति एवं सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन एवं स्थायी विकास लक्ष्यों की बात शामिल हैं। यह अन्य के साथ मिलकर शांति की संस्कृति अपनाने से भी संबंधित है।’ उन्होंने कहा, ‘हम इस विस्तृत एवं व्यापक एजेंडे पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हम एक एजेंडे वाला देश नहीं है।’ इस बीच मलीहा ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के साथ बैठक में कहा कि नियंत्रण रेखा के पार लक्षित हमला करने का भारत का दावा गलत है लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने खुद माना है कि उसने पाकिस्तान के खिलाफ ‘आक्रामकता दिखाई’ है। यहां जारी पाकिस्तानी मिशन की विज्ञप्ति के अनुसार मलीहा लोधी ने बान की मून से कहा कि पाकिस्तान ने अधिकतम संयम का परिचय दिया है लेकिन किसी भी तरह की आक्रामकता और उकसावे का वह जोरदार जवाब देगा। विज्ञप्ति के अनुसार मलीहा ने कहा कि ‘बढ़ते संकट के लिए पूरी तरह भारत जिम्मेदार है।’ उन्होंने बान की मून को बिगड़ते हालात की जानकारी देते हुए कहा, ‘भारत ने अपनी घोषणाओं एवं कार्रवाइयों द्वारा ऐसी स्थितियां पैदा की हैं जिनसे क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है।’

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First Published on October 1, 2016 2:45 pm

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