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पाकिस्तान के पुराने रवैये का समय पूरा हुआ, वह कश्मीर के बारे में सोचना छोड़े: अकबरुद्दीन

अकबरुद्दीन ने कहा कि पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय मंचों के ‘गलत’ इस्तेमाल से हकीकत नहीं बदलेगी।
Author संयुक्त राष्ट्र | October 6, 2016 13:10 pm
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन। (फाइल फोटो)

भारत ने पाकिस्तान के आरोपों का मजबूती से खंडन करते हुए कहा है कि पाकिस्तान के ‘पुराने रवैये’ का समय अब पूरा हो चुका है और उसे कश्मीर के लिए अपनी ‘निरर्थक खोज’ छोड़ देनी चाहिए। पाकिस्तान ने भारत पर आरोप लगाया था कि मौजूदा स्थिति के लिए भारत जिम्मेदार है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने ‘संगठन के कार्य पर महासचिव की रिपोर्ट’ विषय पर महासभा में चर्चा के दौरान पाकिस्तान की दूत मलीहा लोधी की उन टिप्पणियों का दृढ़ता से खंडन किया जिनमें मलीहा ने कहा था कि भारत ने अपनी हालिया ‘घोषणाओं और कार्रवाइयों’ से क्षेत्र में ऐसी स्थितियां पैदा की हैं जिसके कारण शांति एवं सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हुआ।

अकबरुद्दीन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के दावे का कोई समर्थन नहीं कर रहा है और उसे कश्मीर के लिए अपनी खोज छोड़ देनी चाहिए, जो भारत का अभिन्न हिस्सा है। अकबरुद्दीन ने कहा, ‘पाकिस्तान के प्रति हमारी प्रतिक्रिया अटल है। वह अपनी व्यर्थ खोज छोड़ दे। जम्मू कश्मीर राज्य भारत का एक अभिन्न हिस्सा है और यह हमेशा रहेगा।’ अकबरुद्दीन ने कहा कि पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय मंचों के ‘गलत’ इस्तेमाल से हकीकत नहीं बदलेगी। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान के पुराने रवैये का समय अब पूरा हो चुका है।’ अकबरुद्दीन ने पाकिस्तान को आतंकवाद का वैश्विक केंद्र बताते हुए कहा कि कश्मीर पर उसके दावे और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के महासभा में अपने संबोधन के दौरान कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के बीच कोई समर्थन नहीं मिला।

अकबरुद्दीन ने कहा, ‘कुछ समय पहले ही हमने उस एकमात्र आवाज को सुना है जिसमें मेरे देश के अभिन्न हिस्से पर दावा किया गया है। यह (आवाज) ऐसे देश से आई है जिसने खुद को आतंकवाद के वैश्विक केंद्र के तौर पर स्थापित किया है। इस तरह के दावे को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच कोई समर्थन नहीं मिला।’ भारतीय दूत ने इस बात पर जोर दिया कि हाल में सम्पन्न संयुक्त राष्ट्र आम चर्चा के दौरान शरीफ के ‘आधारहीन दावों’ को ‘एक भी समर्थन नहीं मिला।’ मलीहा ने भारत के लक्षित हमले का जिक्र करते हुए कहा था, ‘पिछले कुछ हफ्तों से भारत नियंत्रण रेखा से सटे क्षेत्र में बिना उकसावे के गोलाबारी कर रहा है। यह आज भी जारी है।’

संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपनी टिप्पणी में कश्मीर का जिक्र करते हुए मलीहा ने कहा कि पाकिस्तान भारत के साथ बातचीत के लिए तैयार है लेकिन यह भारत ही है जिसने मौजूदा स्थिति को खराब करने में पहला कदम उठाया है। अकबरुद्दीन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बढ़ते आतंकवाद की समस्या से निपटना चाहिए जो राष्ट्रों के लिए सर्वाधिक खतरनाक है। उन्होंने पाकिस्तान के संदर्भ में कहा, ‘हममें से कुछ हमारे सामूहिक प्रयासों को बाधित करते हैं क्योंकि वे अपनी क्षेत्रीय महत्वाकांक्षा के लिए आतंकवादियों का इस्तेमाल परोक्ष युद्ध के लिए करते हैं।’ अकबरुद्दीन ने बढ़ते आतंकवाद से निपटने के लिए ठोस नीतियां लाने और कदम उठाने में निष्क्रियता के लिए विश्व निकाय की कड़ी आलोचना भी की।

अकबरुद्दीन ने कहा कि निर्दोष लोगों, सभ्यतागत धरोहर तथा समाजों की सामाजिक-आर्थिक अवसंरचना को निशाना बनाकर लगातार की जा रही आतंकवादी कार्रवाई से विश्व की जनता की अंतरात्मा हर रोज झकझोरी जा रही है, खासकर संवदेनशील विकासशील देशों में। उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति एवं सुरक्षा के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक आतंकवाद से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र के लिए अभी कोई ठोस रणनीति लेकर आना बाकी है। भारतीय दूत ने रेखांकित किया कि संयुक्त राष्ट्र में 31 इकाइयां आतंकवाद के प्रतिरोध के काम में लगी हुई हैं और इस मामले में यह कहावत चरितार्थ हो रही है कि सात हाथों में काम बिगड़ता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर काफी समय से लंबित समग्र संधि का संदर्भ देते हुए कहा, ‘यह सामंजस्य और समन्वय की कमी का स्पष्ट उदाहरण है । आतंकवाद के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता पर दलील देना तक मुश्किल हो रहा है जहां पिछले 20 साल से चर्चा के बावजूद आतंकवादियों पर मुकदमा चलाने या उनके प्रत्यर्पण पर कोई अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं बन पाया है।’

अकबरुद्दीन ने कहा कि शांति बहाली के संदर्भ में भी संयुक्त राष्ट्र का ‘महत्व’ काफी दबाव में है। उन्होंने शांति सैनिकों द्वारा यौन उत्पीड़न के ‘भयावह’ मामलों पर भी चिंता जताई। अकबरुद्दीन ने कहा, ‘शांति सैनिकों का दरिंदे में तब्दील होना हमारे सबसे भयावह दु:स्वप्न का सच होने जैसा है।’ पाकिस्तान ने भारत के बयान पर अपने जवाब के अधिकार का इस्तेमाल किया और कहा कि ‘मनगढ़ंत बात करने, शब्द जाल बुनने और दावे करने से’ कश्मीर का मुद्दा नहीं सुलझ जाएगा। पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा नहीं है और यह सुरक्षा परिषद के एजेंडा में है। उन्होंने कहा कि कश्मीर के ‘महत्वपूर्ण मुद्दे’ को ‘खाली शब्दजाल बुनकर दरकिनार नहीं किया जा सकता’ और इसका समाधान सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुरूप किए जाने की आवश्यकता है। पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने कहा, ‘पाकिस्तान और जम्मू कश्मीर के सही प्रतिनिधियों से वार्ता करने तथा कश्मीरी लोगों की भावना के अनुरूप मुद्दे का समाधान किए जाने की आवश्यकता है।’

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