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सुषमा स्वराज ने परोक्ष रूप से चीन पर साधा निशाना, कहा- आतंकवाद से निपटने में दोहरा मापदंड खतरनाक

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार के बारे में सुषमा ने कहा कि इस मुद्दे पर तत्काल कदम उठाने की जरूरत है तथा उन्होंने इसमें रूस और चीन का सहयोग मांगा।
Author मॉस्को | April 18, 2016 20:58 pm
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज मास्को में अपने चीनी समकक्ष वांग यी से हाथ मिलाते हुए। (पीटीआई फोटो)

आतंकी नेटवर्कों के खिलाफ ठोस वैश्विक कार्रवाई की मांग करते हुए भारत ने सोमवार (18 अप्रैल) को अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगाह किया कि अगर उसने इस समस्या से निपटने में ‘दोहरा मापदंड’ अपनाना जारी रखा तो इसके ‘गंभीर परिणाम’ होंगे। रूस-भारत-चीन (आरआईसी) के विदेश मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि इस समूह को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दुनिया का नेतृत्व करना होगा।

इस बयान से पहले सुषमा स्वराज ने जैश-ए-मुहम्मद के सरगना और पठानकोट आतंकी हमले के मास्टमाइंड मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकवादी घोषित करवाने के भारत के प्रयास को चीन की ओर से बाधित किए जाने का मुद्दा भी इस बैठक में अपने चीनी समकक्ष वांग यी के समक्ष पुरजोर ढंग से उठाया।

सुषमा ने कहा, ‘‘भारत का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से निरंतर बना हुआ है। आरआईसी देशों को संयुक्त राष्ट्र सहित सभी मंचों पर साझा कार्रवाई के जरिए आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को साथ लाने में नेतृत्व करना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमें इस संदर्भ में विफल नहीं होना चाहिए। अगर हम आतंकवाद से निपटने में दोहरा मापदंड अपनाना जारी रखते हैं तो इसका न सिर्फ हमारे खुद के देशों, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर नतीजे होंगे।’’

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार के बारे में सुषमा ने कहा कि इस मुद्दे पर तत्काल कदम उठाने की जरूरत है तथा उन्होंने इसमें रूस और चीन का सहयोग मांगा। उन्होंने कहा, ‘‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मुद्दे पर मुझे अपनी बात रखने दीजिए। इस मुद्दे पर कुछ प्रगति हुई है कि पहली बार यहां अंतर-सरकारी बातचीत में लिखित बिंदु रखा जा रहा है। बहरहाल, हमें इस मुद्दे पर तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। मैं अपने चीनी और रूसी सकमक्षों से इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए सहयोग चाहती हूं।’’

विदेश मंत्री ने कहा कि वैश्विक आर्थिक मंदी ने तीनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए कई मुद्दे पैदा किए हैं और तेज प्रगति के लिए इन्हें हाथ मिलाना चाहिए। ब्रिक्स पर सुषमा ने कहा कि आर्थिक प्रगति को बढ़ावा देने के लिए यह एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है। उन्होंने कहा, ‘‘हम इस साल ब्रिक्सि की अपनी अध्यक्षता के दौरान होने वाली बैठकों में सभी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी को लेकर उत्सुक हैं। हम अक्तूबर महीने में गोवा में बहुत सफल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की आशा करते हैं।’’

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